जमुई वायरल वीडियो केस: 3 नाबालिग आरोपी निरुद्ध, महिला SDPO के नेतृत्व में SIT गठित
जमुई वायरल वीडियो केस में पुलिस ने 3 नाबालिग आरोपितों को निरुद्ध किया है। महिला SDPO के नेतृत्व में SIT गठित, 32 सोशल मीडिया अकाउंट्स पर टेकडाउन कार्रवाई और स्पीडी ट्रायल की तैयारी।
HighLights:
- जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा से बदसलूकी के वायरल वीडियो पर पुलिस मुख्यालय ने लिया संज्ञान
- वीडियो फैलाने वाले 32 सोशल मीडिया अकाउंट्स पर टेकडाउन कार्रवाई।
- नाबालिगों की पहचान या चेहरा सार्वजनिक करने वालों पर भी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
- मामले में POCSO एक्ट और BNSS की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज
जमुई (Threesocieties.com Desk): बिहार के जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ बदसलूकी और छेड़खानी के वायरल वीडियो मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस के अनुसार, मामले में अब तक तीन नाबालिग आरोपितों को निरुद्ध किया गया है, जबकि दो अन्य की पहचान कर उनकी तलाश की जा रही है। घटना की जांच के लिए महिला एसडीपीओ दीप्ति मोनाली के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई है।
जमुई जिले में #सोशल_मीडिया पर वायरल वीडियो से संबंधित घटना में की गई कार्रवाई की अद्यतन जानकारी देते श्रीमति के० सुहिता अनुपम, अपर पुलिस महानिदेशक, (विधि-व्यवस्था)
— Bihar Police (@bihar_police) September 21, 2026
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पुलिस ने मामले में पोक्सो एक्ट समेत संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है और स्पीडी ट्रायल की तैयारी की जा रही है। पुलिस ने घटना से जुड़े अन्य आरोपितों की तलाश तेज कर दी है। मामले में स्पीडी ट्रायल की तैयारी की जा रही है।
क्या है जमुई वायरल वीडियो मामला?
बिहार के जमुई में 19 सितंबर की शाम नाबालिग छात्र और छात्रा के साथ कथित बदसलूकी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। पुलिस के अनुसार, दोनों नाबालिग कोचिंग के बाद एक स्थान पर गए थे। इसी दौरान कुछ युवकों ने उन्हें रोक लिया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया।घटना से संबंधित वीडियो सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। पुलिस ने वायरल वीडियो की जांच कर पीड़ित नाबालिगों की पहचान की और उनके बयान दर्ज किए। इसके बाद संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई। एसपी विश्वजीत दयाल के अनुसार, वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान की प्रक्रिया पूरी की गई है और आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों को लगाया गया है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो मामले में जमुई पुलिस की त्वरित कार्रवाई: S.I.T. गठित, तीन आरोपी गिफ्तार।#jamuiPolice#BiharPolice pic.twitter.com/Z9vTbR5PLR
— JAMUI POLICE (@JamuiPolice) September 21, 2026
तीन नाबालिग आरोपित निरुद्ध, दो अन्य की तलाश
पुलिस मुख्यालय के अनुसार, इस मामले में अब तक तीन नाबालिग आरोपितों को निरुद्ध किया गया है। वहीं दो अन्य युवकों की पहचान की गई है और उनकी तलाश जारी है। जांच के दौरान पुलिस वीडियो फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटना में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना के दौरान कौन-कौन लोग मौजूद थे और किसकी क्या भूमिका रही। एडीजी विधि व्यवस्था केएस अनुपम ने बताया कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
महिला SDPO के नेतृत्व में SIT गठित
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जमुई पुलिस ने विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। इस SIT का नेतृत्व महिला एसडीपीओ दीप्ति मोनाली कर रही हैं। SIT घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करेगी। इसमें वायरल वीडियो, घटनास्थल, पीड़ितों के बयान, आरोपितों की पहचान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को शामिल किया गया है। पुलिस का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और घटना में शामिल किसी भी व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।
32 सोशल मीडिया अकाउंट्स पर टेकडाउन कार्रवाई
जमुई मामले में पुलिस की कार्रवाई केवल आरोपितों तक सीमित नहीं है। पुलिस ने घटना से संबंधित आपत्तिजनक वीडियो के सोशल मीडिया पर प्रसार को रोकने के लिए भी कार्रवाई शुरू की है। एडीजी विधि व्यवस्था केएस अनुपम के अनुसार, अब तक कुल 32 सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ टेकडाउन कार्रवाई की गई है। इनमें: 13 फेसबुक अकाउंट, 12 इंस्टाग्राम अकाउंट व 7 X अकाउंट शामिल हैं। पुलिस का उद्देश्य आपत्तिजनक सामग्री के आगे प्रसार को रोकना है। साथ ही ऐसे अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है, जिनसे वीडियो को प्रसारित या दोबारा शेयर किया गया।
