'पत्नी का अवैध संबंध साबित तो नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता', छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि यदि पत्नी स्वेच्छा से व्यभिचार में रह रही है और दूसरे पुरुष से संबंध साबित हो जाते हैं, तो उसे पति से गुजारा भत्ता पाने का अधिकार नहीं होगा। कोर्ट ने AI से फर्जी ऑडियो बनाने की दलील भी खारिज कर दी।

'पत्नी का अवैध संबंध साबित तो नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता', छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
दूसरे पुरुष से संबंध रखने वाली पत्नी को नहीं मिलेगा भरण-पोषण।

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     HighLights:

  • छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने गुजारा भत्ता मामले में सुनाया अहम फैसला
  • व्यभिचार (Adultery) साबित होने पर पत्नी को नहीं मिलेगा भरण-पोषण
  • पत्नी ने ऑडियो रिकॉर्डिंग को AI से तैयार फर्जी सबूत बताया
  • वैज्ञानिक जांच में डिजिटल साक्ष्यों को सही पाया गया
  • हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा
  • महिला की पुनर्विचार याचिका खारिज

बिलासपुर (Threesocieties.com Desk): छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने भरण-पोषण (मेंटेनेंस) से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में ऐसा फैसला सुनाया है, जो भविष्य में इस तरह के मामलों के लिए अहम कानूनी मिसाल माना जा सकता है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई विवाहित महिला अपनी इच्छा से दूसरे पुरुष के साथ व्यभिचार (Adultery) में रह रही है और यह अदालत में साक्ष्यों से साबित हो जाता है, तो वह अपने पति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं होगी।

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यह फैसला उस मामले में आया, जिसमें जशपुर की रहने वाली महिला ने अपने पति से भरण-पोषण की मांग की थी। हालांकि अदालत में पेश किए गए डिजिटल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर फैमिली कोर्ट ने महिला के दावे को खारिज कर दिया था। अब हाई कोर्ट ने भी उस फैसले को सही ठहराया है।

शादी के आठ महीने बाद ही बढ़ गया विवाद

मामले के अनुसार, जशपुर निवासी महिला और रायपुर निवासी युवक की शादी 19 अप्रैल 2018 को हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। विवाह के कुछ ही समय बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गए। लगातार झगड़ों के चलते शादी के करीब आठ महीने बाद दोनों अलग रहने लगे। इसके बाद पत्नी ने पति और उसके परिवार पर दहेज प्रताड़ना, मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए अदालत में भरण-पोषण की मांग की। महिला ने दावा किया कि पति उसके चरित्र पर शक करता था और दहेज के लिए प्रताड़ित करता था। उसने आत्महत्या की कोशिश करने का भी आरोप लगाया।

पति ने अदालत में पेश किए अफेयर के सबूत

सुनवाई के दौरान पति ने अदालत में दावा किया कि पत्नी का दूसरे पुरुष से संबंध था। इस दावे के समर्थन में ऑडियो रिकॉर्डिंग और बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट सहित कई डिजिटल साक्ष्य पेश किए गए। महिला ने इन साक्ष्यों को चुनौती देते हुए आरोप लगाया कि पति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का इस्तेमाल कर उसकी नकली आवाज तैयार की है और फर्जी डिजिटल साक्ष्य बनाए हैं।

वैज्ञानिक जांच में सही पाए गए डिजिटल साक्ष्य

महिला के आरोपों के बाद अदालत के निर्देश पर डिजिटल साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच कराई गई। जांच में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद मामला छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहुंचा, जहां चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की एकल पीठ ने पूरे रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार किया।

हाई कोर्ट ने क्या कहा

हाई कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दिया गया फैसला सही है और उसमें किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं है। अदालत ने माना कि महिला के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्य पर्याप्त और विश्वसनीय हैं।कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यदि पत्नी स्वेच्छा से व्यभिचार में रह रही है, तो कानून के अनुसार वह पति से भरण-पोषण या किसी प्रकार की वित्तीय सहायता की हकदार नहीं होगी।

महिला की याचिका खारिज

हाई कोर्ट ने महिला की पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके साथ ही पति को भरण-पोषण देने के दायित्व से राहत मिल गई।

कानूनी महत्व

यह फैसला भरण-पोषण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि प्रत्येक मामले का फैसला उसके अपने तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित कानूनों के आधार पर किया जाता है। इसलिए इस निर्णय को सभी मामलों पर समान रूप से लागू नहीं माना जा सकता, बल्कि यह उन मामलों में प्रासंगिक होगा जहां अदालत के समक्ष व्यभिचार के पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध हों।