Canara Bank Robbery Jamshedpur: फरार तीन डकैतों पर 2-2 लाख का इनाम, पांच की पहचान
जमशेदपुर गोलमुरी केनरा बैंक डकैती में पुलिस ने पांच संदिग्धों की पहचान की है। तीन फरार डकैतों पर 2-2 लाख रुपये का इनाम और तस्वीरें जारी की गई हैं। 20 SIT टीमें बिहार-बंगाल समेत अन्य राज्यों में छापेमारी कर रही हैं।
HighLights:
- गोलमुरी केनरा बैंक डकैती के फरार आरोपियों पर दो-दो लाख रुपये का इनाम
- CCTV फुटेज से पांच संदिग्ध डकैतों की पहचान, तीन के नाम-पते सार्वजनिक
- 23 किलो सोना और 43 लाख रुपये की लूट के बाद बिहार-बंगाल में छापेमारी
- मामले में अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क के कनेक्शन की भी जांच
जमशेदपुर (Threesocieties.com Desk): गोलमुरी स्थित केनरा बैंक में 23 किलो सोना और 43 लाख रुपये की सनसनीखेज डकैती के मामले में जमशेदपुर पुलिस ने जांच तेज कर दी है। पुलिस ने CCTV फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पांच संदिग्ध डकैतों की पहचान की है। इनमें तीन आरोपियों की पहचान स्थापित होने के बाद उनकी तस्वीरें और विवरण सार्वजनिक किए गए हैं।
फरार आरोपियों की गिरफ्तारी में मदद करने वाले लोगों के लिए पुलिस ने दो-दो लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें इन आरोपियों के बारे में कोई जानकारी मिलती है तो तत्काल पुलिस को सूचना दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
तीन फरार आरोपियों पर दो-दो लाख रुपये का इनाम
गोलमुरी केनरा बैंक डकैती मामले में जिन तीन फरार आरोपियों की पहचान पुलिस ने सार्वजनिक की है, उनमें प्रियदर्शी उर्फ दर्शन कुमार, अक्षय कुमार उर्फ साका और अमन सिंह शामिल हैं। पुलिस के अनुसार प्रियदर्शी उर्फ दर्शन कुमार, अरुण कुमार राय का पुत्र है और समस्तीपुर, बिहार के चैत थाना क्षेत्र का निवासी बताया गया है। वहीं अक्षय कुमार उर्फ साका, संजय यादव का पुत्र है और पटना के धनकडोभ स्थित गोसाई गांव का रहने वाला बताया गया है। तीसरे आरोपी की पहचान अमन सिंह के रूप में हुई है। वह देवानंद सिंह का पुत्र है और पश्चिम बंगाल के रानीगंज क्षेत्र की तालपुकुर बस्ती, गिरियापाड़ा का निवासी बताया गया है। पुलिस ने इन तीनों की तस्वीरें सार्वजनिक करते हुए लोगों से इनके बारे में सूचना देने की अपील की है।
पांच डकैतों की पहचान, दो की तलाश जारी
पुलिस के मुताबिक CCTV फुटेज और जांच में मिले अन्य साक्ष्यों के आधार पर कुल पांच डकैतों की पहचान की गई है। इनमें तीन आरोपियों के नाम-पते की पुष्टि कर उनकी तस्वीरें सार्वजनिक की गई हैं, जबकि शेष दो की पहचान और उनके ठिकानों का पता लगाने की कार्रवाई जारी है। जांच एजेंसियां आरोपियों के आपराधिक नेटवर्क, एक-दूसरे से संपर्क और घटना के बाद उनके भागने के रास्तों की भी पड़ताल कर रही हैं।
बिहार, बंगाल और ओडिशा तक पुलिस का ऑपरेशन
मामले की गंभीरता को देखते हुए जमशेदपुर पुलिस ने विशेष जांच टीम यानी SIT की 20 टीमें गठित की हैं। सिटी एसपी ललित मीणा के नेतृत्व में गठित टीम की अलग-अलग इकाइयां आरोपियों की तलाश में बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और अन्य संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। पुलिस को आशंका है कि वारदात के बाद अपराधियों ने एक जगह टिकने के बजाय लगातार अपने ठिकाने बदले हैं। ऐसे में पुलिस तकनीकी साक्ष्यों, CCTV फुटेज और गुप्त सूचनाओं के आधार पर उनके संभावित मूवमेंट को ट्रैक करने में जुटी है।
