TMC का नाम-सिंबल फ्रीज! ममता-ऋतब्रत गुट अब नए नाम-निशान से लड़ेंगे चुनाव

TMC Name Symbol Freeze: चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट के बीच विवाद के बीच TMC के नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को अंतरिम रूप से फ्रीज कर दिया है। दोनों गुटों से नए नाम और चुनाव चिह्न के तीन-तीन विकल्प मांगे गए हैं।

TMC का नाम-सिंबल फ्रीज! ममता-ऋतब्रत गुट अब नए नाम-निशान से लड़ेंगे चुनाव
चुनाव आयोग का अंतिम फैसला आने तक यह अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी।

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    HighLights:

  • चुनाव आयोग ने TMC के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न पर अंतरिम रोक लगाई
  • ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट अब TMC नाम-सिंबल का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे
  • दोनों गुटों से 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक मांगे गए 3-3 नाम और सिंबल
  • नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में अलग नाम और चुनाव चिह्न से उतरेंगे गुट

नई दिल्ली/कोलकाता (Threesocieties.com Desk): पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस को लेकर चल रही वर्चस्व की लड़ाई के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम फैसला लिया है। आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के नाम और उसके आरक्षित ‘Flowers and Grass’ यानी ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह रोक ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों पर लागू होगी।

आयोग का यह फैसला पश्चिम बंगाल की आगामी विधानसभा उपचुनाव प्रक्रिया के बीच आया है। नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। दोनों गुट इन सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवार उतार चुके हैं और पार्टी के नाम तथा आधिकारिक चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं।

चुनाव आयोग का अंतरिम आदेश क्या कहता है?

चुनाव आयोग ने 17 सितंबर 2026 को सुनवाई के बाद अंतरिम व्यवस्था जारी की। आयोग के मुताबिक, अंतिम फैसला आने तक दोनों में से कोई भी गुट ‘All India Trinamool Congress’ नाम और आरक्षित ‘Flowers and Grass’ चुनाव चिह्न इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। आयोग ने कहा कि यह व्यवस्था दोनों प्रतिद्वंद्वी समूहों को समान स्थिति में रखने और उनके अधिकारों एवं हितों की रक्षा के लिए की गई है। इसका सीधा असर आगामी उपचुनाव पर पड़ेगा। दोनों गुटों को अब अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरना होगा।

दोनों गुटों को देने होंगे तीन-तीन विकल्प

आयोग ने दोनों पक्षों से 18 सितंबर 2026 की सुबह 11 बजे तक तीन पसंदीदा पार्टी नाम और तीन चुनाव चिह्नों के विकल्प देने को कहा है। चुनाव चिह्नों का चयन आयोग की ओर से अधिसूचित ‘फ्री सिंबल’ की सूची में से करना होगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि दोनों समूह चाहें तो अपने नए नाम में मूल पार्टी ‘All India Trinamool Congress’ से संबंध का संकेत रख सकते हैं। हालांकि, दोनों को अलग-अलग नाम और अलग-अलग चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे।

14 पन्नों के अंतरिम आदेश में क्या कहा गया?

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने अंतरिम आदेश जारी किया। विवाद का केंद्र यह है कि आखिर तृणमूल कांग्रेस का वास्तविक संगठनात्मक नियंत्रण किस गुट के पास है और आधिकारिक पार्टी नाम एवं चुनाव चिह्न के इस्तेमाल का अधिकार किसे मिले। आयोग के सामने दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे और दस्तावेज रखे हैं। अंतिम निर्णय में संगठनात्मक ढांचे, अधिकृत पदाधिकारियों और संबंधित दस्तावेजों समेत विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जाना है।

नंदीग्राम और रेजीनगर में क्या बदलेगा?

इस फैसले का सबसे तत्काल असर नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव पर दिखाई देगा। दोनों सीटों के लिए 6 अक्टूबर को मतदान होना है। अब चुनावी मैदान में उतरने वाले दोनों TMC गुटों को आयोग की ओर से आवंटित अलग नाम और अलग चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करना होगा। इससे पहले ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने दोनों सीटों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की थी। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट भी अपने उम्मीदवारों के साथ चुनावी मैदान में है।

ममता गुट ने क्या तर्क दिया?

सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी गुट की ओर से वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने ऋतब्रत गुट के दावों पर सवाल उठाए। उनके तर्क का मुख्य आधार यह था कि यदि बागी गुट तृणमूल कांग्रेस के अस्तित्व को पहले की तारीख से समाप्त मानता है, तो उसने बाद के विधानसभा चुनाव में पार्टी के आधिकारिक चुनाव चिह्न के आधार पर जीत कैसे हासिल की। यह ममता गुट की ओर से विवाद पर रखा गया राजनीतिक और कानूनी तर्क है; इस पर अंतिम निर्णय चुनाव आयोग को करना है।

ऋतब्रत गुट का दावा क्या है?

दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण और आधिकारिक प्रतिनिधित्व को लेकर अपना दावा कर रहा है। दोनों पक्ष चुनाव आयोग के सामने दस्तावेज और अपने-अपने तर्क पेश कर चुके हैं। आयोग ने फिलहाल किसी एक पक्ष को मूल TMC नाम या आरक्षित चुनाव चिह्न नहीं दिया है।

पहले भी फ्रीज हो चुके हैं चुनाव चिह्न

पार्टी में विभाजन के बाद चुनाव चिह्न को अस्थायी रूप से फ्रीज करने की प्रक्रिया पहले भी देखने को मिली है। लोक जनशक्ति पार्टी के विवाद में चुनाव चिह्न पर रोक लगाई गई थी। इसी तरह शिवसेना के संगठनात्मक विवाद के दौरान भी चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों के दावों के बीच मूल चुनाव चिह्न को फ्रीज कर अलग-अलग चुनाव चिह्न आवंटित किए थे। TMC मामले में भी फिलहाल आयोग ने इसी तरह की अंतरिम व्यवस्था अपनाई है। हालांकि, यह अंतिम फैसला नहीं है।

अब आगे क्या होगा?

अब दोनों गुटों को 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक अपनी पसंद के तीन पार्टी नाम और तीन चुनाव चिह्न आयोग को देने होंगे। इसके बाद उपचुनाव की प्रक्रिया के लिए दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम और प्रतीक आवंटित किए जाएंगे। इस बीच TMC के मूल नाम और ‘फूल और घास’ चिह्न पर अंतिम अधिकार को लेकर आयोग की कार्यवाही जारी रहेगी। अंतिम आदेश आने तक यह स्पष्ट नहीं होगा कि भविष्य में आधिकारिक TMC नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न किस गुट को मिलता है। यानी फिलहाल बंगाल की चुनावी राजनीति में TMC का ‘नाम’ और ‘निशान’ दोनों अस्थायी रूप से लॉक हो गए हैं और दोनों गुटों को उपचुनाव के लिए नई पहचान के साथ मैदान में उतरना होगा।