Highlights:
- ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ को सोनिया गांधी ने राजनीतिक नहीं, निजी किताब बताया
- पुस्तक में राजीव गांधी से मुलाकात और प्रेम की कहानी का जिक्र है
- इंदिरा गांधी के साथ अपने गहरे पारिवारिक रिश्ते को याद किया
- इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को खोने के असहनीय दर्द का भी उल्लेख किया
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ भारत में रिलीज होने से पहले ही चर्चा में आ गई है। सोनिया गांधी ने अपनी इस पुस्तक को लेकर स्पष्ट किया है कि यह कोई राजनीतिक संस्मरण नहीं, बल्कि उनके निजी जीवन, पारिवारिक रिश्तों, प्रेम, संघर्ष और जीवन के अनुभवों पर आधारित किताब है।
सोनिया गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि उनके परिवार के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है, लेकिन उनके वास्तविक व्यक्तित्व, प्रेरणाओं, संघर्षों और मानवीय कमजोरियों को शायद ही कभी गहराई से समझने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से वह अपने परिवार के सदस्यों को उसी रूप में प्रस्तुत करना चाहती थीं, जिस रूप में उन्होंने उन्हें करीब से जाना और उनसे प्रेम किया। अंग्रेजी दैनिक ‘द हिंदू’ में लिखे अपने लेख में सोनिया गांधी ने पुस्तक के पीछे की सोच और अपनी जीवन यात्रा के बारे में विस्तार से बताया है।
और भी पढ़ें
- IIT-ISM धनबाद का शताब्दी समारोह 21 दिन तक, बॉलीवुड कलाकारों से सजेगी महफिल
- SNMMCH धनबाद को NMC की सौगात, PG की 18 सीटें बढ़ीं; 4 नये विभागों में पढ़ाई
- दीपावली पर घर में जरूर रखें ये 12 चीजें, धन पोटली से बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा!
- दीवाली पर 3 लग्न में होगी लक्ष्मी पूजा, जानें घर-दुकान और मध्य रात्रि का शुभ मुहूर्त
राजनीतिक नहीं, निजी अनुभवों की कहानी
सोनिया गांधी ने कहा कि लंबे समय तक उन्होंने अपनी निजी दुनिया को बेहद सीमित और सुरक्षित रखा। सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने के दौरान भी उन्होंने अपने व्यक्तिगत जीवन को सार्वजनिक चर्चा से दूर रखने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि राजनीति में उनका प्रवेश उनकी स्वाभाविक इच्छा नहीं थी, बल्कि परिस्थितियों और कर्तव्यबोध ने उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ाया। सार्वजनिक जीवन की रोजमर्रा की व्यस्तताओं से दूर होने के बाद ही उन्हें अपनी जीवन यात्रा को नए नजरिये से देखने और उसे शब्दों में व्यक्त करने का अवसर मिला।
सोनिया के अनुसार, उनके परिवार के बारे में कई तरह की बातें लिखी गई हैं, लेकिन परिवार के सदस्यों की मानवीय भावनाओं, उनके संघर्षों, प्रेरणाओं और कमजोरियों को समझने की कोशिश कम हुई है। वह इस पुस्तक के जरिए अपने परिवार की एक ऐसी तस्वीर पेश करना चाहती हैं, जिसे उन्होंने खुद करीब से देखा और महसूस किया है।
19 साल की उम्र में राजीव गांधी से हुई थी मुलाकात
अपनी जिंदगी के शुरुआती दिनों को याद करते हुए सोनिया गांधी ने बताया कि उनकी कहानी की शुरुआत इटली के एक छोटे से कस्बे से हुई थी। वहां की 19 वर्षीय युवती की मुलाकात इंग्लैंड के कैम्ब्रिज में एक युवा भारतीय छात्र राजीव गांधी से हुई। यह मुलाकात धीरे-धीरे प्यार और विश्वास के रिश्ते में बदल गई। इसी रिश्ते ने सोनिया को एक नए देश, नई संस्कृति और नए परिवार से जोड़ा। उन्होंने लिखा कि पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें अपनी पूरी जिंदगी में एक ही मुख्य सूत्र नजर आता है। वह है प्यार और उससे पैदा हुई वफादारी। यही भावना उनके जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर उनका सहारा बनी।
इंदिरा गांधी के साथ गहरा था रिश्ता
