Deoghar : सैनिकों के पीछे परिवार का भी त्याग, झारखंड बलिदानों की धरती: उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शौर्य संपर्क मेले में सैनिकों और उनके परिवारों के त्याग को राष्ट्र की अमूल्य धरोहर बताया। झारखंड को बलिदानों की धरती बताते हुए पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया।
Highlights:
- उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा—सैनिकों के बलिदान के पीछे उनके परिवारों का भी बड़ा त्याग
- झारखंड और संताल परगना की धरती को बताया देशभक्ति, संघर्ष और बलिदान की प्रतीक
- भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, सिदो-कान्हू और अल्बर्ट एक्का के योगदान को किया याद
- पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके आश्रितों के कल्याण पर दिया जोर
देवघर (Threesocieties.com Desk): उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों के बलिदान के पीछे उनके परिवारों का भी बड़ा त्याग होता है। जब कोई सैनिक सीमा पर तैनात रहकर देश की सुरक्षा करता है, तब उसका परिवार भी अनेक जिम्मेदारियों, कठिनाइयों और भावनात्मक चुनौतियों को साझा करता है। इसलिए सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। राष्ट्र के रूप में उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हम सभी का दायित्व है।

उपराष्ट्रपति शनिवार को देवघर के दर्दमारा स्थित बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट के पीडी हिंदुजा अस्पताल परिसर में आयोजित दो दिवसीय शौर्य संपर्क मेला सह मेडिकल कैंप के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए उपराष्ट्रपति ने मेडिकल कैंप, सेवा गतिविधियों और भारतीय सेना के हथियारों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने सैनिकों और उनके परिजनों के कल्याण के प्रति समाज तथा सरकार की जिम्मेदारी पर जोर दिया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘सदा आपके साथ’ केवल शौर्य संपर्क मेले की थीम नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के प्रति राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का प्रतीक बननी चाहिए। देश की सेना हर परिस्थिति में राष्ट्र की रक्षा के लिए तत्पर रहती है। ऐसे में समाज और सरकार को भी सैनिकों तथा उनके परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा रहना चाहिए।
झारखंड बलिदानों की धरती, देशभक्ति यहां की पहचान
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने झारखंड और संताल परगना की गौरवशाली ऐतिहासिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह धरती संघर्ष, देशभक्ति और बलिदान की प्रतीक रही है। यहां के जनजातीय नायकों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति समर्पण का परिचय दिया।उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, सिदो-कान्हू और नीलांबर-पीतांबर जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद किया। इन वीर नायकों ने देश की आजादी और अपने समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उनका साहस और बलिदान आज भी लोगों को प्रेरित करता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि झारखंड की धरती पर देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की भावना आज भी जीवंत है। यहां के अनेक परिवार अपने बेटे-बेटियों को देश की रक्षा के लिए सशस्त्र बलों में भेजते हैं। यह राज्य और यहां के लोगों के लिए गौरव की बात है।उन्होंने परमवीर चक्र से सम्मानित लांस नायक अल्बर्ट एक्का को याद करते हुए कहा कि झारखंड को इस महान युद्ध नायक की जन्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है। अल्बर्ट एक्का का अदम्य साहस, देश के प्रति समर्पण और सर्वोच्च बलिदान पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत है।
सैनिकों के परिवारों का त्याग भी राष्ट्रसेवा का हिस्सा
उपराष्ट्रपति ने कहा कि सैनिकों की बहादुरी और बलिदान की चर्चा अक्सर होती है, लेकिन उनके परिवारों के संघर्ष और त्याग को भी समान सम्मान मिलना चाहिए। सीमा पर तैनात सैनिक जब अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है, तब उसके परिवार को घर की जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि वीर नारियों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों की जरूरतों को समझना तथा उन्हें उचित सहायता उपलब्ध कराना समाज और शासन की सामूहिक जिम्मेदारी है। शौर्य संपर्क मेले जैसे आयोजन सैनिकों और आम नागरिकों के बीच संबंधों को मजबूत करते हैं। साथ ही, ऐसे कार्यक्रम राष्ट्र के प्रति सैनिकों के योगदान के लिए आभार व्यक्त करने का अवसर भी देते हैं।
वन रैंक वन पेंशन से पूर्व सैनिकों को मिला सम्मान
