ई-चालान नहीं भरा तो जब्त होगी गाड़ी! RC, PUC और फिटनेस पर भी सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने बकाया ई-चालान की वसूली के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। वाहन जब्ती, RC रिन्यूअल, फिटनेस, PUC और Parivahan Portal पर ब्लैकलिस्टिंग समेत जानें पूरा मामला।

ई-चालान नहीं भरा तो जब्त होगी गाड़ी! RC, PUC और फिटनेस पर भी सुप्रीम कोर्ट सख्त
RC, PUC और फिटनेस पर सुप्रीम कोर्ट सख्त।

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  • बकाया ई-चालान वाले वाहनों की रैंडम चेकिंग और जब्ती के निर्देश
  • RC रिन्यूअल, डुप्लीकेट RC और पता अपडेट जैसी सेवाएं रोकी जाएंगी
  • बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के DL पर भी कार्रवाई
  • देशभर में करीब ₹49,194 करोड़ के ई-चालान की राशि वसूलना बाकी

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): अगर आपके वाहन पर पुराना ट्रैफिक ई-चालान बकाया है और आपने लंबे समय से उसका भुगतान नहीं किया है, तो अब इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने लंबित ट्रैफिक ई-चालानों की वसूली को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा है कि बकाया ई-चालान वाले वाहनों की रैंडम जांच की जाए और भुगतान नहीं होने की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई के तहत वाहन को जब्त किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह निर्देश सड़क सुरक्षा और मोटर वाहन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिए। यह मामला वर्ष 2012 से अदालत की निगरानी में है।

बकाया ई-चालान पर अब सिर्फ नोटिस नहीं, जमीन पर कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हजारों-लाखों ई-चालान जारी कर देना पर्याप्त नहीं है। असली सवाल यह है कि इन चालानों से लगाए गए जुर्माने की वसूली कैसे सुनिश्चित की जा रही है। अदालत ने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई करने पर जोर दिया है।कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे वाहनों की रैंडम जांच की जाए। जांच के दौरान यदि किसी वाहन पर ऐसा ई-चालान पाया जाता है जिसका भुगतान नहीं किया गया है, तो आवश्यक कदम उठाते हुए वाहन को जब्त किया जा सकता है।

RC रिन्यूअल और डुप्लीकेट RC पर रोक

बकाया जुर्माने वाले वाहनों के लिए ऑनलाइन वाहन सेवाओं को फ्रीज करने का भी निर्देश दिया गया है। जब तक लंबित ट्रैफिक फाइन पूरी तरह से क्लियर नहीं हो जाता, तब तक रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) के रिन्यूअल पर रोक रहेगी। इसके अलावा डुप्लीकेट RC जारी नहीं की जाएगी और वाहन मालिक के पते में बदलाव से संबंधित अनुरोध भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

फिटनेस सर्टिफिकेट भी नहीं मिलेगा

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लंबित ट्रैफिक जुर्माना पूरी तरह चुकाए जाने तक संबंधित वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जाना चाहिए। यानी बकाया ई-चालान सिर्फ जुर्माने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वाहन से जुड़ी कई जरूरी सरकारी सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

Parivahan Portal पर ब्लैकलिस्ट होगा वाहन

कोर्ट ने बकाया ई-चालान वाले वाहनों को केंद्रीय Parivahan Portal पर ब्लैकलिस्ट करने का भी निर्देश दिया है। इसका असर वाहन की बिक्री और मालिकाना हक के ट्रांसफर पर पड़ सकता है। इस तरह जब तक लंबित चालान का भुगतान नहीं किया जाता, वाहन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजी और ऑनलाइन काम अटक सकते हैं।

PUC सर्टिफिकेट पर भी शिकंजा

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि लंबित ट्रैफिक जुर्माने वाले वाहन को कोई केंद्र Pollution Under Control यानी PUC सर्टिफिकेट जारी नहीं करेगा। इसका मतलब है कि बकाया ई-चालान क्लियर किए बिना वाहन मालिक के लिए प्रदूषण प्रमाणपत्र से जुड़ी सेवा भी बाधित हो सकती है।

बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के DL पर कार्रवाई

कोर्ट ने कई बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर भी सख्त निर्देश दिए हैं। ऐसे मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस के रिन्यूअल को रोकने और पहले से जारी लाइसेंस को निलंबित करने की कार्रवाई की जा सकती है।

₹49,194 करोड़ से ज्यादा के ई-चालान का आंकड़ा

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास जारी ई-चालानों के तहत करीब ₹49,194.05 करोड़ की राशि वसूलना बाकी थी। इनमें से करीब ₹26,175.05 करोड़ की वसूली की जा चुकी है। यानी बड़ी रकम अभी भी वसूली के लिए लंबित है। इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली और चालान जारी करने के बाद वसूली की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

14 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

यह मामला वर्ष 2012 की एक जनहित याचिका से संबंधित है और सुप्रीम कोर्ट करीब 14 वर्षों से इसकी निगरानी कर रहा है। अदालत ने कहा कि उसके निर्देश केवल कागजों पर नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका प्रभाव जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए।कोर्ट ने अधिकारियों को जमीनी वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रभावी तरीके से कार्रवाई करने पर जोर दिया है। अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि बार-बार दिए जा रहे निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ तो उसे कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।

बिजली बिल में चालान जोड़ने की चर्चा, लेकिन लिखित आदेश में नहीं

सुनवाई के दौरान बकाया ट्रैफिक ई-चालान की वसूली के लिए बिजली बिल से जोड़ने का सुझाव भी चर्चा में आया था। हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि 28 सितंबर के लिखित आदेश में बिजली बिल के जरिए वसूली का निर्देश शामिल नहीं है। लिखित आदेश में वाहन जब्ती, ऑनलाइन वाहन सेवाओं पर रोक, RC और फिटनेस सेवाएं रोकने, PUC न देने, Parivahan Portal पर ब्लैकलिस्टिंग और कुछ मामलों में ड्राइविंग लाइसेंस पर कार्रवाई जैसे उपाय दर्ज हैं।

वाहन मालिकों के लिए क्या बदलेगा?

अगर किसी वाहन पर लंबित ई-चालान है, तो उसे नजरअंदाज करना अब मुश्किल हो सकता है। रैंडम चेकिंग के दौरान वाहन जब्त होने का जोखिम है। इसके अलावा RC रिन्यूअल, डुप्लीकेट RC, फिटनेस और PUC जैसी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं तथा वाहन की बिक्री या ओनरशिप ट्रांसफर भी रुक सकता है। बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के ड्राइविंग लाइसेंस पर भी कार्रवाई हो सकती है। इसलिए वाहन मालिकों के लिए लंबित ई-चालान की स्थिति जांचना और बकाया जुर्माने का निपटारा करना महत्वपूर्ण हो गया है।