नाबालिगों की पहचान उजागर करने पर होगी कार्रवाई
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नाबालिग पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक करना कानूनन गंभीर विषय है। वीडियो, फोटो या किसी अन्य माध्यम से नाबालिग की पहचान अथवा चेहरा सार्वजनिक करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। एडीजी के अनुसार, POCSO एक्ट और Juvenile Justice Act की संबंधित धाराओं के तहत ऐसे मामलों में कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि घटना से संबंधित वीडियो को आगे शेयर न करें और न ही नाबालिग पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक करें।
POCSO एक्ट के तहत दर्ज हुई FIR
नाबालिगों से जुड़े इस मामले में पुलिस ने POCSO एक्ट की धाराओं के साथ BNSS की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जमुई थाने में BNSS की धारा 128, 74 और 75 तथा POCSO एक्ट की धारा 8 और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच के दौरान पुलिस उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तथ्यों को भी केस का हिस्सा बना रही है।
घटना के समय और स्थान की भी जांच
पुलिस के अनुसार, घटना 19 सितंबर की शाम करीब 6:25 से 6:30 बजे के बीच हुई बताई गई है। यह स्थान जमुई-लखीसराय मुख्य मार्ग से करीब तीन किलोमीटर दूर पहाड़ी इलाके में बताया गया है। पुलिस घटनास्थल से जुड़े तमाम पहलुओं की भी जांच कर रही है। इसके अलावा संबंधित क्षेत्र में पुलिस पेट्रोलिंग की व्यवस्था की भी समीक्षा की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
जांच में 7 से 8 युवकों के नाम सामने आने की जानकारी
एडीजी विधि व्यवस्था के अनुसार, प्रारंभिक जांच में करीब 7 से 8 युवकों के नाम सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। पुलिस वायरल वीडियो और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस आरोपितों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्पीडी ट्रायल की तैयारी
जमुई पुलिस और प्रशासन ने मामले में त्वरित कार्रवाई की बात कही है। पुलिस मुख्यालय की ओर से मामले में स्पीडी ट्रायल की तैयारी की जानकारी दी गई है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी करने के बाद आरोपितों के खिलाफ नियमानुसार चार्जशीट और अन्य कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। मामले में साक्ष्यों को सुरक्षित रखना और पीड़ितों की पहचान की गोपनीयता बनाए रखना भी पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है।
पुलिस और प्रशासन ने क्या कहा?
जमुई के एसपी विश्वजीत दयाल ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि नाबालिगों की सुरक्षा और उनकी पहचान की गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी नवीन ने भी मामले में पुलिस कार्रवाई की जानकारी लेते हुए आवश्यक निर्देश दिए हैं। प्रशासन की ओर से मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए त्वरित जांच और कानूनी कार्रवाई पर जोर दिया जा रहा है।
सोशल मीडिया यूजर्स से पुलिस की अपील
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि नाबालिग पीड़ितों से संबंधित किसी भी वीडियो या तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर न करें। किसी भी तरह की पहचान सार्वजनिक करना पीड़ितों की निजता को प्रभावित कर सकता है और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। पुलिस ने कहा है कि वायरल वीडियो को शेयर करने के बजाय लोगों को इसकी सूचना संबंधित पुलिस या साइबर सेल को देनी चाहिए।
आगे क्या होगा?
SIT की जांच के बाद मामले में आरोपितों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है। पुलिस पहले से निरुद्ध तीन आरोपितों से पूछताछ कर रही है और फरार बताए जा रहे अन्य लोगों की तलाश जारी है। साथ ही सोशल मीडिया पर वीडियो के प्रसार से जुड़े अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार, जांच में जो भी व्यक्ति घटना या आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार में कानून का उल्लंघन करता पाया जाएगा, उसके खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। जमुई पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि नाबालिग पीड़ितों की पहचान और निजता की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
Anjala Kumar 



