सेल-बीसीसीएल में लोहा-कोयला चोरी पर CBI का शिकंजा, कई CISF अफसर रडार पर

सेल भिलाई और BCCL धनबाद में लोहा-कोयला चोरी मामलों की CBI जांच तेज। उप कमांडेंट ओम कुमार तनवर व इंस्पेक्टर राज लक्ष्मी वर्मा पर प्राथमिकी, कई CISF अधिकारी रडार पर।

सेल-बीसीसीएल में लोहा-कोयला चोरी पर CBI का शिकंजा, कई CISF अफसर रडार पर
कई CISF अधिकारी-जवान जांच के दायरे में।

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  • सेल भिलाई और बीसीसीएल धनबाद में लोहा-कोयला चोरी की जांच तेज
  • बीसीसीएल मामले में उप कमांडेंट ओम कुमार तनवर व इंस्पेक्टर राज लक्ष्मी वर्मा पर प्राथमिकी
  • वर्तमान और सेवानिवृत्त CISF अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
  • जांच में दो दर्जन से अधिक CISF अधिकारी-जवानों के नाम सामने आने का दावा

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): सरकारी उपक्रमों में लोहा और कोयला चोरी से जुड़े मामलों को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। Steel Authority of India Limited (SAIL) के भिलाई इस्पात संयंत्र में कथित लोहा चोरी और Coal India Limited की BCCL धनबाद इकाई में कथित कोयला चोरी से जुड़े मामलों में जांच आगे बढ़ रही है। इस कार्रवाई के बीच CISF के वर्तमान और सेवानिवृत्त अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की बात कही जा रही है।

बीसीसीएल धनबाद से जुड़े मामले में CBI ने उप कमांडेंट ओम कुमार तनवर और इंस्पेक्टर राज लक्ष्मी वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू की है। वहीं, सेल के भिलाई इस्पात संयंत्र में भी कथित लोहा चोरी से जुड़े मामले की जांच तेज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

मामले की गंभीरता इस वजह से भी बढ़ गई है कि दोनों ही सरकारी औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था में CISF की महत्वपूर्ण भूमिका है। जांच के दायरे में वर्तमान अधिकारियों के साथ पूर्व में इन इकाइयों में तैनात रहे कुछ अधिकारियों और जवानों की भूमिका भी देखे जाने की बात कही जा रही है।

झारखंड कैडर के IPS अधिकारी चंदन झा भिलाई में तैनात

सेल भिलाई और बीसीसीएल धनबाद दोनों इकाइयों में वर्तमान समय में CISF के DIG स्तर पर IPS अधिकारियों की तैनाती है। भिलाई इस्पात संयंत्र में झारखंड कैडर के IPS अधिकारी और बोकारो के पूर्व SP चंदन झा CISF DIG के पद पर कार्यरत हैं। वहीं, BCCL धनबाद इकाई में बिहार कैडर के IPS अधिकारी और BSL बोकारो के पूर्व DIG राजीव मिश्रा की तैनाती है। ऐसे में CISF की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में CBI की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जांच का मुख्य फोकस कथित चोरी, सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूक और अधिकारियों-जवानों की भूमिका से जुड़े पहलुओं पर बताया जा रहा है।

BCCL में CBI की एंट्री के बाद बढ़ी हलचल

BCCL धनबाद में कोयला चोरी से जुड़े मामले में CBI की जांच आगे बढ़ने के बाद CISF से जुड़े कई पुराने मामलों और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की बात कही जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ अधिकारियों और जवानों की कार्यप्रणाली को लेकर CISF स्तर पर पहले भी सवाल उठाए गए थे। इसके बाद संबंधित अधिकारियों का अलग-अलग CISF इकाइयों में तबादला किए जाने की बात सामने आई थी। बताया जाता है कि इसका एक उद्देश्य जांच की प्रक्रिया को प्रभावित होने से रोकना भी था।अब CBI द्वारा मामले की जांच आगे बढ़ाए जाने के बाद पुराने रिकॉर्ड, तैनाती, सुरक्षा व्यवस्था और कथित कोयला चोरी से जुड़े नेटवर्क के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

