Bengal : coal mafia अनूप माझी उर्फ लाला पर ED का शिकंजा, 815 करोड़ की संपत्ति जब्त

ED ने अनूप माझी उर्फ लाला सिंडिकेट की 136.44 करोड़ की संपत्ति जब्त की। रिसॉर्ट्स समेत कुल जब्त संपत्ति 815.08 करोड़ रुपये पहुंची।

Bengal : coal mafia अनूप माझी उर्फ लाला पर ED का शिकंजा, 815 करोड़ की संपत्ति जब्त
अनूप माझी उर्फ लाला को बड़ा झटका, 136.44 करोड़ की संपत्ति फिर जब्त।

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  • अनूप माझी उर्फ लाला सिंडिकेट पर ED की बड़ी कार्रवाई
  • 136.44 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से जब्त
  • पुरुलिया और बांकुड़ा के इको टूरिज्म रिसॉर्ट्स भी कार्रवाई के दायरे में
  • कोलकाता की दो संपत्तियां, शेल कंपनियों के बैंक खाते और निवेश शामिल
    नई कार्रवाई के बाद जब्त संपत्ति का कुल मूल्य 815.08 करोड़ रुपये
    अवैध कोयला खनन और मनी लांड्रिंग के नेटवर्क की जांच जारी

रांची (Threesocieties.com Desk): ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्र में अवैध कोयला खनन, परिवहन और भंडारण से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। मनी लांड्रिंग के आरोपों की जांच के दौरान ईडी ने कोयला माफिया अनूप माझी उर्फ लाला के सिंडिकेट से जुड़ी 136.44 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त किया है।

ईडी की इस कार्रवाई को अवैध कोयला कारोबार से कथित तौर पर अर्जित धन और उसके निवेश के नेटवर्क पर शिकंजा कसने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जांच एजेंसी के अनुसार, जब्त की गई संपत्तियों में पर्यटन कारोबार से जुड़ी संपत्तियों के साथ-साथ कंपनियों के बैंक खाते और वित्तीय निवेश भी शामिल हैं।

136.44 करोड़ रुपये की संपत्ति में क्या-क्या शामिल?

ईडी की ओर से की गई ताजा कार्रवाई में कई तरह की संपत्तियों को शामिल किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से दो होटल-सह-रिसॉर्ट, कोलकाता की दो संपत्तियां, शेल कंपनियों के बैंक खातों में जमा राशि तथा शेयर और म्यूचुअल फंड में निवेश शामिल हैं। जब्त रिसॉर्ट्स में पुरुलिया स्थित गढ़ पंचकोट इको टूरिज्म और बांकुड़ा स्थित बिहारीनाथ इको टूरिज्म शामिल हैं। जांच एजेंसी को संदेह है कि अवैध कोयला कारोबार से अर्जित धन का निवेश इन संपत्तियों में किया गया था। इसके अलावा, अनूप माझी के परिवार के सदस्यों के नाम पर किए गए वित्तीय निवेश भी कार्रवाई के दायरे में आए हैं। ईडी इन संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व, निवेश के स्रोत और कथित अपराध से उनके संबंधों की जांच कर रही है।

पहले भी जब्त हो चुकी है 678.64 करोड़ की संपत्ति

अनूप माझी उर्फ लाला सिंडिकेट के खिलाफ यह पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी ईडी इस मामले में 678.64 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त कर चुकी है। अब 136.44 करोड़ रुपये की नई जब्ती के बाद कुल जब्त संपत्ति का मूल्य 815.08 करोड़ रुपये हो गया है। यह आंकड़ा अवैध कोयला खनन से जुड़े कथित आर्थिक अपराधों की जांच के व्यापक दायरे को दर्शाता है। हालांकि, संपत्ति की अस्थायी जब्ती और उसके अंतिम रूप से जब्त होने की कानूनी प्रक्रिया अलग-अलग चरण हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर होगी।

अपराध की कमाई के असली लाभार्थियों का पता लगा रही ED

ईडी ने जब्ती से संबंधित नोट में उल्लेख किया है कि उसके अनुसार संबंधित संपत्तियां अपराध से अर्जित आय से बनाई गई थीं। जांच एजेंसी अब इस कथित अवैध कमाई के वास्तविक लाभार्थियों की पहचान करने में जुटी है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अवैध कोयला खनन और चोरी से हासिल धन किन-किन व्यक्तियों, कंपनियों और संस्थाओं के माध्यम से आगे बढ़ाया गया। इस सिलसिले में वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों, निवेश और संपत्तियों के स्वामित्व से संबंधित पहलुओं की जांच की जा रही है। ईडी का उद्देश्य कथित अपराध से अर्जित धन के स्रोत, उसके इस्तेमाल और वास्तविक नियंत्रण रखने वाले लोगों के बीच संबंधों का पता लगाना है।