24 सितंबर को हुई थी करोड़ों की सनसनीखेज डकैती
गोलमुरी केनरा बैंक में 24 सितंबर को हुई डकैती ने पूरे जमशेदपुर को हिला दिया था। अपराधी बैंक से करीब 23 किलो सोना और 43 लाख रुपये नकद लेकर फरार हो गए थे। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शुरुआत से ही इसे बड़ी चुनौती के रूप में लिया। अलग-अलग टीमों को जांच में लगाया गया और CCTV फुटेज समेत तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला गया। जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस को आरोपियों की पहचान से जुड़े अहम सुराग मिले। अब पुलिस फरार आरोपियों तक पहुंचने के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
अंतरराज्यीय कनेक्शन की भी जांच
जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस इस मामले में अंतरराज्यीय अपराध नेटवर्क के संभावित कनेक्शन की भी जांच कर रही है। बिहार और पश्चिम बंगाल से जुड़े अपराधी मॉड्यूल द्वारा अलग-अलग राज्यों में बैंक और गोल्ड लोन संस्थानों को निशाना बनाए जाने के मामलों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि जमशेदपुर की डकैती में शामिल आरोपियों ने घटना से पहले बैंक की कितनी रेकी की थी और उन्हें बैंक के भीतर सोना तथा नकदी की उपलब्धता की जानकारी कैसे मिली।
ऐसे काम करते हैं अंतरराज्यीय डकैती के मॉड्यूल
जांच के दौरान पुलिस की नजर उन अपराधी नेटवर्क की कार्यशैली पर भी है, जो एक राज्य में वारदात करने के बाद दूसरे राज्य में जाकर छिप जाते हैं। ऐसे गिरोहों में अलग-अलग लोगों की भूमिका निर्धारित होने की बात सामने आती रही है।
1. पहले होती है बैंक की रेकी
वारदात से पहले बैंक और उसके आसपास के इलाके की रेकी की जाती है। अपराधी बैंक के खुलने और बंद होने का समय, सुरक्षा व्यवस्था, CCTV कैमरे, गार्ड की तैनाती और आसपास के रास्तों की जानकारी जुटाते हैं।
2. अलग-अलग लोगों को दी जाती है जिम्मेदारी
ऐसे मॉड्यूल में हर व्यक्ति की भूमिका अलग हो सकती है। कोई रेकी करता है, कोई वाहन और भागने का रास्ता उपलब्ध कराता है, जबकि दूसरे सदस्य बैंक के भीतर वारदात को अंजाम देते हैं।
3. वारदात के बाद तेजी से बदलते हैं ठिकाना
डकैती के बाद अपराधी लंबे समय तक एक जगह नहीं रुकते। पुलिस की नाकेबंदी से बचने के लिए वे अलग-अलग वाहनों और रास्तों का इस्तेमाल कर राज्य की सीमा पार करने की कोशिश करते हैं।
4. ग्रामीण और अंदरूनी रास्तों का इस्तेमाल
पुलिस के अनुसार ऐसे अपराधी कई बार मुख्य हाईवे से बचकर ग्रामीण और अंदरूनी रास्तों का इस्तेमाल करते हैं। इससे उन्हें पुलिस की शुरुआती नाकेबंदी से बचने में मदद मिल सकती है।
पुलिस ने जारी की तस्वीर, जनता से सहयोग की अपील
जमशेदपुर पुलिस ने फरार आरोपियों की तस्वीरें सार्वजनिक कर आम लोगों से सहयोग मांगा है। पुलिस का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को आरोपियों के संबंध में कोई जानकारी मिलती है तो वह तत्काल पुलिस को सूचित करे। सूचना वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय, पुलिस अधीक्षक (नगर), नगर डीएसपी या गोलमुरी थाना प्रभारी को दी जा सकती है। पुलिस ने सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने की बात कही है।
गोलमुरी थाना में दर्ज है मामला
