JPSC Scam: पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते पर CID का शिकंजा, 14वीं परीक्षा घोटाले में आज होगी बड़ी पूछताछ
JPSC 14वीं सिविल सेवा परीक्षा घोटाले में पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को CID ने पूछताछ के लिए समन भेजा है। TDPL टेंडर, OMR हेराफेरी और परीक्षा अनियमितताओं पर सवाल होंगे। बाबूलाल मरांडी ने CBI जांच और गिरफ्तारी की मांग की।
HighLights:
- 14वीं JPSC परीक्षा अनियमितता मामले में पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को CID का समन।
- गिरफ्तार पांच आरोपितों से पूछताछ में मिले इनपुट के बाद आज होगी पूछताछ।
- TDPL को टेंडर देने, OMR हेराफेरी और निगरानी में लापरवाही पर होंगे सवाल।
बाबूलाल मरांडी ने CBI जांच और एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी की मांग की।
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव और जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। उन्हें 28 जुलाई को सीआईडी मुख्यालय में उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने के लिए कहा गया है।
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सीआईडी की यह कार्रवाई पिछले तीन दिनों से रिमांड पर लिए गए पांच आरोपितों से पूछताछ में मिले महत्वपूर्ण इनपुट के आधार पर की गई है। जांच एजेंसी का मानना है कि परीक्षा संचालन, टेंडर प्रक्रिया और OMR शीट से जुड़ी कथित अनियमितताओं के संबंध में पूर्व अध्यक्ष से पूछताछ आवश्यक है।
इन पांच आरोपितों से चल रही है पूछताछ
सीआईडी फिलहाल जिन पांच आरोपितों से रिमांड पर पूछताछ कर रही है, उनमें शामिल हैं—
जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता
टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के निदेशक रामवीर सिंह
मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय तिवारी
तकनीकी प्रोग्रामर उस्मान
तकनीकी प्रोग्रामर एबाद
इन सभी से पूछताछ के दौरान मिले तथ्यों के बाद एल. खियांग्ते को नोटिस जारी किया गया है।
इन मुद्दों पर होंगे तीखे सवाल
सीआईडी की पूछताछ में पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से कई अहम बिंदुओं पर जवाब मांगा जाएगा, जिनमें प्रमुख हैं—
TDPL को परीक्षा संचालन का ठेका किस आधार पर दिया गया?
जब TDPL को JSSC पहले ही ब्लैकलिस्ट कर चुका था, तब उसे JPSC परीक्षा की जिम्मेदारी क्यों मिली?
परीक्षा की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या निगरानी व्यवस्था बनाई गई थी?
OMR शीट में कथित हेराफेरी और तकनीकी गड़बड़ियों की जानकारी मिलने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या परीक्षा अनियमितताओं में प्रशासनिक स्तर पर कोई लापरवाही या मिलीभगत थी?
सूत्रों के अनुसार, इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय कर सकते हैं।
जांच शुरू होते ही दिया था इस्तीफा
गौरतलब है कि JPSC परीक्षा घोटाले की जांच शुरू होने के बाद ही एल. खियांग्ते ने जेपीएससी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। अब पहली बार उन्हें औपचारिक रूप से सीआईडी मुख्यालय बुलाकर पूछताछ की जा रही है।
बाबूलाल मरांडी का बड़ा हमला
इस पूरे मामले पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सीआईडी जांच सच्चाई सामने लाने के बजाय सबूत मिटाने का प्रयास बनकर रह गई है। मरांडी ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की CBI जांच कराने और तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते को गिरफ्तार करने की मांग की है।
'अधिकारी बनने का रेट 40 लाख रुपये' का आरोप
प्रेस वार्ता में बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि झारखंड में अधिकारी बनाने का एक कथित "रेट चार्ट" चल रहा है। उनके अनुसार—
प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के लिए ₹5 लाख
मुख्य परीक्षा पास कराने के लिए ₹25 लाख
इंटरव्यू पास कराने के लिए ₹10 लाख
यानी कुल ₹40 लाख लेकर चयन कराने का आरोप उन्होंने लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और सरकार की ओर से इन दावों पर अलग पक्ष सामने आ सकता है।
कर्नाटक के छात्र के पत्र का भी किया जिक्र
मरांडी ने कहा कि कर्नाटक के एक छात्र ने जनवरी में तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते को पत्र लिखकर OMR शीट में गड़बड़ी और TDPL कर्मचारी अभय तिवारी की कथित भूमिका की जानकारी दी थी, लेकिन उस समय कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले रेंज ऑफिसर परीक्षा में भी गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन उन्हें भी नजरअंदाज किया गया।
जांच पर टिकी सबकी नजर
JPSC परीक्षा मामले में लगातार हो रही गिरफ्तारियां, रिमांड पर पूछताछ और अब पूर्व अध्यक्ष को समन जारी होने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया है। अब सभी की नजर सीआईडी की पूछताछ पर है कि क्या इससे परीक्षा घोटाले की बड़ी परतें खुलेंगी और जांच किन नए लोगों तक पहुंचेगी।
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