JPSC-JSSC पर सरकार का बड़ा एक्शन: 22 परीक्षाएं रद्द, 6 पर रोक; 17 भर्तियों की CID जांच
Jharkhand JPSC-JSSC Exams Cancelled: झारखंड सरकार ने JPSC-JSSC की 22 परीक्षाएं रद्द, 6 स्थगित और 17 पुरानी भर्तियों की CID जांच का आदेश दिया। JSSC-CGL के 1,932 समेत 2,628 नियुक्तियां प्रभावित, परीक्षा सुधार के लिए नई कमेटी और Internal Vigilance Cell बनेगा।
HighLights:
- 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया अगले आदेश तक स्थगित
- 17 पुरानी भर्तियों की CID जांच, JSSC-CGL भी रद्द
- CGL के जरिए नियुक्त 1,932 अभ्यर्थी प्रभावित
- JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षाओं से चयनित 342 अधिकारियों पर असर
रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवालों के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने JPSC और JSSC से जुड़ी 22 परीक्षाओं को रद्द, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया को अगले आदेश तक स्थगित और 17 पुरानी भर्ती परीक्षाओं की CID जांच का आदेश दिया है। कार्मिक विभाग ने 18 अगस्त की देर रात इस संबंध में अधिसूचना जारी की।
सरकार के इस फैसले का असर उन नियुक्तियों पर भी पड़ा है, जिनके आधार पर अभ्यर्थी पहले ही सरकारी सेवा में योगदान कर चुके हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक कुल 2,628 अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्तियां प्रभावित हुई हैं। इनमें JSSC-CGL के जरिए नियुक्त 1,932 अभ्यर्थी और JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षाओं से जुड़े 342 अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं।
JSSC-CGL समेत 22 परीक्षाओं पर बड़ी कार्रवाई
सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर JSSC-CGL पर पड़ा है। विज्ञापन संख्या 10/2023 के तहत आयोजित संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (JSSC-CGL) को रद्द कर दिया गया है। इस परीक्षा के जरिए चयनित और नियुक्त किए जा चुके 1,932 अभ्यर्थियों का भविष्य अब संकट में है। नियुक्त अभ्यर्थियों ने फैसले के बाद विरोध शुरू किया है और सरकार से अपना पक्ष रखने तथा न्याय की मांग की है।सरकार ने यह फैसला जांच में सामने आए तथ्यों और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के आधार पर लिया है। JSSC-CGL को लेकर पहले से ही अभ्यर्थियों का आंदोलन चल रहा था।
JPSC की कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं भी रद्द
सरकार के आदेश की जद में JPSC की कई अहम परीक्षाएं भी आई हैं। इनमें संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023 और 2025 की नियमित एवं बैकलॉग परीक्षाएं शामिल हैं। इसके अलावा पूर्व की 5वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ी परीक्षाओं तथा अन्य भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द करने का निर्णय लिया गया है। सिविल जज जूनियर डिवीजन, चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर, फूड सेफ्टी ऑफिसर, असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर, ड्रग इंस्पेक्टर और अन्य पदों से जुड़ी परीक्षाएं भी प्रभावित हुई हैं।
2,628 नियुक्तियों पर गहराया संकट
सरकार के फैसले का सबसे संवेदनशील पहलू पहले से नियुक्त अभ्यर्थियों पर पड़ने वाला असर है। रिपोर्टों के अनुसार कुल 2,628 नियुक्तियां प्रभावित हुई हैं। इनमें JSSC-CGL से जुड़े 1,932 नियुक्त कर्मचारी-अधिकारी और JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा के माध्यम से चयनित 342 अधिकारी प्रमुख रूप से शामिल हैं। शेष नियुक्तियां विभिन्न अन्य रद्द की गई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ी बताई गई हैं।इन अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर ईमानदारी से परीक्षा पास की है, तो सामूहिक रूप से परीक्षा रद्द किए जाने का असर उन पर क्यों पड़े। यही सवाल अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
विश्वविद्यालय से मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेज तक भर्ती प्रभावित