भारत आने के बाद सोनिया गांधी का अपनी सास और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ गहरा पारिवारिक रिश्ता बना। उन्होंने बताया कि बच्चों के पालन-पोषण के वर्षों में उनका परिवार ही उनके जीवन का केंद्र रहा। इंदिरा गांधी के साथ उनके रिश्ते में केवल पारिवारिक जुड़ाव ही नहीं, बल्कि आपसी समझ और विश्वास भी महत्वपूर्ण रहे। सोनिया ने अपनी पुस्तक में इस पारिवारिक जीवन और उससे जुड़ी यादों को जगह दी है। उनके लिए भारत धीरे-धीरे केवल एक नया देश नहीं रहा, बल्कि ऐसा घर बन गया, जहां उन्हें अपनेपन का एहसास हुआ।
इंदिरा गांधी और राजीव गांधी को खोने का दर्द
सोनिया गांधी ने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर का भी जिक्र किया है। उन्होंने पहले अपनी सास इंदिरा गांधी और फिर अपने पति राजीव गांधी को हिंसक घटनाओं में खो दिया। यह उनके जीवन के ऐसे हादसे थे, जिनसे उबरना आसान नहीं था। सोनिया ने लिखा कि इन असहनीय दुखों के बावजूद परिवार के प्रति प्रेम और भारत से उनका जुड़ाव उन्हें आगे बढ़ने की ताकत देता रहा। उन्होंने अपने लेख में इस बात पर जोर दिया कि पति और भारत के प्रति उनका प्रेम ही मुश्किल समय में उनका सबसे बड़ा संबल बना।
भारत के प्रति प्रेम ने सार्वजनिक जीवन में आने की ताकत दी
सोनिया गांधी ने कहा कि भारत वह देश है, जहां उन्हें वास्तव में अपनेपन का एहसास हुआ। भारत के प्रति उनका जुड़ाव समय के साथ और गहरा होता गया।उन्होंने बताया कि इसी भावना और कर्तव्यबोध ने उन्हें सार्वजनिक जीवन में आने के लिए प्रेरित किया, जबकि राजनीति में सक्रिय होना उनकी मूल इच्छा नहीं थी। सोनिया गांधी ने भारत में पांच दशक से अधिक समय बिताए हैं। इस दौरान उन्होंने देश को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से बदलते हुए देखा है। उन्होंने अपने लेख में कहा कि शुरुआत में उन्होंने भारत में हो रहे बदलावों को एक तरह से हाशिये से देखा, लेकिन बाद के वर्षों में वह देश की राजनीतिक और सार्वजनिक गतिविधियों के केंद्र में आ गईं।
पांच दशक की भारत यात्रा का व्यक्तिगत वृत्तांत
सोनिया गांधी के मुताबिक, उनकी यह पुस्तक केवल उनके परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि भारत के साथ उनके रिश्ते और देश में आए बदलावों का भी व्यक्तिगत वृत्तांत है। उन्होंने एक ऐसे देश में अपनी जिंदगी बिताई, जिसे उन्होंने धीरे-धीरे अपना घर माना। इस दौरान परिवार, रिश्ते, राजनीतिक परिस्थितियां, व्यक्तिगत दुख और सार्वजनिक जिम्मेदारियां उनकी जीवन यात्रा का हिस्सा बने। ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ के जरिए सोनिया गांधी ने अपनी जिंदगी के इन्हीं अनुभवों को पाठकों के सामने रखने की कोशिश की है।
क्यों चर्चा में है सोनिया गांधी की आत्मकथा?
सोनिया गांधी लंबे समय से भारतीय राजनीति के सबसे चर्चित चेहरों में रही हैं। राजीव गांधी से विवाह के बाद भारत आना, इंदिरा गांधी के परिवार का हिस्सा बनना, व्यक्तिगत त्रासदियों का सामना करना और बाद में कांग्रेस की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना उनकी जिंदगी के बड़े पड़ाव रहे हैं। ऐसे में उनकी आत्मकथा से पाठकों को उनके निजी जीवन, पारिवारिक संबंधों और भारत के साथ उनके भावनात्मक जुड़ाव को समझने का अवसर मिलेगा।
सोनिया गांधी ने साफ किया है कि इस किताब का मकसद राजनीतिक घटनाओं का विश्लेषण करना नहीं, बल्कि उन लोगों और रिश्तों की कहानी बताना है, जिन्होंने उनकी जिंदगी को आकार दिया। उनके शब्दों में, जीवन को पीछे मुड़कर देखने पर प्यार और उससे पैदा हुई वफादारी ही सबसे मजबूत धागे के रूप में नजर आती है। यही उनकी पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ का मूल भाव भी है।