कोयले की चोरी कर पश्चिम बंगाल की फैक्ट्रियों में बेचने का आरोप

जांच के अनुसार, अनूप माझी उर्फ लाला के नेतृत्व वाला सिंडिकेट ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के लीज क्षेत्र में कथित तौर पर अवैध कोयला खनन और चोरी में शामिल था। आरोप है कि अवैध रूप से निकाले गए कोयले का परिवहन कर उसे पश्चिम बंगाल की विभिन्न फैक्ट्रियों में नकद बेचा जाता था। ईडी की जांच में स्थानीय प्रशासन के कुछ अधिकारियों की कथित मदद से कोयले के परिवहन और बिक्री का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका का निर्धारण जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगा।

एजेंसी के अनुसार, कोयले की कथित अवैध बिक्री से बड़ी मात्रा में नकदी प्राप्त होती थी। इस धन को सीधे अपने पास रखने के बजाय अलग-अलग कंपनियों और वित्तीय लेनदेन के माध्यम से इस्तेमाल करने का नेटवर्क तैयार किया गया था।

शेल कंपनियों के जरिए कथित तौर पर छिपाई गई कमाई

ईडी की जांच में कई कागजी कंपनियों यानी शेल कंपनियों का भी उल्लेख है। आरोप है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल अवैध कोयला कारोबार से प्राप्त धन को वित्तीय लेनदेन के माध्यम से घुमाने और उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता था।जांच एजेंसी के मुताबिक, इन कंपनियों को रिश्तेदारों, कर्मचारियों और कथित सहयोगियों के नाम पर रखा गया था, जबकि उनका वास्तविक स्वामित्व और नियंत्रण अनूप माझी के पास होने का संदेह है।

आरोप है कि कोयले की अवैध बिक्री से प्राप्त नकदी को इन कंपनियों के जरिए फर्जी कारोबारी प्रविष्टियों के रूप में दिखाया जाता था। इसके बाद रकम विभिन्न बैंक खातों में जमा की जाती थी, ताकि धन के स्रोत और वास्तविक लाभार्थी की पहचान करना मुश्किल हो जाए।ईडी अब संबंधित कंपनियों के वित्तीय रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच के माध्यम से इस कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

रिसॉर्ट्स और निवेश में लगाया गया कथित अवैध धन

ईडी की जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई है कि सिंडिकेट ने कथित अपराध से अर्जित कमाई का निवेश पर्यटन कारोबार से जुड़ी संपत्तियों में किया। पुरुलिया का गढ़ पंचकोट इको टूरिज्म और बांकुड़ा का बिहारीनाथ इको टूरिज्म इसी कार्रवाई के प्रमुख हिस्से हैं।इसके अलावा, कोलकाता स्थित संपत्तियों तथा परिवार के सदस्यों के नाम पर शेयर और म्यूचुअल फंड में निवेश की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी यह स्थापित करने का प्रयास कर रही है कि इन संपत्तियों को खरीदने या उनमें निवेश करने के लिए इस्तेमाल किया गया धन कहां से आया और क्या उसका संबंध कथित अवैध कोयला कारोबार से था।

आगे भी जारी रहेगी जांच

अनूप माझी उर्फ लाला सिंडिकेट से जुड़े इस मामले में ईडी की जांच का मुख्य केंद्र अवैध कोयला खनन से कथित तौर पर अर्जित आय, उसे छिपाने के लिए इस्तेमाल किए गए वित्तीय माध्यम और उस धन से बनाई गई संपत्तियां हैं। 136.44 करोड़ रुपये की ताजा अस्थायी जब्ती के बाद कुल जब्त संपत्ति का मूल्य 815.08 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। जांच एजेंसी अब कथित अपराध से अर्जित धन के वास्तविक लाभार्थियों और इस नेटवर्क में शामिल अन्य व्यक्तियों तथा संस्थाओं की पहचान करने में जुटी है।फिलहाल, मामले में जांच जारी है। आरोपों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष संबंधित कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होंगे।