बाबा मंदिर देवघर की सुरक्षा अब ‘डिजिटल कवच’ के भरोसे, दुकानदारों-गुमास्ताओं का बनेगा पूरा डेटा-बेस
देवघर बाबा मंदिर की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन और पंडा धर्मरक्षिणी सभा ने बड़ा कदम उठाया है। मंदिर परिसर में काम करने वाले गुमास्ता, दुकानदार, फोटोग्राफर और अन्य सहयोगियों का डिजिटल डेटा-बेस तैयार किया जा रहा है। 500 से अधिक लोगों ने आधार और वोटर आईडी जमा किए हैं।
- देवघर बाबा मंदिर में सुरक्षा का हाईटेक प्लान
- 500 से ज्यादा लोगों ने जमा किए पहचान पत्र
- प्रशासन ने शुरू किया बड़ा सत्यापन अभियान
- दुकानदारों और सहायकों की बनेगी डिजिटल कुंडली
देवघर (Threesocieties.com Desk): विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लिए जिला प्रशासन एवं पंडा धर्मरक्षिणी सभा ने बड़ा कदम उठाया है। मंदिर परिसर और आसपास काम करने वाले दुकानदारों, गुमास्ताओं, फोटोग्राफरों, फूल-माला विक्रेताओं, अगरबत्ती दुकानदारों और अन्य सहयोगियों का अब डिजिटल डेटा-बेस तैयार किया जा रहा है।
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मंदिर प्रशासन का मानना है कि यह पहल सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे मंदिर परिसर में होने वाली गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी और किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की तुरंत पहचान संभव होगी।
500 से अधिक लोगों ने जमा किए पहचान पत्र
बाबा मंदिर थाना की ओर से मंदिर परिसर में कार्यरत लोगों को आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य पहचान पत्र जमा करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद अब तक करीब 500 से अधिक लोगों ने अपने दस्तावेज जमा करा दिए हैं। मंदिर प्रशासन इन सभी लोगों का अलग-अलग श्रेणियों में डेटा तैयार कर रहा है। जानकारी के अनुसार डेटा-बेस को चार प्रमुख भागों में बांटा जाएगा, ताकि हर वर्ग की अलग पहचान और निगरानी सुनिश्चित हो सके।
दुकानदारों के कर्मचारियों की भी होगी पहचान
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि मंदिर परिसर में दुकान संचालित करने वाले दुकानदार यदि किसी अन्य व्यक्ति को काम पर रखते हैं तो उसका भी पहचान पत्र जमा करना अनिवार्य होगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि दुकान वास्तव में आवंटित व्यक्ति चला रहा है या किसी दूसरे के माध्यम से संचालन हो रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इसे मंदिर सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मान रही हैं।
फोटोग्राफर और स्टूडियो संचालकों पर भी नजर
मंदिर परिसर में सक्रिय फोटोग्राफर और स्टूडियो संचालकों को भी आधार कार्ड जमा करना जरूरी किया गया है। प्रशासन का कहना है कि मंदिर में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के बीच काम करने वाले हर व्यक्ति की स्पष्ट पहचान होना आवश्यक है।
गुमास्ताओं की होगी विशेष मॉनिटरिंग
तीर्थ पुरोहितों के सहयोगी के रूप में काम करने वाले गुमास्ताओं को लेकर भी प्रशासन गंभीर है। गुमास्ता के लिए संबंधित तीर्थ पुरोहित का आधार कार्ड, गुमास्ता का आधार कार्ड और वोटर आईडी जमा करना अनिवार्य किया गया है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि हाल के दिनों में गुमास्ताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में पुराने और नए गुमास्ताओं की पहचान सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है।
338 गुमास्ता और 155 नाइयों का हो चुका रजिस्ट्रेशन
पंडा धर्मरक्षिणी सभा की ओर से अब तक 338 गुमास्ताओं को चिह्नित कर उनका परिचय पत्र तैयार किया जा चुका है। वहीं 155 नाइयों ने भी आधार और वोटर आईडी जमा कर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी की है। इन सभी दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। फिलहाल सभा में एक सप्ताह से नए रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई गई है।
संदिग्ध गतिविधियों पर रहेगी पैनी नजर
मंदिर प्रशासन और पुलिस संयुक्त रूप से आगे की रणनीति तैयार कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी डेटा को डिजिटल सिस्टम में सुरक्षित रखा जाएगा ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत उपयोग किया जा सके। यदि किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति की पहचान कर तत्काल कार्रवाई संभव होगी।
सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क
पंडा धर्मरक्षिणी सभा के पदाधिकारी लगातार मंदिर परिसर की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। सभा के महामंत्री और उपाध्यक्ष समेत अन्य सदस्य बारी-बारी से मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। श्रावणी मेला और बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए प्रशासन इस व्यवस्था को बाबा मंदिर की सुरक्षा के लिए एक “डिजिटल कवच” के रूप में देख रहा है।






