ऑपरेशन 'दौरा पहाड़' में सबसे बड़ी कामयाबी: 2.20 करोड़ का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा धनबाद से गिरफ्तार
ऑपरेशन 'दौरा पहाड़' में झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए 2.20 करोड़ के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा को धनबाद के बरवड्डा जंगल से गिरफ्तार किया। जानिए पूरे ऑपरेशन, बरामद हथियार, डीजीपी के बयान और माओवादी नेटवर्क पर पड़े असर की पूरी रिपोर्ट।
HighLights:
- धनबाद के बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के जंगलों से 2.20 करोड़ का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार
- ऑपरेशन "दौरा पहाड़" में झारखंड पुलिस, गिरिडीह-धनबाद पुलिस और 209 कोबरा बटालियन की संयुक्त कार्रवाई
- तीन AK-47, आठ मैगजीन और 288 जिंदा कारतूस बरामद
- मिसिर बेसरा समेत पांच माओवादी गिरफ्तार, जिनमें 15 लाख का इनामी मेहनत उर्फ मोछू भी शामिल
रांची/धनबाद(Threesocieties.com Desk): झारखंड में उग्रवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक हासिल की है। संयुक्त अभियान 'ऑपरेशन दौरा पहाड़' के तहत भाकपा (माओवादी) के एकमात्र सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य और कुल 2.20 करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर उर्फ सुर्निमल को उसके सहयोगी कमांडरों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है।
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यह कार्रवाई 28 जुलाई को धनबाद जिले के बरवड्डा थाना क्षेत्र के जंगलों में झारखंड पुलिस, धनबाद एवं गिरिडीह जिला पुलिस तथा 209 कोबरा बटालियन द्वारा चलाए गए संयुक्त अभियान के दौरान की गई। पुलिस का दावा है कि यह गिरफ्तारी माओवादी संगठन के लिए सबसे बड़ा झटका साबित होगी।
पुलिस मुख्यालय में हुई संयुक्त प्रेस वार्ता
रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में डीजीपी तदाशा मिश्रा, आईजी अभियान नरेंद्र सिंह, आईजी साकेत सिंह, आईजी अनूप बिथेरे, डीआईजी इंद्रजीत माहथा, धनबाद एसएसपी प्रभात रंजन और एसपी विमल कुमार ने ऑपरेशन की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मिसिर बेसरा के साथ 15 लाख रुपये का इनामी रीजनल कमेटी सदस्य मेहनत उर्फ मोछू उर्फ विभीषण, एरिया कमेटी सदस्य गौरव उर्फ बिरेंद्र हांसदा उर्फ सौरभ तथा दो अन्य सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है।
भारी मात्रा में हथियार बरामद
संयुक्त टीम ने गिरफ्तार माओवादियों के कब्जे से—
3 AK-47 राइफल
8 मैगजीन
288 जिंदा कारतूस
बरामद किए हैं। पुलिस का मानना है कि इन हथियारों का इस्तेमाल भविष्य में बड़े हमलों की तैयारी के लिए किया जाना था।
लगातार अभियान से कमजोर हुआ माओवादी संगठन
झारखंड पुलिस के अनुसार पिछले कुछ महीनों में लगातार चलाए गए अभियानों, आत्मसमर्पण नीति और खुफिया कार्रवाई के कारण माओवादी संगठन की ताकत तेजी से कमजोर हुई है।
21 मई 2026 को 27 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।
13 जुलाई को 20 लाख के इनामी रविंद्र गंझू गिरफ्तार हुए।
17 जुलाई को 25 लाख के इनामी अजय महतो उर्फ टाइगर गिरफ्तार हुआ।
एरिया कमेटी सदस्य बबिता उर्फ अनिता किस्कू ने भी आत्मसमर्पण किया।
28 जुलाई को 16 नक्सलियों ने 11 हथियार और 1,562 गोलियों के साथ आत्मसमर्पण किया।
पुलिस का कहना है कि इन कार्रवाइयों ने संगठन की नेतृत्व क्षमता और संचालन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
175 से अधिक मामलों में था वांछित
मिसिर बेसरा पिछले तीन दशक से अधिक समय से झारखंड, ओडिशा, बिहार और अन्य राज्यों में सक्रिय था। उसके खिलाफ 175 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर झारखंड सरकार ने 1 करोड़ रुपये तथा ओडिशा सरकार ने 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। वह कई चर्चित नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है, जिनमें—
हजारीबाग में सीआरपीएफ जवानों की हत्या
धनबाद के तोपचांची में 13 पुलिसकर्मियों की हत्या
गिरिडीह होमगार्ड शस्त्रागार से 186 रायफल लूट
जहानाबाद जेल ब्रेक
बोकारो चंद्रपुरा रेल थाना हमला
पश्चिम सिंहभूम और सरायकेला की बड़ी मुठभेड़ें
2022 में पूर्व विधायक गुरुचरण नायक के अंगरक्षकों की हत्या
2023-25 के कई आईईडी विस्फोट और हथियार लूट की घटनाएं
शामिल हैं।
DGP तदाशा मिश्रा ने क्या कहा
डीजीपी तदाशा मिश्रा ने कहा कि ऑपरेशन 'दौरा पहाड़' झारखंड पुलिस के नक्सल विरोधी अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है।उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में योजनाबद्ध रणनीति के तहत शीर्ष माओवादी नेतृत्व को निशाना बनाया गया। लगातार आत्मसमर्पण, गिरफ्तारियों और सटीक अभियानों के कारण संगठन का शीर्ष नेतृत्व लगभग समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का सकारात्मक प्रभाव दिख रहा है और बड़ी संख्या में नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं। पुलिस का लक्ष्य केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि झारखंड को पूरी तरह नक्सलमुक्त बनाना है।
आईजी अभियान नरेंद्र सिंह का बयान
आईजी अभियान नरेंद्र सिंह ने कहा कि यह सफलता कई महीनों की रणनीतिक योजना, सटीक खुफिया सूचना और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मिसिर बेसरा केवल एक इनामी नक्सली नहीं था, बल्कि पूरे माओवादी संगठन की रणनीति और संचालन का प्रमुख चेहरा था। उसकी गिरफ्तारी से संगठन की कमांड एंड कंट्रोल व्यवस्था को गहरा झटका लगा है और इसका असर आने वाले दिनों में साफ दिखाई देगा।
धनबाद बना ऐतिहासिक ऑपरेशन का गवाह
धनबाद के बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के जंगलों में चलाया गया यह ऑपरेशन झारखंड के नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में मील का पत्थर माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस कार्रवाई के बाद राज्य में माओवादी गतिविधियों पर निर्णायक अंकुश लगेगा और शेष सक्रिय नक्सलियों के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा। झारखंड पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक राज्य का अंतिम सक्रिय माओवादी या तो आत्मसमर्पण नहीं कर देता या कानून के दायरे में नहीं आ जाता।




