IIT ISM Dhanbad में राज्यपाल का संदेश: पर्यावरण बचाना सरकार अकेले के बस की बात नहीं
धनबाद IIT-ISM में राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला में राज्यपाल संतोष गंगवार ने पर्यावरण संरक्षण, जल-ऊर्जा बचत, प्लास्टिक कम करने और जनभागीदारी पर जोर दिया।
HighLights:
- धनबाद के IIT-ISM में राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला का आयोजन
- राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी पर दिया जोर
- कहा- पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार के प्रयासों से संभव नहीं
- जल और ऊर्जा बचाने, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने की अपील
धनबाद (Threesocieties.com Desk): भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT-ISM) धनबाद के गोल्डन जुबली हॉल में रविवार को राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। आरोग्य भारती और IIT-ISM के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और टिकाऊ विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया।

कार्यशाला के मुख्य अतिथि झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार थे। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकार की जिम्मेदारी मानने के बजाय समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी को जरूरी बताया।राज्यपाल ने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान किसी अकेले तंत्र या सरकार के प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए समाज, शैक्षणिक संस्थानों, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, उद्योगों और प्रत्येक नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयास भी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। पानी और ऊर्जा की बचत, प्लास्टिक के इस्तेमाल में कमी, पौधरोपण के साथ पौधों को जीवित रखना और प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार जैसे कदम व्यापक बदलाव की आधारशिला बन सकते हैं।
जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण बड़ी चुनौती
राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि आज जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और जैव-विविधता का संरक्षण बड़ी चुनौतियां बन चुके हैं। झारखंड के संदर्भ में उन्होंने राज्य के जंगलों और जलस्रोतों को महत्वपूर्ण प्राकृतिक संपदा बताया।उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन-दृष्टि में प्रकृति के प्रति सम्मान की परंपरा रही है। ऐसे समय में जब पर्यावरणीय दबाव बढ़ रहा है, प्रकृति के साथ संतुलित और सह-अस्तित्व वाली जीवनशैली की जरूरत और अधिक बढ़ गई है। उन्होंने विकास की दिशा पर भी जोर देते हुए कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए, जो वर्तमान पीढ़ी की जरूरतों को पूरा करने के साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी सुरक्षित रखे।
पानी और ऊर्जा बचाने की अपील
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन LiFE का उल्लेख करते हुए लोगों से पानी और ऊर्जा की बचत करने तथा प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल किसी अभियान या कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा। घर, परिवार और समाज से शुरू होने वाले छोटे बदलाव लंबे समय में महत्वपूर्ण परिणाम दे सकते हैं। राज्यपाल ने स्वस्थ जीवनशैली और स्वच्छ पर्यावरण के संबंध पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने योग, संतुलित पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छ वातावरण को बेहतर जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया।
IIT-ISM की भूमिका महत्वपूर्ण: राज्यपाल
राज्यपाल ने कहा कि IIT-ISM जैसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों की भूमिका पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने में बेहद महत्वपूर्ण है। विज्ञान और तकनीक के माध्यम से पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान विकसित किए जा सकते हैं।उन्होंने जल संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन, प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के क्षेत्र में अनुसंधान तथा नवाचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाने तथा परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए IIT-ISM के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्र ने तकनीकी दृष्टिकोण से पर्यावरण और विकास के मुद्दे पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि मौजूदा चुनौती पर्यावरण और विकास में से किसी एक को चुनने की नहीं, बल्कि दोनों के बीच संतुलन स्थापित करने की है। उन्होंने संसाधन दक्षता, चक्रीय अर्थव्यवस्था, स्वच्छ तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा और जिम्मेदार खनन पर जोर दिया। उनका कहना था कि वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों के जरिए विकास को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है।
