आधी रात ट्रक का स्टीयरिंग लॉक तोड़ ले गए फाइनेंसर, SC ने दिया ₹15 लाख मुआवजा का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने EMI डिफॉल्ट पर वाहन जब्ती को लेकर अहम फैसला दिया। रात 1 बजे ट्रक का लॉक तोड़कर ले जाने के मामले में फाइनेंसर को ₹15 लाख मुआवजा देने का आदेश।

आधी रात ट्रक का स्टीयरिंग लॉक तोड़ ले गए फाइनेंसर, SC ने दिया ₹15 लाख मुआवजा का आदेश
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: आधी रात वाहन नहीं उठा सकते फाइनेंसर, देना होगा ₹15 लाख मुआवजा।

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    HighLights:

  • सुप्रीम कोर्ट ने वाहन जब्ती को लेकर फाइनेंस कंपनियों को अहम निर्देश दिया
  • EMI डिफॉल्ट पर बलपूर्वक या चुपचाप वाहन जब्त करने के तरीके पर अदालत ने जताई आपत्ति
  • सुप्रीम कोर्ट ने ट्रक मालिक को 15 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया
  • अदालत ने कहा कि वाहन की रिकवरी कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होनी चाहिए 

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): ईएमआई नहीं चुकाने पर फाइनेंस कंपनियों द्वारा वाहनों की जब्ती को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कर्ज की वसूली के लिए फाइनेंस कंपनी या बैंक कानून को अपने हाथ में लेकर बलपूर्वक या चोरी-छिपे वाहन नहीं उठा सकता। गिरवी रखे वाहन की रिकवरी की प्रक्रिया कानून और निर्धारित नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक फाइनेंसर को ट्रक मालिक को 15 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। यह मामला उस ट्रक की जब्ती से जुड़ा है, जिसे मालिक ने लोन लेकर खरीदा था। आरोप था कि फाइनेंसर के लोगों ने रात के समय गोदाम से ट्रक निकाल लिया और इसके लिए वाहन का स्टीयरिंग लॉक तक तोड़ दिया।

क्या है पूरा मामला?

मामला एक ट्रक के लिए लिए गए करीब 10.4 लाख रुपये के लोन से जुड़ा है। जून 2021 में चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस ने ट्रक खरीदने के लिए लोन मंजूर किया था। लोन लेने के करीब दो साल बाद ईएमआई के भुगतान को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद 9 अप्रैल 2023 की रात करीब 1 बजे अयोध्या स्थित एक गोदाम से ट्रक को कथित तौर पर चुपचाप ले जाया गया। गोदाम में लगे CCTV कैमरे में चार लोग दिखाई दिए। फुटेज के मुताबिक उन्होंने ट्रक का स्टीयरिंग लॉक तोड़ा और वाहन को वहां से लेकर चले गए। इस तरह वाहन की रिकवरी को लेकर विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

छह महीने बाद भेजा गया नोटिस

ट्रक वापस ले जाने के करीब छह महीने बाद फाइनेंसर की ओर से नोटिस भेजा गया। इसमें बताया गया कि वाहन वापस ले लिया गया है और उसे 4.5 लाख रुपये में नीलाम कर दिया गया। इसके साथ ही करीब 1.3 लाख रुपये की राशि अभी भी बकाया होने की बात कही गई। मामले में ट्रक मालिक ने वाहन की जब्ती के तरीके पर सवाल उठाया। विवाद का अहम पहलू यह था कि अगर कर्ज की वसूली करनी थी तो क्या फाइनेंस कंपनी अपने स्तर पर रात में वाहन का लॉक तोड़कर उसे उठा सकती थी?

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने वाहन की रिकवरी के अधिकार और उसे हासिल करने के तरीके के बीच अंतर को महत्वपूर्ण माना। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फाइनेंस किए गए वाहन को वापस लेना अपने आप में ऐसा कदम नहीं है, जिसे हर परिस्थिति में गलत माना जाए। लेकिन इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि फाइनेंसर कानून अपने हाथ में लेकर वाहन को बलपूर्वक या अनुचित तरीके से नहीं ले सकते।

वाहन जब्ती में नियमों का पालन जरूरी

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक फाइनेंस कंपनियों को वाहन की रिकवरी करते समय निर्धारित नियमों और उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा। अदालत ने इस संदर्भ में RBI के फेयर प्रैक्टिस कोड से जुड़े दिशानिर्देशों का उल्लेख किया। यानी EMI डिफॉल्ट होने पर फाइनेंसर के पास अपने हितों की रक्षा के लिए कानूनी रास्ते मौजूद हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वाहन मालिक के अधिकारों को दरकिनार कर दिया जाए।

आधी रात की कार्रवाई पर उठे सवाल

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि ट्रक को रात करीब 1 बजे गोदाम से ले जाया गया। CCTV फुटेज में स्टीयरिंग लॉक तोड़कर वाहन ले जाने की बात सामने आई। सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह की रिकवरी प्रक्रिया को लेकर सख्त रुख अपनाया और कहा कि बकाया राशि की वसूली के लिए अपनाया गया तरीका भी कानून के अनुरूप होना चाहिए। अदालत का यह रुख उन वाहन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो बैंक या NBFC से वाहन लोन लेते हैं और किसी कारण से EMI भुगतान में चूक हो जाती है।

₹15 लाख मुआवजे का आदेश

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फाइनेंसर को ट्रक मालिक को 15 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। यह राशि उस तरीके को देखते हुए महत्वपूर्ण है, जिस तरह वाहन को वापस लिया गया था। अदालत के आदेश का संदेश यह है कि कर्ज की वसूली का अधिकार होने के बावजूद फाइनेंस कंपनियों को कानूनी प्रक्रिया और निष्पक्ष व्यवहार के सिद्धांतों का पालन करना होगा।

EMI डिफॉल्ट होने पर क्या कर सकते हैं फाइनेंसर?

EMI नहीं चुकाने की स्थिति में फाइनेंस कंपनी के पास अपने बकाये की वसूली के लिए कानूनी उपाय होते हैं। लेकिन वाहन की जब्ती या रिकवरी करते समय निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। फाइनेंसरों को यह सुनिश्चित करना होता है कि रिकवरी की कार्रवाई मनमाने, बलपूर्वक या अनुचित तरीके से न हो। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसी बुनियादी सिद्धांत को रेखांकित किया कि कर्ज की वसूली का अधिकार कानून से ऊपर नहीं हो सकता।

वाहन मालिकों के लिए क्या मायने रखता है?

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला वाहन लोन लेने वाले लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण है। अगर किसी व्यक्ति की EMI बकाया हो जाती है तो उसे फाइनेंस कंपनी के साथ बातचीत कर बकाया राशि, रिकवरी नोटिस और वाहन जब्ती से संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखना चाहिए। किसी भी विवाद की स्थिति में वाहन मालिक कानूनी प्रक्रिया के जरिए अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है।