गोलकडीह साइडिंग में W-5 के नाम पर W-4 कोयला?, 145 रैक से ₹63.42 करोड़ नुकसान का दावा
धनबाद की गोलकडीह-9 साइडिंग से कोयला डिस्पैच में W-5 की जगह W-4 ग्रेड भेजने का आरोप है। 145 रैक से ₹63.42 करोड़ नुकसान के दावे की जांच की मांग।
HighLights:
- गोलकडीह-9 साइडिंग से करीब छह लाख टन कोयला डिस्पैच का दावा
- 10 अप्रैल से 21 अगस्त 2026 के बीच 145 रैक पर उठे सवाल
- कागज पर W-5 और रैक में W-4 कोयला लोड करने का आरोप
- आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी, जांच के बाद साफ होगी वास्तविक तस्वीर
धनबाद (Threesocieties.com Desk): बीसीसीएल के लोदना क्षेत्र की गोलकडीह-9 रेलवे साइडिंग से कोयला डिस्पैच को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कागजों में वाशरी-5 (W-5) ग्रेड का कोयला दिखाकर रैक में वाशरी-4 (W-4) ग्रेड का कोयला लोड कर भेजा गया। शिकायतकर्ता ने इस कथित ग्रेड अंतर से बीसीसीएल, राज्य सरकार और केंद्र सरकार को कुल 63.42 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का दावा किया है।
बताया गया है कि 10 अप्रैल से 21 अगस्त 2026 के बीच गोलकडीह-9 साइडिंग से करीब छह लाख टन कोयले का डिस्पैच हुआ। इसमें निजी ई-नीलामी खरीदारों के लिए भेजे गये 145 रैक को लेकर विशेष रूप से सवाल उठाये गये हैं।
हालांकि, ₹63.42 करोड़ का नुकसान फिलहाल शिकायतकर्ता का दावा है। वास्तविक नुकसान या किसी अनियमितता की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड, स्टॉक, नमूना जांच और डिस्पैच दस्तावेजों के स्वतंत्र मिलान के बाद ही हो सकेगी।
कागज पर W-5, रैक में W-4 होने का आरोप
शिकायत के मुताबिक निजी ई-नीलामी खरीदारों को दस्तावेजों में W-5 ग्रेड का कोयला बेचा गया, जबकि संबंधित रैक में कथित तौर पर W-4 ग्रेड का कोयला लोड किया गया। चूंकि कोयले का ग्रेड उसकी गुणवत्ता और कीमत से सीधे जुड़ा होता है, इसलिए शिकायत में इस कथित अंतर को गंभीर वित्तीय मुद्दा बताया गया है। आरोप है कि यदि कम ग्रेड के नाम पर बिक्री की गयी और वास्तविक रूप से उससे बेहतर ग्रेड का कोयला भेजा गया, तो बिक्री मूल्य और वास्तविक कोयले की गुणवत्ता के बीच अंतर की जांच जरूरी है।
एक ही साइडिंग से दो ग्रेड के कोयला उठाव पर सवाल
शिकायतकर्ता ने गोलकडीह-9 साइडिंग की लोडिंग व्यवस्था पर भी सवाल उठाया है। दावा किया गया है कि यहां प्रतिदिन छह से आठ रैक तक कोयला भेजा जाता है। इनमें तीन-चार रैक सरकारी बिजलीघरों के लिए W-4 ग्रेड और एक-दो रैक निजी ई-नीलामी खरीदारों के लिए W-5 ग्रेड के नाम पर भेजे जाने की बात कही गयी है।
शिकायत में सवाल है कि एक ही परिसर में उपलब्ध बड़े कोयला स्टॉक से अलग-अलग ग्रेड के कोयले को किस तरह अलग रखा गया और उनकी अलग-अलग रैक में लोडिंग की गयी। हालांकि, यह व्यवस्था तकनीकी रूप से संभव थी या नहीं, इसका जवाब केवल स्टॉक रजिस्टर, लोडिंग रिकॉर्ड, सैंपलिंग रिपोर्ट और साइडिंग की वास्तविक लोडिंग व्यवस्था की जांच से ही मिल सकता है।
63.42 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा कैसे?
