सावन में उमड़ेगी आस्था की भीड़: सासाराम का पूर्वोत्तर ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर बना श्रद्धा का बड़ा धाम

बिहार के रोहतास स्थित पूर्वोत्तर ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर और महायोगी पायलट बाबा धाम सावन में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। जानिए इस भव्य मंदिर का इतिहास, विशेषताएं और धार्मिक महत्व।

सावन में उमड़ेगी आस्था की भीड़: सासाराम का पूर्वोत्तर ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर बना श्रद्धा का बड़ा धाम
पायलट की नौकरी छोड़ कपिल सिंह ने बसाया आस्था का धाम।।

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  • 30 जुलाई से शुरू होने वाले श्रावणी मेले में उमड़ेगी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़
  • वायुसेना के पूर्व पायलट कपिल सिंह ने 2004 में रखी थी महायोगी पायलट बाबा धाम की नींव
  • ढाई फीट ऊंचा स्फटिक शिवलिंग और 111 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा प्रमुख आकर्षण
  • 85 फीट ऊंची भगवान बुद्ध की प्रतिमा और विभिन्न देवी-देवताओं के मंदिर बनाते हैं इसे अनूठा धार्मिक स्थल

सासाराम (Threesocieties.com Desk): 30 जुलाई से शुरू हो रहे पवित्र श्रावण मास के साथ ही बिहार के प्रसिद्ध शिवधामों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगेगी। इन्हीं प्रमुख धार्मिक स्थलों में रोहतास जिला मुख्यालय के पूर्वी छोर पर एसपी जैन कॉलेज के समीप स्थित पूर्वोत्तर ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर इन दिनों विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। महायोगी पायलट बाबा धाम परिसर में स्थित यह मंदिर आज न केवल बिहार बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

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श्रावण मास में यहां जलाभिषेक के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में स्थापित विशाल शिव प्रतिमा, स्फटिक शिवलिंग, भगवान बुद्ध की भव्य प्रतिमा और अन्य धार्मिक स्थल इसे बिहार के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल करते हैं।

पायलट की नौकरी छोड़ बसाया आस्था का धाम

इस भव्य धाम की सबसे प्रेरणादायक कहानी इसके संस्थापक महायोगी पायलट बाबा यानी रोहतास जिले के नोखा प्रखंड स्थित विशुनपुरा गांव निवासी कपिल सिंह की है। उन्होंने भारतीय वायुसेना में पायलट की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़ आध्यात्मिक जीवन अपनाया और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया। वर्ष 2004 में भूमि पूजन के साथ महायोगी पायलट बाबा धाम की नींव रखी गई। करीब दो दशकों में यह स्थान देश के प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में अपनी पहचान बना चुका है।

कम समय में मिली राष्ट्रीय पहचान

नवंबर 2022 में योग गुरु बाबा रामदेव ने यहां स्थापित भव्य सोमनाथ मंदिर एवं स्फटिक शिवलिंग का उद्घाटन किया था। वहीं फरवरी 2018 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने परिसर में स्थापित 85 फीट ऊंची भगवान बुद्ध की प्रतिमा का अनावरण किया था। इन आयोजनों के बाद इस धाम की पहचान देशभर में तेजी से बढ़ी और आज यहां भारत के विभिन्न राज्यों के अलावा जर्मनी सहित कई देशों से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।

स्फटिक शिवलिंग बना विशेष आकर्षण

मंदिर में स्थापित लगभग ढाई फीट ऊंचा स्फटिक का शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। ऐसी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने पर भगवान शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। श्रावण मास में इस शिवलिंग पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है।

अघोरेश्वर महादेव मंदिर की अनोखी परंपरा

सोमनाथ मंदिर के समीप स्थित अघोरेश्वर महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां स्थापित पांच फीट ऊंचा काले पत्थर का शिवलिंग पूरे वर्ष दर्शन के लिए उपलब्ध नहीं रहता। मंदिर का कपाट केवल सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर ही खोला जाता है, जिससे इस मंदिर की धार्मिक महत्ता और अधिक बढ़ जाती है।

बुद्ध और सम्राट अशोक से भी जुड़ा है इतिहास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद बोधगया से सारनाथ जाते समय सासाराम में विश्राम किया था। धाम से कुछ दूरी पर कैमूर पहाड़ियों में सम्राट अशोक का ऐतिहासिक लघु शिलालेख भी मौजूद है, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को और समृद्ध बनाता है। इसी कारण यह क्षेत्र शिवभक्ति के साथ-साथ बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।

आस्था, संस्कृति और पर्यटन का अनूठा संगम

महायोगी पायलट बाबा धाम केवल एक मंदिर नहीं बल्कि धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां भगवान शिव, श्रीराम, भगवान बुद्ध सहित विभिन्न देवी-देवताओं और महान संतों की प्रतिमाएं स्थापित हैं। प्राकृतिक वातावरण, भव्य परिसर और आध्यात्मिक माहौल श्रद्धालुओं को विशेष अनुभूति कराता है। श्रावण मास में यहां भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।

धाम की प्रमुख विशेषताएं

85 फीट ऊंची भगवान बुद्ध की प्रतिमा।
111 फीट ऊंची भगवान शिव की भव्य प्रतिमा।
ढाई फीट ऊंचा स्फटिक शिवलिंग।
अघोरेश्वर महादेव मंदिर में पांच फीट ऊंचा काले पत्थर का शिवलिंग।
30 फीट ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा।
विभिन्न देवी-देवताओं एवं धर्म गुरुओं की प्रतिमाएं।
विशाल एवं शांत आध्यात्मिक परिसर।
सावन और महाशिवरात्रि पर विशेष धार्मिक आयोजन।