रद्द की गई परीक्षाओं का दायरा केवल प्रशासनिक सेवाओं तक सीमित नहीं है। राज्य के विश्वविद्यालयों में गैर-शैक्षणिक पदों की नियुक्ति, सरकारी इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर, तथा पॉलिटेक्निक कॉलेजों में लेक्चरर की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रियाएं भी प्रभावित हुई हैं। इसके अलावा झारखंड एलिजिबिलिटी टेस्ट (JET) 2024, असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर, ड्रग इंस्पेक्टर और फूड सेफ्टी ऑफिसर जैसी परीक्षाएं भी सरकार के फैसले की जद में आई हैं।
17 पुरानी भर्तियों की खुलेगी फाइल
सरकार ने केवल नई या विवादित परीक्षाओं को रद्द नहीं किया है, बल्कि 17 पुरानी भर्ती परीक्षाओं की भी CID जांच का आदेश दिया है। इन भर्तियों में वर्ष 2014 के बाद आयोजित कई परीक्षाएं शामिल हैं। जांच के दायरे में संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, सिविल जज जूनियर डिवीजन की भर्ती, कृषि विभाग से जुड़ी नियुक्तियां, फूड सेफ्टी ऑफिसर, डेंटिस्ट, असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर, कमर्शियल टैक्स, जियोलॉजी विभाग और असिस्टेंट इंजीनियर जैसी भर्तियां शामिल हैं। CID अब यह जांच करेगी कि इन भर्ती प्रक्रियाओं में किसी स्तर पर अनियमितता, कदाचार या प्रक्रिया संबंधी गड़बड़ी हुई थी या नहीं।
छह परीक्षाओं पर फिलहाल रोक
सरकार ने छह अन्य भर्ती परीक्षाओं को तत्काल रद्द करने के बजाय अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। इनमें शुरुआती परीक्षा प्रक्रिया में TDPL के अलावा अन्य एजेंसियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है।
स्थगित परीक्षाओं में—
फूड एनालिस्ट
डिप्टी डायरेक्टर प्रॉसिक्यूशन
प्रोजेक्ट मैनेजर
इंस्पेक्टर ऑफ फैक्टरीज
बॉयलर इंस्पेक्टर
डायरेक्टर पद की भर्ती
शामिल हैं। इन एजेंसियों की भूमिका और विश्वसनीयता की भी जांच की जाएगी।
सरकार के आदेश के बाद प्रभावित पदों का ब्यौरा
जेपीएससी (342 अफसर): 11वीं से 13वीं जेपीएससी के जरिए चयनित 342 अफसर, जिनमें 63 सीडीपीओ, 54 फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर और 237 महिला पर्यवेक्षिकाएं शामिल हैं।
जेएसएससी सीजीएल (1,932 पद): जेएससीए सीजीएल (विज्ञापन संख्या 10/2023) के जरिए नियुक्त 1,932 युवाओं की नौकरी चली गई है।
नौकरी गंवाने वाले अभ्यर्थियों ने सरकार के इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन व धरना शुरू कर दिया है और अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।
JPSC की रद्द की गई प्रमुख परीक्षाएं
गड़बड़ी के साक्ष्यों के आधार पर सरकार ने जेपीएससी की आठ प्रमुख परीक्षाओं और जेएसएससी सीजीएल को पूरी तरह रद्द कर दिया है।
संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा 2023, बाल विकास परियोजना अधिकारी और फूड सेफ्टी ऑफिसर भर्ती
छठी लिमिटेड डिप्टी कलेक्टर भर्ती तथा जेईटी 2024 परीक्षा
विश्वविद्यालयों में नॉन-टीचिंग पद, ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट डायरेक्टर और सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर भर्ती
इंजीनियरिंग कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर, पॉलिटेक्निक लेक्चरर और मेडिकल कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती
सिविल जज, असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर और असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर परीक्षाएं
17 पुरानी भर्तियों की खुलेगी फाइल, CID करेगी जांच
5वीं कंबाइंड सिविल सर्विसेज़ रिक्रूटमेंट
सिविल जज (जूनियर डिवीज़न) रिक्रूटमेंट
सिविल जज (जूनियर डिवीज़न) स्पेशल रिक्रूटमेंट
साइल कंज़र्वेशन ऑफिसर रिक्रूटमेंट
असिस्टेंट डायरेक्टर एग्रीकल्चर/सब डिवीज़नल एग्रीकल्चर ऑफिसर और इक्विवेलेंट रिक्रूटमेंट
असिस्टेंट डायरेक्टर एग्रीकल्चर/सब डिवीज़नल एग्रीकल्चर ऑफिसर और इक्विवेलेंट (बैकलॉग) रिक्रूटमेंट
फ़ूड सेफ़्टी ऑफिसर रिक्रूटमेंट
डेंटिस्ट (बेसिक कैडर) एडवाइज़री
कंबाइंड सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन (बैकलॉग)
कमर्शियल टैक्स (लिमिटेड) एग्जामिनेशन
कंबाइंड सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन
डायरेक्टोरेट ऑफ़ जियोलॉजी (रेगुलर) के तहत जियोलॉजिस्ट और केमिस्ट की रिक्रूटमेंट
असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की रिक्रूटमेंट