शिकायतकर्ता ने कथित नुकसान को तीन प्रमुख मदों में बांटा है।
बीसीसीएल: 45.36 करोड़ रुपये
राज्य सरकार: रॉयल्टी, NMET और DMFT मद में 8.38 करोड़ रुपये
केंद्र सरकार: GST मद में 9.67 करोड़ रुपये
इन तीनों को मिलाने पर कुल राशि 63.42 करोड़ रुपये बतायी गयी है।
लेकिन यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह राशि शिकायतकर्ता की ओर से किया गया अनुमान/दावा है। वास्तविक वित्तीय नुकसान का निर्धारण बिक्री मूल्य, घोषित ग्रेड, वास्तविक ग्रेड, मात्रा, रॉयल्टी, टैक्स और अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच के बाद ही किया जा सकता है।
145 रैक में करीब 90 फीसदी एक समूह से जुड़े होने का दावा
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि गोल-9 से भेजे गये 145 रैक में करीब 90 प्रतिशत रैक रश्मि समूह से जुड़े होने की बात सामने आती है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कथित ग्रेड अंतर से निजी खरीदारों को आर्थिक लाभ पहुंचा। साथ ही स्थानीय अधिकारियों और संवेदक की कथित मिलीभगत से निजी खरीदार को करीब 30 से 40 करोड़ रुपये के लाभ का आरोप भी लगाया गया है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित खरीदारों, ई-नीलामी दस्तावेजों, बिक्री दर, रैक विवरण और वास्तविक लोडिंग रिकॉर्ड के मिलान के बाद ही इन दावों की पुष्टि या खंडन संभव होगा।
छह लाख टन कोयले के डिस्पैच की होगी जांच?
शिकायतकर्ता ने 10 अप्रैल से 21 अगस्त 2026 के बीच गोलकडीह-9 से भेजे गये प्रत्येक संबंधित रैक की जांच की मांग की है। जांच के लिए जिन रिकॉर्डों के मिलान की मांग की गयी है, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
ई-नीलामी के दस्तावेज
घोषित कोयला ग्रेड
ई-नीलामी में निर्धारित बिक्री दर
साइडिंग का स्टॉक रजिस्टर
कोयले की सैंपलिंग रिपोर्ट
लोडिंग रिकॉर्ड
रेलवे रैक का विवरण
बिक्री बिल
रॉयल्टी भुगतान का रिकॉर्ड
DMFT और NMET भुगतान
GST से संबंधित दस्तावेज
इन रिकॉर्डों का मिलान होने पर यह पता चल सकता है कि कागज पर बेचे गये ग्रेड और वास्तव में रैक में लोड किये गये कोयले के ग्रेड में कोई अंतर था या नहीं।
जांच में तीन सवाल सबसे अहम
पूरे मामले में जांच के दौरान तीन सवाल सबसे महत्वपूर्ण होंगे।
पहला, ई-नीलामी में संबंधित खरीदार को किस ग्रेड का कोयला और किस दर पर बेचा गया?
दूसरा, उस अवधि में गोलकडीह-9 साइडिंग पर W-4 और W-5 ग्रेड का कितना स्टॉक मौजूद था?
तीसरा, संबंधित रैक में लोड किये गये कोयले के नमूने की जांच रिपोर्ट में कौन-सा ग्रेड दर्ज है?
यदि इन तीनों रिकॉर्ड में अंतर मिलता है, तो शिकायत में लगाये गये आरोपों की जांच को महत्वपूर्ण आधार मिल सकता है।
कोयले के ग्रेड का अंतर क्यों है महत्वपूर्ण?
कोयले का ग्रेड उसकी गुणवत्ता और बाजार मूल्य से जुड़ा होता है। सामान्य तौर पर बेहतर गुणवत्ता वाले कोयले का मूल्य अधिक होता है।ऐसे में यदि किसी बिक्री में एक ग्रेड घोषित किया गया हो, लेकिन वास्तविक डिस्पैच में दूसरे ग्रेड का कोयला भेजे जाने की पुष्टि होती है, तो मूल्य अंतर, राजस्व, रॉयल्टी और कर देनदारी समेत कई सवाल खड़े हो सकते हैं। इसी वजह से गोलकडीह-9 मामले में केवल रैक की संख्या या कोयले की मात्रा देखना पर्याप्त नहीं होगा। ई-नीलामी से लेकर स्टॉक, सैंपलिंग, लोडिंग और रेलवे डिस्पैच तक पूरी चेन का रिकॉर्ड मिलाना जरूरी होगा।
शिकायत सही या आरोप निराधार, जांच से ही साफ होगी तस्वीर
गोलकडीह-9 साइडिंग से जुड़े मामले में फिलहाल सामने आये तथ्य शिकायत में किये गये दावों और आरोपों पर आधारित हैं। 63.42 करोड़ रुपये का नुकसान, 30-40 करोड़ रुपये का कथित निजी लाभ और 145 रैक में ग्रेड अंतर जैसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच में संबंधित अवधि के प्रत्येक रैक का ई-नीलामी रिकॉर्ड, कोयले का घोषित ग्रेड, बिक्री मूल्य, स्टॉक स्थिति, सैंपल रिपोर्ट, लोडिंग विवरण और कर-रॉयल्टी भुगतान आपस में मिलाना महत्वपूर्ण होगा। रिकॉर्ड में यदि घोषित ग्रेड और वास्तविक लोडिंग के बीच अंतर सामने आता है, तो मामले की वित्तीय और प्रशासनिक गंभीरता स्पष्ट हो सकती है। वहीं रिकॉर्ड में कोई विसंगति नहीं मिलने पर शिकायत में किये गये नुकसान के दावे पर भी सवाल उठेंगे।
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