तत्कालीन ADG कुंदन कृष्णन की रिपोर्ट का भी जिक्र

BCCL धनबाद में कथित कोयला चोरी के मामले में CISF के तत्कालीन ADG कुंदन कृष्णन की गोपनीय रिपोर्ट का भी जिक्र सामने आया है। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट में अधिकारियों और जवानों की भूमिका से जुड़े कुछ गंभीर बिंदुओं को साक्ष्यों के साथ मुख्यालय के समक्ष रखा गया था। इसी रिपोर्ट और उससे जुड़े दस्तावेजों के आधार पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई और स्थानांतरण किए जाने की बात कही जा रही है। अब CBI जांच के दौरान पुराने दस्तावेजों और रिपोर्टों की भी पड़ताल किए जाने की संभावना है। हालांकि, इन आरोपों और रिपोर्ट में दर्ज बिंदुओं की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

दो दर्जन से ज्यादा अधिकारी-जवान जांच के दायरे में होने का दावा

सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि BCCL धनबाद में कथित कोयला चोरी और कोल माफिया से कथित गठजोड़ से जुड़े मामले की जांच में दो दर्जन से अधिक CISF अधिकारी और जवानों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। इनमें कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट, असिस्टेंट कमांडेंट, इंस्पेक्टर और जवान स्तर के कर्मियों के नाम शामिल होने की बात कही जा रही है। इनमें से कई वर्तमान समय में देश के अलग-अलग CISF प्रतिष्ठानों में पदस्थापित बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसी पुराने कार्यकाल के दौरान उनकी तैनाती, सुरक्षा जिम्मेदारी, संवेदनशील क्षेत्रों में ड्यूटी, कथित चोरी के मामलों और संबंधित अधिकारियों के बीच संभावित संपर्क जैसे पहलुओं की जांच कर सकती है।

अधिकारियों की भूमिका पर भी जांच

BCCL जैसे कोयला उत्पादन क्षेत्र में CISF की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है। कोयला उत्पादन क्षेत्रों, स्टॉक, डिस्पैच प्वाइंट और संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था में CISF की तैनाती रहती है। ऐसे में कथित कोयला चोरी के मामले में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों की भूमिका जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। CBI की जांच में यह देखा जा सकता है कि चोरी की घटनाएं किस अवधि में हुईं, उस दौरान कौन-कौन से अधिकारी और जवान संबंधित क्षेत्र में तैनात थे, सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी और क्या किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत के आरोपों के संबंध में कोई ठोस साक्ष्य उपलब्ध हैं।

सेल भिलाई में भी CBI की जांच से बढ़ी चिंता

BCCL धनबाद के साथ SAIL के भिलाई इस्पात संयंत्र में कथित लोहा चोरी का मामला भी जांच एजेंसी के रडार पर है। दोनों मामलों में सरकारी संपत्ति से जुड़े आरोप होने के कारण जांच एजेंसी की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भिलाई इस्पात संयंत्र देश के प्रमुख स्टील प्लांटों में शामिल है। यहां कथित लोहा चोरी के मामले में CISF की सुरक्षा व्यवस्था और उससे जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच का हिस्सा बन सकती है।

वर्तमान और पूर्व अधिकारियों पर टिकी नजर

CBI की जांच आगे बढ़ने के साथ अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कथित चोरी की घटनाओं के समय किन अधिकारियों की तैनाती थी और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसके पास थी। वर्तमान अधिकारियों के साथ-साथ पूर्व में संबंधित इकाइयों में पदस्थापित रहे अधिकारियों की भूमिका भी रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर जांची जा सकती है। हालांकि, किसी अधिकारी का जांच के दायरे में होना अपने आप में अपराध सिद्ध होना नहीं है। किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी और दोष का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

जांच आगे बढ़ने के साथ खुल सकते हैं कई राज

BCCL धनबाद में CBI की जांच अब केवल प्राथमिकी दर्ज करने तक सीमित नहीं दिख रही है। पुराने मामलों, CISF की आंतरिक रिपोर्ट, अधिकारियों की तैनाती और कथित कोयला चोरी से जुड़े नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर जांच आगे बढ़ने की स्थिति में आने वाले दिनों में कई और तथ्य सामने आ सकते हैं। अब निगाह इस बात पर है कि CBI की जांच में कथित कोयला चोरी और लोहा चोरी के नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल पाए जाते हैं, सुरक्षा व्यवस्था में किस स्तर पर चूक हुई और क्या अधिकारियों की भूमिका के संबंध में ठोस साक्ष्य सामने आते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में कितने लोगों की भूमिका सामने आती है और उनके खिलाफ आगे किस स्तर की कानूनी कार्रवाई की जाती है।