मामले में गोलमुरी थाना कांड संख्या 103/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 310(2), 311 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। पुलिस अब फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ लूटे गए सोने और नकदी की बरामदगी की दिशा में भी जांच आगे बढ़ा रही है।
इनाम के बाद पुलिस को सुराग मिलने की उम्मीद
फरार आरोपियों की तस्वीर सार्वजनिक करने और दो-दो लाख रुपये के इनाम की घोषणा के बाद पुलिस को उम्मीद है कि उन्हें आरोपियों के संभावित ठिकानों और नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। SIT की टीमें बिहार और पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का फोकस आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ इस बात का पता लगाने पर भी है कि इतनी बड़ी डकैती की पूरी साजिश किसने तैयार की और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस की कार्रवाई जारी है और मामले में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों तथा बरामदगी की उम्मीद है।
बैंक डकैती करने वाले गैेंग
1. सुबोध सिंह गिरोह (बेऊर जेल से संचालन): बिहार का सुबोध सिंह गिरोह भारत के सबसे बड़े बैंक और गोल्ड लोन डकैती नेटवर्कों में से एक है। वर्तमान में बेऊर जेल से संचालित होने वाला यह गिरोह मुख्य रूप से बिहार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और मध्य प्रदेश में सक्रिय है। इसके शूटर और लाइनर बिहार-बंगाल के सीमावर्ती इलाकों को छिपने व रसद (लाजिस्टिक्स) के लिए इस्तेमाल करते हैं।
2. कन्हैया यादव गिरोह: बिहार के भागलपुर का यह कुख्यात गिरोह भागलपुर, बांका और पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में ताबड़तोड़ बैंक डकैतियों के लिए जाना जाता है।
3. नालंदा और वैशाली के अंतरराज्यीय माड्यूल: बिहार के नालंदा, वैशाली और अरवल जिलों से जुड़े कई छोटे-बड़े माड्यूल दूसरे राज्यों में जाकर बड़ी लूट की घटनाएं करते हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश के सिंगरौली में बैंक ऑफ महाराष्ट्र से हुई 70 लाख रुपये के सोने व कैश की डकैती में पुलिस ने नालंदा के फंटूस कुमार यादव और कमलेश कुमार को गिरफ्तार किया था।
4. आसनसोल-वर्धमान और धनबाद का नेक्सस: पश्चिम बंगाल के आसनसोल व वर्धमान के अपराधी झारखंड के सीमावर्ती गैंग्स (जैसे धनबाद के गिरोह) के साथ मिलकर अंतरराज्यीय वारदातों को अंजाम देते हैं।
5. 'एटीएम बाबा' सुधीर मिश्रा का हाई-टेक गैंग: बिहार से संचालित होने वाला यह गिरोह उत्तर प्रदेश और कर्नाटक जैसे राज्यों में अपने प्रशिक्षित शूटरों व कटरों को मोबाइल से निर्देश देता है। यह गिरोह अत्याधुनिक गैस कटर, हैकसा ब्लेड और सीसीटीवी कैमरों पर काली स्याही पोतकर मात्र 15 मिनट के भीतर एटीएम काटकर करोड़ों रुपये उड़ाने में माहिर है।
कैसे काम करते हैं ये अंतरराज्यीय गैंग?: रेकी और हथियारों का जखीरा: वारदात से हफ्तों पहले बैंक के आसपास रेकी की जाती है। इन अपराधियों के पास अत्याधुनिक हथियार, पिस्तौलें और कटर मशीनें होती हैं।
सटीक टाइमिंग: ये गिरोह अक्सर बैंक खुलते ही (सुबह 10 से 11 बजे के बीच) हमला करते हैं, ताकि कैश काउंटर और लॉकर रूम को आसानी से निशाने पर लिया जा सके।
भागने के लिए ग्रामीण रास्तों का इस्तेमाल: डकैती के बाद अपराधी मुख्य हाइवे से बचते हुए ग्रामीण और अंदरूनी रास्तों का उपयोग करते हैं, जिससे एक राज्य से दूसरे राज्य की सीमा में प्रवेश कर पुलिस की नाकेबंदी को आसानी से चकमा दे सकें।
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