Dhanbad: रंजय सिंह हत्याकांड में बड़ा फैसला: हर्ष सिंह और ‘मामा’ बरी, 9 साल बाद आया निर्णय

धनबाद के चर्चित रंजय सिंह हत्याकांड में कोर्ट ने हर्ष सिंह और नंदकिशोर सिंह उर्फ मामा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। जानें 2017 की हत्या और कोर्ट के फैसले की पूरी कहानी।

Dhanbad: रंजय सिंह हत्याकांड में बड़ा फैसला: हर्ष सिंह और ‘मामा’ बरी, 9 साल बाद आया निर्णय
रंजय सिंह हत्याकांड में हर्ष सिंह और ‘मामा’ बरी।

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  • रंजय सिंह हत्याकांड में धनबाद कोर्ट ने सुनाया फैसला
  • हर्ष सिंह और नंदकिशोर सिंह उर्फ मामा साक्ष्य के अभाव में बरी
  • 29 जनवरी 2017 को चाणक्य नगर मोड़ के पास हुई थी रंजय सिंह की हत्या
  • फायरिंग में रंजय सिंह की मौत, साथी राजा यादव बाल-बाल बचे

धनबाद (Threesocieties.com Desk):  धनबाद के बहुचर्चित रंजय सिंह उर्फ रवि रंजन सिंह हत्याकांड में शनिवार, 19 सितंबर 2026 को अदालत ने फैसला सुना दिया। करीब नौ साल से चल रहे इस चर्चित हत्याकांड में अदालत ने आरोपी हर्ष सिंह और नंदकिशोर सिंह उर्फ मामा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।

धनबाद के जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता समर श्रीवास्तव, आयुष श्रीवास्तव और सिद्धार्थ शर्मा ने पैरवी की।

यह फैसला ऐसे समय आया है, जब रंजय सिंह हत्याकांड की सुनवाई लंबे समय से चल रही थी। पहले अदालत ने 5 सितंबर 2026 को फैसला सुनाने की तारीख तय की थी। हालांकि, उस दिन अपर लोक अभियोजक सत्येंद्र कुमार राय ने कानूनी बिंदुओं पर बहस के लिए समय देने का अनुरोध किया था। इसके बाद अदालत ने फैसला टालते हुए 19 सितंबर 2026 की तारीख निर्धारित की थी।

29 जनवरी 2017 को हुई थी रंजय सिंह की हत्या

रंजय सिंह उर्फ राजीव रंजन सिंह की हत्या 29 जनवरी 2017 को धनबाद के सरायढेला थाना क्षेत्र में चाणक्य नगर मोड़ के पास हुई थी। यह वारदात बिग बाजार के सामने संध्या करीब 5:30 बजे हुई थी। बताया गया कि रंजय सिंह अपने सहयोगी राजा यादव के साथ स्कूटी से जा रहे थे। वह चाणक्य नगर स्थित अपने फ्लैट से दूध का बर्तन लेकर सिंह मेंशन की ओर जा रहे थे। इसी दौरान पहले से घात लगाए बाइक सवार दो हमलावरों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली लगने से रंजय सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें आनन-फानन में सेंट्रल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हमले में उनके साथ मौजूद राजा यादव बाल-बाल बच गए थे।

राजा यादव बने थे मामले के प्रमुख गवाह

घटना के बाद राजा यादव की शिकायत पर सरायढेला थाना में अज्ञात हमलावरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस जांच के दौरान राजा यादव को मामले का प्रमुख चश्मदीद गवाह बनाया गया। पुलिस की जांच और राजा यादव द्वारा बनवाए गए स्केच के आधार पर कथित शूटरों की पहचान किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

‘मामा’ लंबे समय से जेल में था

मामले में आरोपी नंदकिशोर सिंह उर्फ मामा 8 अगस्त 2018 से जेल में बंद था। 5 नवंबर 2018 को तत्कालीन सरायढेला थाना प्रभारी निरंजन तिवारी ने मामा को शूटर बताते हुए उसके खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। वहीं, चंदन शर्मा और हरेन्द्र सिंह के खिलाफ उस समय अनुसंधान जारी रखा गया था। बाद में पुलिस ने 11 दिसंबर 2025 को चंदन शर्मा को फरार दिखाते हुए आरोप पत्र दाखिल किया। चंदन शर्मा फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर बताया जा रहा है। उसके खिलाफ उसकी अनुपस्थिति में सुनवाई चल रही है।

