धनबाद के डिप्टी मेयर अरुण चौहान पर कानूनी शिकंजा, चुनाव रद्द कराने की याचिका पर कोर्ट का नोटिस

धनबाद के डिप्टी मेयर अरुण चौहान के खिलाफ चुनाव रद्द करने की याचिका पर अदालत ने नोटिस जारी किया। शपथ पत्र में आपराधिक मामलों को छुपाने का आरोप, मामला हुआ गंभीर।

धनबाद के डिप्टी मेयर अरुण चौहान पर कानूनी शिकंजा, चुनाव रद्द कराने की याचिका पर कोर्ट का नोटिस
डिप्टी मेयर अरुण चाैहान। (फाइल फोटो)

धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद नगर निगम (DMC) के नवनियुक्त डिप्टी मेयर अरुण चौहान की मुश्किलें अब बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके पार्षद के रूप में हुए चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने उनके खिलाफ नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।

यह भी पढ़ें: ‘ढोंगी बाबा’ अशोक खरात बेनकाब: ज्योतिष के नाम पर शोषण, ब्लैकमेल और जबरन गर्भपात का खौफनाक खेल!

यह मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर गर्मा गया है, जिससे नगर निगम की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

क्या है पूरा मामला?

धनबाद की अदालत में यह याचिका वार्ड नंबर 7 से चुनाव हार चुकी प्रत्याशी नेहा सिंह की ओर से दायर की गई है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अवर न्यायाधीश की अदालत ने मामले को स्वीकार करते हुए डिप्टी मेयर अरुण चौहान को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। नेहा सिंह ने अपनी याचिका में मांग की है कि अरुण चौहान का पार्षद के रूप में निर्वाचन रद्द किया जाए।

 डिप्टी मेयर पर क्या हैं आरोप?

याचिका में आरोप लगाया गया है कि अरुण चौहान ने नामांकन के दौरान चुनाव पदाधिकारी को दिए गए शपथ पत्र में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी नहीं दी। शपथ पत्र में उन्होंने केवल 3 मामलों का जिक्र किया गया है। जबकि उनके खिलाफ लोयाबाद थाना में कुल 7 आपराधिक मामले लंबित बताये गये हैं।

 कौन-कौन से मामले बताए गए लंबित?

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं पंकज प्रसाद और केके तिवारी ने अदालत को बताया कि अरुण चौहान के खिलाफ निम्नलिखित मामले लंबित हैं:

थाना कांड संख्या 11/17
07/19
51/18
42/17
23/17
26/15
49/21

इन मामलों को शपथ पत्र में छुपाना झारखंड म्युनिसिपल एक्ट 2011 के प्रावधानों का उल्लंघन बताया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला

याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत में 2002 के सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण फैसले का हवाला देते हुए कहा कि चुनावी शपथ पत्र में आपराधिक मामलों की जानकारी छुपाना गंभीर अपराध है और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ धोखाधड़ी के समान है।

अब आगे क्या?

अदालत द्वारा नोटिस जारी होने के बाद अब अरुण चौहान को अपना पक्ष रखना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई में यह तय होगा कि:

क्या उनका चुनाव रद्द होगा?
या आरोपों को खारिज कर दिया जाएगा?