धनबाद: सरकारी जमीन इस्तेमाल के एवज में BCCL ने दिए 220 करोड़, अब ड्रोन से होगी ओवरबर्डन की मापी
झारखंड विधानसभा की विशेष समिति ने धनबाद में BCCL, CCL और ECL द्वारा सरकारी, वन और रैयती जमीन के उपयोग की समीक्षा की। ड्रोन से ओवरबर्डन मापी, IIT-ISM की तकनीकी मदद और कंपनियों से हजार करोड़ से अधिक राजस्व मिलने की संभावना सामने आई।
- IIT-ISM की मदद से बनेगा 3D मैप और टोपोग्राफिकल डेटा
- विधानसभा समिति ने FCI की टोल वसूली पर उठाए सवाल
- सरकार को खनन कंपनियों से 1000 करोड़ से अधिक राजस्व मिलने की संभावना
- रैयतों को मुआवजा दिलाने के लिए समिति ने तेज की कार्रवाई
धनबाद (Threesocieties.com Desk): कोयलांचल में वर्षों से चल रहे सरकारी जमीन, वन भूमि और रैयती जमीन के उपयोग को लेकर अब बड़ा खुलासा सामने आया है। झारखंड विधानसभा की विशेष समिति (प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण) की समीक्षा बैठक में यह बात निकलकर सामने आई कि कई कोल कंपनियों ने दशकों से सरकारी जमीन का उपयोग किया है और अब इसके एवज में भारी राजस्व वसूली की प्रक्रिया तेज हो रही है।
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सोमवार को धनबाद परिसदन में आयोजित समिति की बैठक में सभापति सह टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो की अध्यक्षता में कोल कंपनियों, प्रशासन और विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में सिंदरी विधायक चंद्रदेव महतो, निरसा विधायक अरूप चटर्जी, चंदनकियारी विधायक उमाकांत रजक, तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
ड्रोन से होगी ओवरबर्डन डंपिंग की हाईटेक मापी
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय BCCL एरिया 9, 10 और 11 में सरकारी, वन और रैयती जमीन पर डंप किए गए ओवरबर्डन की ड्रोन आधारित मापी को लेकर लिया गया। जिला प्रशासन ने प्रस्ताव रखा कि आधुनिक ड्रोन टेक्नोलॉजी के जरिए हाई-डेंसिटी 3D डेटा और टोपोग्राफिकल मैप तैयार कर सटीक मापी की जाएगी।इस तकनीकी प्रक्रिया में IIT-ISM की मदद ली जाएगी, जिससे जमीन उपयोग का सटीक आंकड़ा सामने आ सके।
BCCL ने जमा किए 220 करोड़, सरकार को मिल सकते हैं 1000 करोड़ से ज्यादा
समिति के सभापति मथुरा प्रसाद महतो ने कहा कि समिति के प्रयासों से यह तथ्य सामने आया कि केवल BCCL ने ही सरकारी जमीन के उपयोग के एवज में झारखंड सरकार के खाते में लगभग 220 करोड़ रुपये जमा कराए हैं।उन्होंने कहा कि CCL और ECL ने भी स्वीकार किया है कि उन्होंने खनन के लिए सरकारी जमीन का उपयोग किया है और इसके एवज में राजस्व देने की बात स्वीकारी है। इससे राज्य सरकार को 1000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होने की संभावना है।
रैयतों को मिलेगा मुआवजा, 200 से ज्यादा आवेदन जांच में
समिति ने स्पष्ट किया कि जिन रैयतों की जमीन का उपयोग खनन और ओवरबर्डन डंपिंग में किया गया है, उन्हें उचित मुआवजा दिलाया जाएगा।सिंदरी विधायक ने बताया कि अब तक लगभग 200 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनकी जांच झरिया और बलियापुर अंचल कार्यालयों में चल रही है।
मैथन पावर और टाटा कोलियरी की जमीन उपयोग की भी होगी जांच
समिति ने मैथन पावर लिमिटेड द्वारा निरसा क्षेत्र तथा टाटा कोलियरी द्वारा सिजुआ और भेलाटांड क्षेत्र में इस्तेमाल की गई सरकारी जमीन की भी मापी कराने का निर्देश दिया।इससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि समिति केवल कोल कंपनियों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सभी औद्योगिक इकाइयों के भूमि उपयोग की जांच करेगी।
FCI की टोल वसूली पर विधानसभा समिति सख्त
बैठक में FCI द्वारा RCD सड़क पर चेकपोस्ट बनाकर टोल वसूली का मुद्दा भी उठा। सिंदरी विधायक ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए सवाल उठाया कि आखिर किस आधार पर यह वसूली की जा रही है। समिति ने इस पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने का निर्देश दिया।
भूमि विवाद और लंबित मामलों को जल्द निपटाने का निर्देश
बैठक में भूमि विवाद, वंशावली आवेदन, मुआवजा सूची और अन्य लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन के निर्देश भी दिए गए। उपायुक्त ने समिति को भरोसा दिलाया कि लंबित मामलों के समाधान की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
कोयलांचल की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है बड़ा असर
विशेष समिति की इस कार्रवाई को धनबाद कोयलांचल में वर्षों से चले आ रहे भूमि विवाद, अवैध उपयोग और मुआवजा विवाद के समाधान की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यदि ड्रोन सर्वे और भूमि उपयोग की जांच पूरी तरह लागू होती है, तो इससे सरकार को हजारों करोड़ का राजस्व और प्रभावित रैयतों को आर्थिक राहत मिलने की संभावना है।






