₹1 करोड़ का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा धनबाद से गिरफ्तार! 30 साल बाद सुरक्षाबलों की सबसे बड़ी कामयाबी
झारखंड में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिलने की सूचना है। ₹1 करोड़ के इनामी शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा को धनबाद से गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई है। हालांकि, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
HighLights:
- ₹1 करोड़ का इनामी शीर्ष माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार होने की सूचना
- धनबाद के रास्ते गिरिडीह भागने की कोशिश के दौरान सुरक्षा बलों ने दबोचा
- तीन दशक से झारखंड, ओडिशा समेत कई राज्यों की पुलिस के लिए बना हुआ था चुनौती
- माओवादी संगठन का पोलित ब्यूरो सदस्य और केंद्रीय समिति का अहम नेता।
रांची(Threesocieties.com Desk): झारखंड समेत पूर्वी भारत में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चल रहे अभियान में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। लगभग तीन दशक से पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता और ₹1 करोड़ के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा उर्फ भास्कर उर्फ सुनिर्मल उर्फ सागर को धनबाद-गिरिडीह बॉर्डर परसे गिरफ्तार कर लिया गया है। माओवादी संगठन के शीर्ष नेता एवं पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा के साथ माओवादी संगठन की रीजनल कमेटी का सदस्य मोछू उर्फ मेहनत उर्फ विभीषण उर्फ कुंबा मुर्मू तथा गौरव उर्फ सौरभ को भी गिरफ्तार किया गया है।
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मंगलवार देर शाम कोबरा, सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की।
मंगलवार देर शाम कोबरा, सीआरपीएफ और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की। मूल रूप से गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र स्थित मदनडीह गांव निवासी मिसिर बेसरा माओवादी संगठन की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई पोलित ब्यूरो का सदस्य था। उस पर विभिन्न राज्यों की ओर से कुल ₹1 करोड़ का इनाम घोषित था। वह पिछले डेढ़ दशक से अधिक समय तक झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में माओवादी गतिविधियों का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा। सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान के घने जंगलों में माओवादी नेटवर्क को मजबूत करने में मिसिर बेसरा की अहम भूमिका रही।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार वह संगठन के सैन्य अभियानों की रणनीति तैयार करने, हथियारबंद दस्तों के संचालन, नए कैडरों की भर्ती, लेवी वसूली और विभिन्न जोनों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी संभालता था। सुरक्षा बलों के खिलाफ कई बड़े हमलों की योजना बनाने तथा संगठन की गतिविधियों को संचालित करने में भी उसका नाम लंबे समय से सामने आता रहा है।
गिरफ्तार मोछू उर्फ मेहनत उर्फ विभीषण उर्फ कुंबा मुर्मू धनबाद जिले के बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के घोड़ाबांधा गांव का निवासी है। वह माओवादी संगठन की रीजनल कमेटी का सदस्य था और झारखंड सरकार ने उस पर ₹15 लाख का इनाम घोषित कर रखा था। वह लंबे समय से मिसिर बेसरा का करीबी सहयोगी माना जाता था और सारंडा-पोड़ाहाट क्षेत्र में संगठन के संचालन, लेवी वसूली, कैडर प्रबंधन और अभियान के समन्वय में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। गिरफ्तार तीसरा माओवादी गौरव उर्फ सौरभ भी संगठन का सक्रिय सदस्य बताया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां उससे भी संगठन के नेटवर्क और अन्य फरार माओवादियों के संबंध में पूछताछ कर रही हैं।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता
मिसिर बेसरा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। उसके खिलाफ हत्या, पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले, आईईडी विस्फोट, हथियार लूट, लेवी वसूली और आपराधिक साजिश से जुड़े अनेक मामले विभिन्न जिलों में दर्ज हैं। वह लगातार अपना ठिकाना बदलकर झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती जंगलों में सक्रिय रहता था, जिससे उसकी गिरफ्तारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थी। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि तीनों माओवादियों से पूछताछ में संगठन के हथियारों के ठिकाने, आईईडी नेटवर्क, लेवी तंत्र, शहरी संपर्क, वित्तीय स्रोत और फरार माओवादी नेताओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी। इन सूचनाओं के आधार पर आने वाले दिनों में सारंडा, कोल्हान, गिरिडीह और सीमावर्ती इलाकों में नक्सल विरोधी अभियान और तेज किए जाने की संभावना है।
कौन है मिसिर बेसरा?
मिसिर बेसरा प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा माना जाता है। वह संगठन के पोलित ब्यूरो का सदस्य होने के साथ-साथ केंद्रीय समिति के महत्वपूर्ण नेताओं में शामिल है। झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में माओवादी रणनीति तैयार करने, कैडरों की तैनाती और बड़े हमलों की योजना बनाने में उसकी अहम भूमिका रही है।उसके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं, जिनमें—
सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमले
IED विस्फोट
पुलिस से हथियार लूटने की घटनाएं
लेवी (रंगदारी) वसूली
कई पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों की हत्या
सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं
शामिल हैं।
कोल्हान अभियान के बाद कमजोर पड़ा नेटवर्क
पिछले कुछ महीनों में पश्चिमी सिंहभूम और कोल्हान क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने लगातार अभियान चलाकर माओवादियों के कई ठिकानों को ध्वस्त किया है। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि कई मुठभेड़ों में मारे गए। इन अभियानों के बाद मिसिर बेसरा लगातार ठिकाने बदल रहा था और सुरक्षाबलों से बचने की कोशिश कर रहा था। लेकिन इस बार सुरक्षा एजेंसियों को उसकी गतिविधियों की सटीक जानकारी मिल गई, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
15 दिन पहले चाईबासा के जंगल में मिली थी लोकेशन
सूत्रों के अनुसार, लगभग 15 दिन पहले सुरक्षा एजेंसियों को मिसिर बेसरा की लोकेशन चाईबासा के टोंटो थाना क्षेत्र स्थित मुरूम्बुरा गांव के आसपास मिली थी। उसके साथ ₹15 लाख का इनामी नक्सली वीरेंद्र हांसदा और मेहनत उर्फ मोछू भी मौजूद थे। इसके बाद लगातार निगरानी जारी रही और अंततः सुरक्षा बलों ने धनबाद में कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी उपलब्धि
यदि गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि होती है तो इसे झारखंड, ओडिशा और आसपास के राज्यों में माओवादी संगठन के खिलाफ सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जाएगा। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे माओवादी संगठन की रणनीतिक और नेतृत्व क्षमता को बड़ा झटका लगेगा। अब सुरक्षा एजेंसियां उससे पूछताछ के जरिए संगठन के शेष नेटवर्क, हथियारों के ठिकानों, लेवी तंत्र और सक्रिय कैडरों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने की कोशिश कर रही हैं।




