पश्चिम बंगाल: फालता में भगवा सुनामी! BJP के देबांग्शु पांडा ने 1 लाख से ज्यादा वोटों से रचा इतिहास
पश्चिम बंगाल की फालता विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने 1,09,021 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की। पुनर्मतदान के बाद आए नतीजों में TMC चौथे स्थान पर रही। जानिए पूरा चुनावी गणित, वोट प्रतिशत और राजनीतिक असर।
- TMC का किला ढहा, फालता में BJP की रिकॉर्ड जीत… चौथे नंबर पर रही ममता की पार्टी
- देबांग्शु पांडा ने 1,09,021 वोटों से विपक्ष को रौंदा,TMC बैकफुट पर
कोलकाता (Threesocieties.com Desk) : पश्चिम बंगाल की राजनीति में फालता विधानसभा सीट ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। दक्षिण 24 परगना जिले की इस हाईप्रोफाइल सीट पर भारतीय जनता पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए नया रिकॉर्ड कायम कर दिया। भाजपा उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी माकपा के संभूनाथ कुर्मी को 1,09,021 वोटों के भारी अंतर से हराकर बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
यह भी पढ़ें: झारखंड सरकार का बड़ा प्रशासनिक सर्जरी ऑपरेशन, SDO-DTO समेत 67 अफसर ट्रांसफर
22 राउंड की मतगणना के बाद घोषित परिणामों में देबांग्शु पांडा को कुल 1,49,666 वोट मिले, जबकि माकपा प्रत्याशी संभूनाथ कुर्मी को 40,645 वोट प्राप्त हुए। कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुर रज्जाक मोल्ला तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें 10,084 वोट मिले। सबसे बड़ा झटका तृणमूल कांग्रेस को लगा, जिसके उम्मीदवार जहांगीर खान मात्र 7,783 वोट पाकर चौथे स्थान पर सिमट गए।
पुनर्मतदान के बाद बदला पूरा समीकरण
फालता सीट पर पहले 29 अप्रैल को दूसरे चरण में मतदान हुआ था, लेकिन कई बूथों पर गड़बड़ी और हिंसा की शिकायतों के बाद चुनाव आयोग ने यहां पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया। 21 मई को बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोबारा मतदान कराया गया, जिसमें 86.11 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ। चुनाव आयोग ने सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की 35 कंपनियां और 30 क्विक रिस्पांस टीम तैनात की थीं। प्रत्येक बूथ पर सुरक्षा जवानों की संख्या भी दोगुनी कर दी गई थी। पुनर्मतदान शांतिपूर्ण रहा और कहीं से किसी बड़ी अप्रिय घटना की खबर नहीं आई।
मतदान से पहले ही हट गए थे TMC उम्मीदवार
इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार जहांगीर खान ने मतदान से 48 घंटे पहले चुनाव से हटने की घोषणा कर दी थी। हालांकि नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी, इसलिए उनका नाम ईवीएम में बना रहा। इसके बावजूद TMC को बेहद खराब प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जहांगीर खान के हटने और पुनर्मतदान के माहौल ने चुनाव का पूरा समीकरण बदल दिया। इसका सीधा फायदा भाजपा को मिला।
बंगाल विधानसभा में BJP की ताकत बढ़ी
फालता सीट पर जीत के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या बढ़कर 208 हो गई है। यह जीत केवल एक सीट की जीत नहीं मानी जा रही, बल्कि बंगाल में भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव का संकेत भी मानी जा रही है। यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 लोकसभा चुनाव में इसी विधानसभा क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस को एक लाख से अधिक वोटों की बढ़त मिली थी। वहीं 2021 विधानसभा चुनाव में TMC उम्मीदवार शंकर कुमार नस्कर ने भाजपा प्रत्याशी बिधान पारुई को 40 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था।
पिछले चुनावों में TMC का था दबदबा
फालता विधानसभा सीट लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है।
2021 विधानसभा चुनाव:
TMC के शंकर कुमार नस्कर ने 40,774 वोटों से जीत दर्ज की थी।
2016 विधानसभा चुनाव:
तृणमूल के तमोनाश घोष ने माकपा उम्मीदवार को 27,671 वोटों से हराया था।
लेकिन इस बार पुनर्मतदान और बदले राजनीतिक माहौल ने पूरी तस्वीर बदल दी। भाजपा ने न केवल सीट छीनी, बल्कि रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल कर बंगाल की राजनीति में नया संदेश दे दिया।
BJP ने बनाया जीत का नया रिकॉर्ड
फालता में भाजपा की यह जीत पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव इतिहास में सबसे बड़े जीत अंतर में शामिल हो गई है। इससे पहले माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी सीट पर भाजपा उम्मीदवार आनंदमय बर्मन ने 1,04,265 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी, लेकिन फालता में यह रिकॉर्ड भी टूट गया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह परिणाम आने वाले समय में बंगाल की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। वहीं भाजपा इसे “जनता का तृणमूल के खिलाफ जनादेश” बता रही है।