नौ साल बाद आया फैसला

रंजय सिंह हत्याकांड धनबाद के चर्चित आपराधिक मामलों में रहा है। घटना के बाद से ही पुलिस जांच और अदालत में सुनवाई को लेकर लगातार चर्चा बनी रही। करीब नौ वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद शनिवार को अदालत ने हर्ष सिंह और नंदकिशोर सिंह उर्फ मामा को बरी कर दिया। अदालत के इस फैसले का आधार साक्ष्य का अभाव और आरोपों को साबित न हो पाना रहा। इस फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी स्थिति को लेकर भी नजर बनी हुई है, खासकर उन आरोपियों के संबंध में जिनके खिलाफ अलग से कार्रवाई या सुनवाई चल रही है।

हर्ष सिंह और नंदकुमार सिंह पर लगाये गये थे आरोप

पुलिस जांच के बाद मामले में नंदकुमार सिंह उर्फ रूना सिंह उर्फ बबलू उर्फ मामा और हर्ष सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया। जबिक इस मामले के एक आरोपी चंदन शर्मा फरार चल रहा है। बिहार पटना जिला निवासी चंदन की हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत अरजी खारिज हो चुकी है।  अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामले में हत्या और साजिश से जुड़े आरोपों को लेकर अदालत में साक्ष्य और गवाह पेश किए गए। हालांकि, आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत को उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों की गवाही और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर करना है। आरोपी पक्ष की ओर से आरोपों से इनकार किया गया है। हर्ष सिंह ने अपने सफाई बयान में हत्या कराने के आरोप से इनकार करते हुए घटना के दिन अपने धैया स्थित आवास पर होने की बात कही थी।

अभियोजन ने कराई 23 गवाहों की गवाही

मामले की सुनवाई लंबी अवधि तक चलने का एक बड़ा कारण इसका विस्तृत ट्रायल भी रहा। अभियोजन पक्ष ने इस मामले में कुल 23 गवाहों का परीक्षण कराया।इनमें घटना के प्रत्यक्षदर्शी राजा यादव के अलावा पुलिस पदाधिकारी, चिकित्सक तथा तकनीकी साक्ष्यों से जुड़े गवाह शामिल रहे। गवाहों के बयान, पुलिस जांच, चिकित्सकीय साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों को अदालत के समक्ष रखा गया। इसके बाद अभियोजन और बचाव पक्ष की ओर से अंतिम दलीलें भी पेश की गईं। 

संजीव सिंह के करीबी माने जाते थे रंजय सिंह

रंजय सिंह उर्फ रवि रंजन सिंह को झरिया के तत्कालीन भाजपा विधायक संजीव सिंह का बेहद करीबी माना जाता था। इसी वजह से उनकी हत्या का मामला धनबाद की राजनीति और अपराध की दुनिया से जुड़ा बेहद संवेदनशील प्रकरण बन गया। संजीव सिंह वर्तमान में धनबाद के मेयर हैं। रंजय सिंह की हत्या के बाद से ही यह मामला धनबाद में चर्चा का विषय रहा है और लंबे समय से चल रही अदालती कार्यवाही पर सभी की नजर रही है।

फ्लैश बैैक

रंजय सिंह उर्फ रवि रंजन सिंह की हत्या 29 जनवरी 2017 की शाम सरायढेला थाना क्षेत्र में चाणक्य नगर मोड़ के पास कर दी गई थी। वह बिग बाजार के सामने से गुजर रहे थे। इसी दौरान हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाकर गोलियां चला दीं। घटना के समय रंजय सिंह के साथ राजा यादव भी मौजूद थे। गोलीबारी में रंजय सिंह की मौत हो गई, जबकि राजा यादव बच गए। बाद में राजा यादव इस मामले में महत्वपूर्ण चश्मदीद गवाह बने। इसके बाद राजा यादव की शिकायत पर सरायढेला थाना में मामला दर्ज किया गया था। .हत्या के बाद सरायढेला थाना में मामला दर्ज किया गया और पुलिस ने जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने के साथ मामला धनबाद के चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल हो गया।