करौली धाम में 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने ली दीक्षा, गुरुजी बोले- दीक्षा नहीं बंधन, जीवन की मुक्ति का द्वार

कानपुर के करौली शंकर महादेव धाम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दीक्षा ग्रहण की। गुरुजी ने कहा कि दीक्षा बंधन नहीं बल्कि मुक्ति का मार्ग है। श्रद्धालुओं ने भारत को रोग-मुक्त और शोक-मुक्त बनाने का संकल्प लिया।

करौली धाम में 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने ली दीक्षा, गुरुजी बोले- दीक्षा नहीं बंधन, जीवन की मुक्ति का द्वार
करौली शंकर धाम में ऐतिहासिक दीक्षा समारोह।

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     HighLights:

  • करौली शंकर महादेव धाम में 10,000+ श्रद्धालुओं ने ग्रहण की दीक्षा
  • गुरुजी बोले- "दीक्षा बंधन नहीं, सभी बंधनों से मुक्ति का मार्ग है"
  • श्रद्धालुओं ने सनातन धर्म के वैज्ञानिक स्वरूप के प्रचार का लिया संकल्प

कानपुर (Threesocieties.com Desk):  उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित करौली शंकर महादेव धाम में आयोजित गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दूसरे दिन आस्था, अध्यात्म और सनातन संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। विशेष दीक्षा समारोह में 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने गुरु दीक्षा ग्रहण कर अपने आध्यात्मिक जीवन की नई शुरुआत की। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल हुए।

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दीक्षा ग्रहण करने वाले सभी श्रद्धालुओं ने सनातन धर्म के वैज्ञानिक स्वरूप को विश्वभर में प्रचारित करने तथा भारत को रोग-मुक्त और शोक-मुक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लिया। पूरे धाम में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा वातावरण देखने को मिला।

हवन और पंचमहाभूत शुद्धि के बाद हुआ ज्ञान का महायज्ञ

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार, हवन एवं पंचमहाभूत शुद्धि से हुई। इसके बाद श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर करौली शंकर दास जी महाराज ने अपने दिव्य प्रवचन में कहा कि मोक्ष का वास्तविक अर्थ केवल मृत्यु के बाद की प्राप्ति नहीं, बल्कि जीवन में दुख, मोह, भ्रम और आसक्ति से मुक्त होना है। उन्होंने कहा कि आत्मिक शांति, सकारात्मक सोच और सही जीवन दृष्टि ही मनुष्य को वास्तविक स्वतंत्रता प्रदान करती है।

"दीक्षा किसी बंधन का नहीं, मुक्ति का माध्यम है"

अपने प्रेरक संदेश में गुरुदेव ने कहा, "दीक्षा किसी प्रकार का बंधन नहीं, बल्कि सभी बंधनों से मुक्ति का मार्ग है।" उन्होंने कहा कि करौली शंकर दरबार किसी को सीमाओं में नहीं बांधता बल्कि व्यक्ति को आत्मविश्वास, मानसिक शक्ति और सफलता की दिशा में आगे बढ़ाता है। गुरु पर अटूट विश्वास ही जीवन रूपी भवसागर से पार लगाने का सबसे बड़ा साधन है।

दरबार से जुड़ने वाला व्यक्ति हर क्षेत्र में होता है सशक्त

गुरुदेव ने कहा कि करौली शंकर दरबार अपने भक्तों को आध्यात्मिक ही नहीं बल्कि मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से भी मजबूत बनाता है। दरबार से जुड़ने वाले व्यक्ति के सम्मान, यश और व्यक्तित्व में निरंतर वृद्धि होती है तथा उसकी आने वाली पीढ़ियों को भी सकारात्मक संस्कार प्राप्त होते हैं।

गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण आवश्यक : जगतार मुनि

श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन, हरिद्वार के सचिव जगतार मुनि जी ने कहा कि जिस गुरु को स्वीकार करें, उसके प्रति पूर्ण विश्वास और समर्पण रखें। सच्चा गुरु वही है जो शिष्य की पीड़ा को बिना बताए समझ ले और उसका समाधान करे।

गुरु अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने वाली दिव्य शक्ति : महंत भगत राम जी

श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के मुखिया महंत भगत राम जी महाराज ने कहा कि गुरु के भीतर सौ चंद्रमाओं और हजार सूर्यों के समान दिव्य प्रकाश विद्यमान होता है। गुरु ही अज्ञान रूपी अंधकार को समाप्त कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान करौली धाम का वातावरण साक्षात बैकुंठ की अनुभूति कराता है।

साधकों को अगले आध्यात्मिक स्तर की ओर बढ़ने की प्रेरणा

कार्यक्रम के समापन पर गुरुदेव ने लेवल-1 से लेवल-15 तक के चयनित साधकों को ध्यान एवं साधना के माध्यम से अगले आध्यात्मिक स्तर की ओर बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि निरंतर साधना ही आत्मिक विकास और रोग-मुक्त, शोक-मुक्त जीवन का आधार है।

गंगा तपस यात्रा में शामिल होने का आह्वान

गुरु पूर्णिमा महोत्सव के तीसरे दिन आयोजित होने वाली विशाल गंगा तपस यात्रा में अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को शामिल होने का निमंत्रण दिया गया। यह यात्रा सरसैया घाट से प्रारंभ होकर करौली शंकर महादेव धाम तक निकाली जाएगी। गुरुदेव ने कहा कि श्रावण मास में यह यात्रा आध्यात्मिक ऊर्जा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।