सिविल जज (जूनियर डिवीज़न) रेगुलर
कंबाइंड असिस्टेंट इंजीनियर (रेगुलर) की रिक्रूटमेंट
कंबाइंड सिविल सर्विसेज़ एग्जामिनेशन-2021
डेंटल डॉक्टरों (रेगुलर) की भर्ती
परीक्षा व्यवस्था में होगा बड़ा बदलाव
लगातार सामने आ रही शिकायतों और जांच के बाद सरकार ने भविष्य की भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने के लिए तीन बड़े कदम उठाने का फैसला किया है।
1. अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में कमेटी
JPSC और JSSC की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय कमेटी गठित की जाएगी। कमेटी परीक्षा कराने की पूरी प्रक्रिया, एजेंसियों की भूमिका, सुरक्षा व्यवस्था, परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया और पारदर्शिता के दूसरे पहलुओं का अध्ययन करेगी। कमेटी को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
2. Internal Vigilance Cell बनेगा
JPSC और JSSC में आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ (Internal Vigilance Cell) बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखना और संभावित गड़बड़ियों को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ना होगा। इससे परीक्षा संचालन, आउटसोर्स एजेंसियों की भूमिका और अन्य संवेदनशील प्रक्रियाओं की निगरानी मजबूत करने की कोशिश की जाएगी।
3. फास्ट ट्रैक कोर्ट का अनुरोध
JPSC-JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितता और कदाचार से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए सरकार झारखंड हाईकोर्ट से फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का अनुरोध करेगी। सरकार का उद्देश्य लंबे समय से लंबित मामलों का जल्द निपटारा कर भर्ती प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बहाल करना है।
17 अगस्त की बैठक के बाद 18 अगस्त को आदेश
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी था। इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 17 अगस्त को मंत्रियों के साथ बैठक की थी। बैठक के बाद सरकार ने परीक्षा रद्द करने और पुरानी परीक्षाओं की जांच कराने की घोषणा की। इसके अगले ही दिन, यानी 18 अगस्त की देर रात कार्मिक विभाग ने औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी। हालांकि, परीक्षा रद्द करने के बाद भी आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अभ्यर्थियों का एक वर्ग भर्ती प्रक्रिया की CBI जांच की मांग पर कायम है। वहीं नियुक्त अभ्यर्थी अपनी नौकरियां बचाने और सरकार के फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं।
सरकार के फैसले से उठे कई बड़े सवाल
सरकार के इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल उन अभ्यर्थियों को लेकर है जिन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा पास कर नौकरी हासिल की। यदि किसी परीक्षा की पूरी प्रक्रिया में अनियमितता साबित होती है, तो ईमानदारी से चयनित अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा कैसे होगी—यह आने वाले दिनों में बड़ा कानूनी और प्रशासनिक मुद्दा बन सकता है। दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि जांच, परीक्षा रद्द करने और संस्थागत सुधार—तीनों स्तरों पर एक साथ कदम उठाए गए हैं।
अब आगे क्या?
22 परीक्षाओं के रद्द होने, छह पर रोक और 17 पुरानी भर्तियों की CID जांच के बाद अब निगाहें जांच की रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर रहेंगी। साथ ही 2,628 प्रभावित नियुक्तियों को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण होगी। JPSC और JSSC की परीक्षा प्रणाली में प्रस्तावित सुधार समिति की रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि भविष्य में भर्ती परीक्षाओं को पेपर लीक, आउटसोर्स एजेंसी की कथित गड़बड़ी और प्रक्रिया संबंधी अनियमितताओं से बचाने के लिए कौन-कौन से स्थायी बदलाव किए जाते हैं।
नोट: 2,628 नियुक्तियों का आंकड़ा और परीक्षा-वार प्रभाव सरकार के आदेश/उपलब्ध रिपोर्टों में बताए गए विवरण पर आधारित है; प्रभावित अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अंतिम कानूनी स्थिति आगे की सरकारी कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।




