चेन्नई में मजदूर की मौत, शव लाने को नहीं थे पैसे; MP ढुलू महतो ने भेजी एंबुलेंस
धनबाद बरवाअड्डा के सोनरीया गांव निवासी मजदूर मुकुंद दास की चेन्नई में मौत हो गयी। आर्थिक तंगी के कारण शव घर लाने में परेशानी हुई। सांसद ढुलू महतो ने अपने खर्च पर एंबुलेंस भेजकर शव गांव पहुंचाने में मदद की।
HighLights:
- चेन्नई में सोनरीया गांव के मजदूर मुकुंद दास की हो गयी थी मौत
- परिवार के सामने शव को गांव लाने की बड़ी आर्थिक परेशानी
- एंबुलेंस संचालक ने करीब एक लाख रुपये किराये की मांग की
- सांसद ढुलू महतो ने अपने खर्च पर एंबुलेंस की व्यवस्था कर शव गांव मंगवाया
धनबाद (Threesocieties.com Desk): बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के सोनरीया गांव निवासी मजदूर मुकुंद दास की चेन्नई में मौत के बाद उनके परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती शव को घर लाने की थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के पास चेन्नई से शव धनबाद लाने के लिए मांगी गयी बड़ी रकम जुटाने की क्षमता नहीं थी। ऐसे मुश्किल वक्त में ग्रामीणों की पहल पर धनबाद सांसद ढुलू महतो ने मदद का हाथ बढ़ाया और अपने खर्च पर एंबुलेंस की व्यवस्था करायी।
एंबुलेंस से मुकुंद दास का पार्थिव शरीर सोनरीया गांव पहुंचा। शव के गांव पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। ग्रामीणों की भी बड़ी संख्या में भीड़ जुट गयी। इसके बाद स्थानीय श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
रोजगार के लिए चेन्नई गये थे मुकुंद दास
मुकुंद दास पिछले कुछ समय से चेन्नई में रहकर मजदूरी कर रहे थे। उनके चचेरे भाई केदार दास के अनुसार, परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। इसी वजह से मुकुंद रोजगार की तलाश में चेन्नई गये थे। वहां मजदूरी कर परिवार के भरण-पोषण में आर्थिक सहयोग कर रहे थे। करीब दो दिन पहले चेन्नई में उनकी मौत हो गयी। मौत की सूचना परिवार तक पहुंची तो घर में मातम छा गया। लेकिन दुख के साथ परिवार के सामने एक और बड़ी परेशानी खड़ी हो गयी—शव को चेन्नई से गांव कैसे लाया जाये।
करीब एक लाख रुपये की एंबुलेंस का खर्च बना बड़ी बाधा
परिजनों के अनुसार, चेन्नई से शव सोनरीया गांव लाने के लिए एंबुलेंस संचालक की ओर से करीब एक लाख रुपये किराये की मांग की गयी थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना बेहद मुश्किल था। परिवार की इस परेशानी की जानकारी ग्रामीणों को मिली तो उन्होंने मदद के लिए पहल शुरू की। ग्रामीणों ने धनबाद सांसद ढुलू महतो से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी और शव को गांव तक लाने में सहायता का आग्रह किया।
सांसद ने अपने खर्च पर करायी एंबुलेंस की व्यवस्था
ग्रामीणों की सूचना मिलने के बाद सांसद ढुलू महतो ने मामले में पहल की। उन्होंने अपने खर्च पर एंबुलेंस की व्यवस्था करायी, जिसके बाद मुकुंद दास का पार्थिव शरीर चेन्नई से धनबाद के सोनरीया गांव लाया गया। सुबह शव गांव पहुंचते ही परिजन अंतिम दर्शन के लिए जुट गये। घर में चीख-पुकार मच गयी। मृतक के परिजनों की हालत देखकर आसपास मौजूद ग्रामीण भी भावुक हो गये। ग्रामीणों ने कहा कि परिवार आर्थिक संकट के कारण शव को घर लाने की स्थिति में नहीं था। ऐसे समय में एंबुलेंस की व्यवस्था होने से परिवार को बड़ी राहत मिली और मुकुंद दास का अंतिम संस्कार उनके गांव में ही हो सका।
अंतिम संस्कार में शामिल हुए सांसद ढुलू महतो
शव गांव पहुंचने के बाद स्थानीय श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। मृतक के भतीजे ने उन्हें मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, परिचित और स्थानीय लोग मौजूद रहे। सांसद ढुलू महतो भी अंतिम संस्कार कार्यक्रम में पहुंचे। उन्होंने शोकाकुल परिवार से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। सांसद ने परिजनों से घटना की जानकारी ली और इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहने की बात कही।
सांसद प्रतिनिधि सुनील चौधरी ने कहा कि मुकुंद दास गरीब परिवार से थे और रोजगार के लिए परदेस गये थे। उनकी मौत के बाद परिवार के पास शव को घर लाने तक का पर्याप्त सहारा नहीं था। जानकारी मिलने पर सांसद ने तत्काल एंबुलेंस की व्यवस्था करायी।
प्रवासी मजदूरों के परिवारों की मुश्किलें भी सामने आयीं
मुकुंद दास की मौत और शव को गांव लाने में परिवार के सामने आयी परेशानी ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों के परिवारों की चुनौतियों को सामने ला दिया है। रोजगार की तलाश में बड़ी संख्या में मजदूर झारखंड से दूसरे राज्यों में जाते हैं। ऐसे में परदेस में किसी मजदूर की मौत होने पर परिवार के सामने आर्थिक संकट के साथ शव को घर लाने की चुनौती भी खड़ी हो जाती है। सोनरीया गांव के ग्रामीणों ने कहा कि मुकुंद दास रोजगार के लिए चेन्नई गये थे और परिवार के लिए कमाई का जरिया बने हुए थे। उनकी अचानक मौत से परिवार को गहरा आघात पहुंचा है।
ग्रामीणों ने जताया शोक
मुकुंद दास की मौत की खबर के बाद सोनरीया गांव में शोक का माहौल रहा। परिवार को सांत्वना देने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिचित पहुंचे। शोक जताने वालों में पूर्व मुखिया पूरण रविदास, धर्मजीत सिंह, मोहन कुंभकार, प्रेम महतो, सुनील चौधरी, खगेन महतो, हुबलाल महतो और राहुल चौधरी समेत अन्य लोग शामिल थे। ग्रामीणों ने शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि दुख की इस घड़ी में पूरा गांव परिवार के साथ खड़ा है।
Threesocieties.com: मुकुंद दास की कहानी सिर्फ एक परिवार के दुख की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन प्रवासी मजदूर परिवारों की मुश्किलों को भी सामने लाती है, जिनके लिए रोजी-रोटी की तलाश में हजारों किलोमीटर दूर जाना मजबूरी बन जाता है। ऐसे समय में परदेस में मौत होने पर शव को घर तक पहुंचाना भी परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।
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