धनबाद: BCCLतिसरा–साउथ तिसरा प्रोजेक्ट विस्तार को ले बैठक, 22 मई तक रैयतों को आपत्ति दर्ज करने का मौका

धनबाद में BCCL की नॉर्थ तिसरा–साउथ तिसरा परियोजना विस्तार को लेकर विशेष समिति की बैठक हुई। रैयतों को 22 मई 2026 तक आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया गया है।

धनबाद:  BCCLतिसरा–साउथ तिसरा प्रोजेक्ट विस्तार को ले बैठक, 22 मई तक रैयतों को आपत्ति दर्ज करने का मौका
जमीन-अधिग्रहण पर मंथन तेज।

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धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद में बीसीसीएल की महत्वाकांक्षी नॉर्थ तिसरा–साउथ तिसरा परियोजना विस्तारीकरण को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन की अध्यक्षता में आयोजित विशेष समिति की बैठक में जमीन अधिग्रहण, पुनर्वासन (R&R) और रैयतों की समस्याओं पर गहन मंथन किया गया।

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इस परियोजना से जुड़े सबसे अहम फैसले के तहत अब प्रभावित रैयतों को 22 मई 2026 तक अपनी आपत्ति और दावों से संबंधित आवेदन जमा करने का मौका दिया गया है। इसके लिए समाहरणालय के ग्राउंड फ्लोर स्थित राजस्व शाखा (लैंड सेल) में सभी जरूरी दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा करना होगा।

जमीन अधिग्रहण और R&R पर फोकस

बैठक में खासतौर पर बलियापुर अंचल के सुरुंगा और मुकुंदा मौजा में होने वाले जमीन अधिग्रहण और ओवर बर्डन (OB) डंप के लिए पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन (R&R) पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रशासन ने निर्देश दिया कि दोनों मौजा में 100% संरचनाओं का मूल्यांकन किया जाए, ओबी डंप से प्रभावित रैयतों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो।

22 मई के बाद होगी अगली बड़ी कार्रवाई

उपायुक्त आदित्य रंजन ने साफ किया कि 22 मई तक जितने आवेदन प्राप्त होंगे, उनका निष्पादन करने के बाद ही पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन को लेकर अगली बैठक की तारीख तय की जाएगी। इसका मतलब साफ है कि यह तारीख प्रभावित लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है—अगर कोई दावा या आपत्ति है, तो यही सही समय है उसे दर्ज कराने का।

कौन-कौन रहे मौजूद

बैठक में कई अहम अधिकारी शामिल हुए, जिनमें: वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास पालीवाल, अपर समाहर्ता विनोद कुमार, डीएमओ रितेश राज तिग्गा, बलियापुर सीओ मुरारी नायक, आईटी मैनेजर रुपेश कुमार मिश्रा, भू-अर्जन शाखा के लक्ष्मी कांत साव, बीसीसीएल के भू-संपदा पदाधिकारी व लोदना एरिया के महाप्रबंधक।

क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?

बीसीसीएल की यह विस्तार परियोजना क्षेत्र में खनन गतिविधियों को बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति दे सकती है। हालांकि, जमीन अधिग्रहण और विस्थापन जैसे मुद्दों को लेकर स्थानीय रैयतों की चिंताएं भी लगातार सामने आ रही हैं। अब सभी की नजरें 22 मई पर टिकी हैं—क्योंकि इसी के बाद तय होगा कि परियोजना किस दिशा में आगे बढ़ेगी।