पर्यावरण और स्वास्थ्य का सीधा संबंध
आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने पर्यावरण और स्वास्थ्य के बीच सीधे संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर से करनी होगी। केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों की देखभाल और उन्हें जीवित रखना भी जरूरी है। उन्होंने जल पुनर्चक्रण और जल पुनर्भरण के उपायों को अपनाने की जरूरत बताई। उनके अनुसार घर और समुदाय स्तर पर होने वाले ऐसे प्रयास पर्यावरण संरक्षण को मजबूत आधार दे सकते हैं।
अनावश्यक खनन और संसाधनों के दुरुपयोग पर चिंता
कार्यशाला में प्राकृतिक संसाधनों के सीमित और जिम्मेदार उपयोग पर भी जोर दिया गया। राज्यपाल ने कहा कि मनुष्य को अपनी जरूरतों के अनुसार ही प्रकृति के संसाधनों का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने अनावश्यक खनन और प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग से पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का असर अंततः मानव समाज पर ही पड़ता है।
देशभर से पहुंचे विशेषज्ञ और पर्यावरण कार्यकर्ता
राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से विशेषज्ञ और कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम में आरोग्य भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राकेश पंडित, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. जीएस तोमर, राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय, राष्ट्रीय पर्यावरण प्रमुख प्रवीण प्रभाकर समेत कई विशेषज्ञ मौजूद रहे। इसके अलावा IIT-ISM के पर्यावरण विभाग के प्राध्यापक डॉ. अंशुमाली, CMRI के वैज्ञानिक डॉ. नारायण कुमार भगत, साहेबगंज कॉलेज के प्राचार्य सह पर्यावरणविद डॉ. रंजीत सिंह और डॉ. इंद्रनील बसु सहित अन्य विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता IIT-ISM के निदेशक डॉ. सुकुमार मिश्र ने की। धन्यवाद ज्ञापन प्रांत कार्याध्यक्ष डॉ. शंभू प्रसाद ने किया, जबकि मंच संचालन प्रांत उपाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र नाथ तिवारी ने किया।
आरोग्य भारती के प्रयासों की राज्यपाल ने की सराहना
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने स्वास्थ्य और पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में आरोग्य भारती के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्था ने विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों और स्वास्थ्य संबंधी दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया है। उन्होंने स्वास्थ्य के क्षेत्र में उपचार के साथ रोगों की रोकथाम, संतुलित पोषण, योग, स्वस्थ जीवनशैली और स्वच्छ पर्यावरण पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई।
स्मारिका और पर्यावरण दिग्दर्शिका का विमोचन
कार्यशाला के दौरान राज्यपाल संतोष गंगवार और अन्य अतिथियों ने आरोग्य भारती की स्मारिका तथा पर्यावरण दिग्दर्शिका का विमोचन किया। इस अवसर पर कहा गया कि इन प्रकाशनों से पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले कार्यकर्ताओं के साथ आम लोगों को भी उपयोगी जानकारी मिल सकेगी।
आयोजन को सफल बनाने में कार्यकर्ताओं की भूमिका
कार्यशाला के आयोजन को सफल बनाने में आरोग्य भारती के प्रांत सचिव जयप्रकाश नारायण सिंह, महिला प्रमुख रमा सिन्हा, प्रांत पर्यावरण संयोजक अरुण राय, जिला अध्यक्ष डॉ. विकास रमण, कार्याध्यक्ष डीएस चौबे, सचिव विकास ओझा, बीपीपी सिन्हा, विक्रम हिमालय, ममता सिंह, डॉ. धीरज कुमार समेत अन्य कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा।
कार्यशाला के समापन पर पर्यावरण से जुड़े व्यावहारिक सुझावों को आगे बढ़ाने और उन्हें कार्ययोजना में बदलने पर जोर दिया गया। पूरे कार्यक्रम में इस बात पर विशेष बल रहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि सरकार, संस्थानों, उद्योगों और आम नागरिकों की साझा भागीदारी से ही प्रभावी रूप से आगे बढ़ सकता है।