उपराष्ट्रपति ने सशस्त्र बलों के पूर्व सैनिकों के कल्याण के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि वन रैंक वन पेंशन की लंबे समय से चली आ रही मांग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा किया गया। इससे पूर्व सैनिकों के सम्मान और कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई। उन्होंने बताया कि पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके आश्रितों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सिंगल विंडो सिस्टम जैसी व्यवस्थाओं से चिकित्सा सुविधाओं, दस्तावेजों से जुड़े कार्यों और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की परेशानी कम होती है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि पूर्व सैनिक देश की अमूल्य धरोहर हैं। सेना में अपने लंबे अनुभव और अनुशासन के कारण वे समाज तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। युवाओं को पूर्व सैनिकों के अनुभवों से सीख लेनी चाहिए।
शौर्य संपर्क मेला और मेडिकल कैंप के आयोजन की सराहना
उपराष्ट्रपति ने भारतीय सेना की ओर से आयोजित शौर्य संपर्क मेला और मेडिकल कैंप की सराहना की। उन्होंने आयोजन में सहयोग के लिए गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे, भारतीय सेना और बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट के सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन क्षेत्र के लोगों के प्रति सामूहिक कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मेडिकल कैंप के जरिए जरूरतमंद लोगों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने और सेना के विशेषज्ञ डॉक्टरों को आम नागरिकों तक पहुंचाने की पहल सराहनीय है।
मेले में चिकित्सा सेवाओं के साथ सेना के हथियारों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। इस तरह के कार्यक्रमों से आम नागरिकों को सेना की कार्यप्रणाली, क्षमता और राष्ट्र की सुरक्षा में उसके योगदान को करीब से समझने का अवसर मिलता है।
गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज में मेडिकल कॉलेज की जरूरत: निशिकांत दुबे
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज जैसे जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाने की जरूरत है, ताकि स्थानीय लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें और चिकित्सा शिक्षा के अवसर बढ़ें।
सांसद ने कहा कि उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने अपने पूर्ववर्ती सार्वजनिक दायित्वों के दौरान समाज के पिछड़े वर्गों की समस्याओं और उनकी कठिनाइयों को करीब से समझा है। उनके देवघर आगमन से इस क्षेत्र में विकास कार्यों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।उन्होंने देवघर में कनेक्टिविटी के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में छह महीने के भीतर देवघर शहर को लगभग 65 किलोमीटर लंबा फोरलेन रिंग रोड मिला है। बेहतर सड़क संपर्क से क्षेत्र के विकास, आवागमन और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मजबूती मिल सकती है।
डॉ. दुबे ने महाराष्ट्र में मेडिकल कॉलेजों के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि झारखंड में भी चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विकास के लिए इसी तरह प्रयास किए जाने चाहिए। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा।
अस्पताल, एंबुलेंस और आपात चिकित्सा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। एंबुलेंस सेवाओं, ऑक्सीजन की उपलब्धता और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने एक गंभीर सड़क दुर्घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि पौड़ेयाहाट में हुई दुर्घटना में एंबुलेंस में ऑक्सीजन की कमी के कारण एक व्यक्ति की मौत हो जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस तरह की घटनाएं बताती हैं कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में संसाधनों और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर भी एंबुलेंस सेवा शुरू की है, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था को स्थायी रूप से मजबूत बनाने के लिए व्यापक संस्थागत प्रयास जरूरी हैं। सांसद ने भारतीय सेना और उसके अधिकारियों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। देवघर एम्स में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में सेना के अनुभवी डॉक्टरों का विशेष शिविर के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचना महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में स्थानीय स्तर पर अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और आपात चिकित्सा सेवाओं का विस्तार होने से लोगों को बेहतर इलाज मिल सकेगा और विशेष चिकित्सा शिविरों पर निर्भरता भी कम होगी।
समारोह में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
शौर्य संपर्क मेला सह मेडिकल कैंप के समापन समारोह में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, राज्यसभा सांसद आदित्य साहू, बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट की चेयरपर्सन डॉ. अनामिका गौतम और लेफ्टिनेंट जनरल पनव चड्डा सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में सैनिकों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के साथ-साथ क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार तथा सेना और नागरिक समाज के बीच सहयोग को मजबूत करने का संदेश दिया गया।




