सब्जी बेचने वाले के बेटे ने रचा इतिहास: बिहार के झंडू कुमार ने कॉमनवेल्थ पैरा पावरलिफ्टिंग में जीता कांस्य पदक
बिहार के नालंदा निवासी झंडू कुमार ने स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में आयोजित कॉमनवेल्थ पैरा पावरलिफ्टिंग 2026 में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। सब्जी विक्रेता के बेटे झंडू की संघर्ष से सफलता तक की प्रेरणादायक कहानी पढ़ें।
HighLights:
- नालंदा निवासी झंडू कुमार ने 72 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन कर भारत को दिलाया पदक
- करीब आठ वर्षों बाद बिहार के किसी खिलाड़ी ने कॉमनवेल्थ स्तर पर पदक जीतकर रचा इतिहास
- सड़क किनारे आलू-प्याज बेचने वाले परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे झंडू
- पैरालंपिक पदक विजेता कोच राजेंद्र सिंह रहेलू के मार्गदर्शन में हासिल की बड़ी सफलता
पटना/स्कॉटलैंड(Threesocieties.com Desk): बिहार के लिए खेल जगत से गर्व और सम्मान की एक बड़ी खबर सामने आई है। नालंदा जिले के हरनौत प्रखंड के सबनहुआ डीह गांव के रहने वाले झंडू कुमार ने स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में आयोजित राष्ट्रमंडल (कॉमनवेल्थ) पैरा पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता 2026 में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। 72 किलोग्राम भार वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए झंडू ने न केवल भारत का तिरंगा बुलंद किया, बल्कि पूरे बिहार को भी गौरवान्वित कर दिया।
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झंडू कुमार की यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि करीब आठ वर्षों बाद बिहार के किसी खिलाड़ी ने कॉमनवेल्थ स्तर की प्रतियोगिता में पदक जीता है। इससे पहले वर्ष 2018 में वर्तमान बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया था।
गरीबी को हराकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचे झंडू
झंडू कुमार की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। उनके माता-पिता आज भी हरनौत बाजार में सड़क किनारे आलू और प्याज बेचकर परिवार का गुजारा करते हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने कभी अपने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया।
झंडू के भाई भी परिवार के साथ सब्जी बेचने में हाथ बंटाते हैं। ऐसे हालात में खेल के लिए समय निकालना, अभ्यास करना और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना आसान नहीं था। लेकिन कठिन परिस्थितियों ने उनके इरादों को और मजबूत बनाया।
स्थानीय जिम से शुरू हुआ सफर
हरनौत के एक छोटे से जिम में अभ्यास के दौरान झंडू की प्रतिभा सामने आई। इसके बाद वे नालंदा पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन से जुड़े, जहां उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण मिला। उनकी मेहनत और प्रदर्शन को देखते हुए चयन भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, गांधीनगर (गुजरात) में हुआ। यहां उन्हें पैरालंपिक पदक विजेता और द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित राजेंद्र सिंह रहेलू का मार्गदर्शन मिला, जिसने उनके खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
ग्लास्गो में दिखाया दम
24 जुलाई की रात स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में आयोजित राष्ट्रमंडल पैरा पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में झंडू कुमार ने 72 किलोग्राम वर्ग में दमदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। उनकी जीत के बाद पूरे नालंदा, बिहार और देशभर के खेल प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं और उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा को प्रेरणादायक बता रहे हैं।
कोच बोले- यह पूरे बिहार के लिए ऐतिहासिक पल
नालंदा पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव एवं कोच कुंदन कुमार पांडेय ने कहा कि झंडू कुमार की उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं बल्कि पूरे बिहार के खेल इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। वहीं बिहार पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव संदीप कुमार ने कहा कि झंडू ने कठिन मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। आने वाले वर्षों में उनसे पैरालंपिक और विश्व चैंपियनशिप में भी पदक की उम्मीद है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चमक रहे झंडू
झंडू कुमार पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। यही कारण है कि आज वे भारतीय पैरा पावरलिफ्टिंग के उभरते हुए सितारों में गिने जा रहे हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उन्हें बेहतर सुविधाएं और लगातार सहयोग मिलता रहा तो वे भविष्य में पैरालंपिक सहित दुनिया की सबसे बड़ी प्रतियोगिताओं में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतने की क्षमता रखते हैं।
झंडू कुमार की प्रमुख उपलब्धियां
2021 – 19वीं सीनियर राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप (कोलकाता) – कांस्य पदक।
2025 – 22वीं सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप (ग्रेटर नोएडा) – स्वर्ण पदक।
2025 – खेलो इंडिया पैरा गेम्स – स्वर्ण पदक।
2025 – बीजिंग वर्ल्ड कप – कांस्य पदक।
2025 – काहिरा वर्ल्ड पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व।
2026 – 23वीं सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप (रुड़की) – स्वर्ण पदक।
2026 – एशिया-ओशिनिया ओपन पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप (बैंकॉक) – दो कांस्य पदक।
2026 – ग्लास्गो राष्ट्रमंडल पैरा पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता – कांस्य पदक।
बिहार के युवाओं के लिए बने प्रेरणा
झंडू कुमार की सफलता यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी सुविधा या आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती। यदि परिवार का साथ, मजबूत इरादे और मेहनत का जुनून हो तो सड़क किनारे सब्जी बेचने वाले परिवार का बेटा भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का तिरंगा लहरा सकता है।
आज झंडू कुमार केवल नालंदा या बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लाखों युवाओं के लिए संघर्ष, समर्पण और सफलता की मिसाल बन चुके हैं।




