कचरे से कमाल! IIT-ISM में ‘वेस्ट टू बेस्ट’ प्रतियोगिता, छात्रों ने दिखाया हुनर
IIT-ISM धनबाद में स्वच्छता ही सेवा कैंपेन 2026 के तहत ‘बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट’ प्रतियोगिता हुई। कचरे से उपयोगी प्रोडक्ट बनाकर प्रतिभागियों ने दिखाई क्रिएटिविटी।
HighLights:
- IIT-ISM धनबाद में ‘बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट’ प्रतियोगिता आयोजित
- स्वच्छता ही सेवा कैंपेन 2026 के तहत हुआ आयोजन
- ‘वेस्ट टू बेस्ट – कचरा नहीं, रिसोर्स है’ रही प्रतियोगिता की थीम
- स्कूली बच्चों से लेकर स्टूडेंट्स, रिसर्च स्कॉलर्स और प्रोफेशनल्स ने लिया हिस्सा
धनबाद (Threesocieties.com Desk): कचरे को सिर्फ फेंकने वाली चीज नहीं, बल्कि उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने का संदेश देने के उद्देश्य से आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में ‘बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट’ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम स्वच्छता ही सेवा कैंपेन 2026 के तहत डिपार्टमेंट ऑफ एनवायरनमेंटल साइंस एंड इंजीनियरिंग के ईआईएसीपी प्रोग्राम सेंटर ने सेंटर फॉर सोसाइटल मिशन (CSM) के सहयोग से आयोजित किया।
कार्यक्रम का आयोजन मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज, भारत सरकार के सहयोग से किया गया। प्रतियोगिता की थीम “वेस्ट टू बेस्ट – कचरे से कमाल: कचरा नहीं, रिसोर्स है” रखी गई थी।
तीन कैटेगरी में हुई प्रतियोगिता
प्रतियोगिता को प्रतिभागियों की आयु और प्रोफेशन के आधार पर तीन अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया था। पहली कैटेगरी में कक्षा 8वीं से 12वीं तक के स्कूली बच्चों को शामिल किया गया। दूसरी कैटेगरी में अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट्स और रिसर्च स्कॉलर्स ने हिस्सा लिया। वहीं तीसरी कैटेगरी में वर्किंग प्रोफेशनल्स, होममेकर और अन्य प्रतिभागियों को शामिल किया गया।
प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने अलग-अलग तरह की बेकार और इस्तेमाल की जा चुकी सामग्रियों का रचनात्मक तरीके से इस्तेमाल करते हुए उपयोगी और आकर्षक प्रोडक्ट तैयार किए। प्रतिभागियों ने अपने आइडिया और क्रिएटिविटी के जरिए यह दिखाने का प्रयास किया कि सही सोच और तकनीक के इस्तेमाल से कई ऐसी वस्तुओं को दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है, जिन्हें सामान्य तौर पर कचरा समझकर फेंक दिया जाता है।
कचरे को रिसोर्स के तौर पर देखने का संदेश
प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य कचरा कम करने, पुन: उपयोग को बढ़ावा देने और डिस्कार्डेड मटेरियल से उपयोगी उत्पाद तैयार करने की सोच विकसित करना था। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों और लोगों के बीच पर्यावरण संरक्षण, रिसोर्स मैनेजमेंट और जिम्मेदार कचरा प्रबंधन को लेकर जागरूकता पैदा करने का प्रयास किया गया।
आईआईटी (आईएसएम) का ईआईएसीपी (Environmental Information, Awareness, Capacity Building and Livelihood Programme) सेंटर पर्यावरण से संबंधित जानकारी, जागरूकता और क्षमता विकास के क्षेत्र में काम करता है। वहीं सेंटर फॉर सोसाइटल मिशन (CSM) संस्थान की विशेषज्ञता और ज्ञान को समाज तक पहुंचाने से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देता है।
डायरेक्टर प्रो. सुकुमार मिश्रा ने की प्रतिभागियों की सराहना
कार्यक्रम में आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के डायरेक्टर प्रो. सुकुमार मिश्रा ने प्रतिभागियों के आइडिया और प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम लोगों की सोच में बदलाव लाने में मदद करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कचरे को केवल फेंकने वाली वस्तु के रूप में देखने के बजाय उसे एक रिसोर्स के तौर पर इस्तेमाल करने की दिशा में सोच विकसित करने की जरूरत है। ऐसी गतिविधियां विशेष रूप से युवाओं और विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाने में मदद करती हैं।
फैकल्टी, अधिकारी और स्टाफ भी हुए शामिल
कार्यक्रम में दीप्ति लेडीज क्लब की प्रेसिडेंट शकुंतला मिश्रा भी मौजूद थीं। इसके अलावा संस्थान के फैकल्टी मेंबर्स, ऑफिसर्स, स्टाफ और विभिन्न कैटेगरी के प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
‘वेस्ट टू बेस्ट’ प्रतियोगिता के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता के साथ-साथ रीयूज, रिसाइक्लिंग और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल की दिशा में सोच को भी प्रदर्शित किया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जागरूकता और रचनात्मक सोच के जरिए कचरे की मात्रा कम करने के साथ-साथ इस्तेमाल की जा चुकी वस्तुओं को नए रूप में उपयोग किया जा सकता है।




