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Highlights:

  •  IIT (ISM) धनबाद के शोध दल को बैटरी सुरक्षा तकनीक के लिए पेटेंट
  • भारत सरकार ने पेटेंट संख्या 608403 प्रदान की, 4 नवंबर 2026 को मिली पेटेंट की मंजूरी 
  • लिथियम आयन बैटरी की गर्मी नियंत्रित करने के लिए नई तकनीक विकसित 
  • एल्यूमिनियम और हवा के संयुक्त इस्तेमाल से होगा ताप प्रबंधन

धनबाद (Threesocieties.com Desk): इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरियों को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और बेहतर प्रदर्शन वाला बनाने की दिशा में IIT (ISM) धनबाद के शोधकर्ताओं ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के शोध दल ने लिथियम आयन बैटरियों के तापमान को नियंत्रित करने के लिए एक नई तकनीक विकसित की है। भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इस तकनीक को पेटेंट प्रदान किया है। यह आविष्कार इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों के अत्यधिक गर्म होने, तापमान में असमानता और उससे पैदा होने वाले सुरक्षा जोखिमों को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

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इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें गर्मी को नियंत्रित करने के लिए चालन (Conduction) और संवहन (Convection) दोनों प्रक्रियाओं का संयुक्त इस्तेमाल किया गया है। विशेष रूप से डिजाइन किए गए एल्यूमिनियम के हिस्सों और हवा के प्रवाह की मदद से बैटरी के भीतर पैदा होने वाली गर्मी को बाहर निकाला जाता है। इससे बैटरी के अलग-अलग खंडों का तापमान लगभग समान बनाए रखने में मदद मिलती है।

पेटेंट संख्या 608403, 4 नवंबर 2026 को मिली मंजूरी

IIT (ISM) धनबाद की ओर से विकसित इस आविष्कार का नाम ‘चालन और संवहन के संयुक्त उपयोग से लिथियम आयन बैटरी समूह के लिए वायु आधारित ताप प्रबंधन प्रणाली’ है।भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इसे पेटेंट संख्या 608403 प्रदान की है। इस पेटेंट के लिए आवेदन 10 जून 2024 को किया गया था। लंबी प्रक्रिया के बाद 4 नवंबर 2026 को इस तकनीक को पेटेंट की मंजूरी मिली। इस शोध दल में शोधार्थी राम बाबू गुप्ता, देवेश कुमार, राहुल रंजन और यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. तन्मय दत्ता शामिल हैं। टीम ने लिथियम आयन बैटरियों की ताप प्रबंधन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण समस्या का समाधान विकसित करने की दिशा में काम किया है।

क्यों जरूरी है बैटरियों का तापमान नियंत्रित करना?

इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम आयन बैटरियां ऊर्जा भंडारण का प्रमुख माध्यम हैं। इन बैटरियों का इस्तेमाल वाहन को चलाने के लिए किया जाता है। बैटरी चार्ज होने और डिस्चार्ज होने यानी ऊर्जा देने के दौरान गर्मी पैदा होती है। यदि इस गर्मी को समय पर बाहर नहीं निकाला जाए तो बैटरी का तापमान बढ़ सकता है। इसके अलावा बैटरी पैक के अलग-अलग सेल या खंडों का तापमान भी एक जैसा नहीं रहता। तापमान में इस तरह का अंतर बैटरी के प्रदर्शन, कार्यक्षमता और जीवनकाल को प्रभावित कर सकता है।अत्यधिक गर्मी की स्थिति में बैटरी के खराब होने और गंभीर परिस्थितियों में आग लगने जैसी दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ सकता है। यही वजह है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में बैटरी थर्मल मैनेजमेंट यानी ताप प्रबंधन को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

एल्यूमिनियम और हवा से निकलेगी बैटरी की गर्मी

शोध दल ने इस समस्या के समाधान के लिए गर्मी को बाहर निकालने की दो अलग-अलग प्रक्रियाओं को एक साथ जोड़ा है। इस तकनीक में विशेष रूप से लगाए गए एल्यूमिनियम के हिस्से बैटरी से पैदा होने वाली गर्मी को अपने भीतर अवशोषित करते हैं। इसके बाद हवा के प्रवाह की मदद से इस गर्मी को बैटरी समूह से बाहर निकाल दिया जाता है।इस पूरी प्रक्रिया में चालन और संवहन दोनों का इस्तेमाल होता है।

तकनीक के प्रमुख फायदे:

बैटरी के भीतर पैदा होने वाली गर्मी को प्रभावी तरीके से बाहर निकालने में मदद।

बैटरी का अधिकतम तापमान नियंत्रित रखने की क्षमता।

बैटरी के अलग-अलग खंडों के तापमान में अंतर कम करने में मदद।

बैटरी की कार्यक्षमता और विश्वसनीयता बेहतर बनाने की संभावना।

सरल बनावट के कारण निर्माण में आसानी।

कम लागत, हल्की और छोटी व्यवस्था विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।

कम लागत और आसान निर्माण पर जोर

इस आविष्कार की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी सरल बनावट है। शोध दल ने ऐसी व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया है, जिसे कम खर्च में तैयार किया जा सके और जिसका वजन तथा आकार भी कम हो। इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी पैक का वजन, आकार और सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में बैटरी को ठंडा रखने वाली तकनीक का हल्का, छोटा और किफायती होना इसके व्यावहारिक इस्तेमाल की संभावनाओं को बढ़ा सकता है। इसके अलावा ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में भी ऐसी तकनीक उपयोगी हो सकती है, जहां बड़ी संख्या में लिथियम आयन बैटरियों का इस्तेमाल किया जाता है।

राम बाबू गुप्ता बोले- सुरक्षित बैटरी व्यवस्था विकसित करना जरूरी

इस उपलब्धि पर शोध दल के प्रमुख सदस्य राम बाबू गुप्ता ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में बैटरियों की सुरक्षा और उनकी कार्यक्षमता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, "हमारा प्रयास एक ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जो बैटरी की गर्मी को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के साथ ही कम खर्चीली, हल्की, छोटी और बनाने में आसान हो। हमें उम्मीद है कि यह तकनीक भविष्य में अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बैटरी व्यवस्था विकसित करने में उपयोगी साबित होगी।"

इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह आविष्कार?

देश और दुनिया में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने के साथ ही बैटरी तकनीक को बेहतर बनाना एक बड़ी चुनौती है। बैटरी की सुरक्षा, चार्जिंग क्षमता, जीवनकाल और तापमान नियंत्रण जैसे पहलुओं पर लगातार शोध किया जा रहा है। IIT (ISM) धनबाद की यह तकनीक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण शोध उपलब्धि है। बैटरी के तापमान को नियंत्रित रखने और उसके विभिन्न खंडों में तापमान का अंतर कम करने की क्षमता भविष्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी प्रणाली को अधिक भरोसेमंद बनाने में मदद कर सकती है।

इस पेटेंट से संस्थान के शोध और नवाचार की क्षमता को भी नई पहचान मिली है। हालांकि, इस तकनीक के बड़े स्तर पर व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए आगे परीक्षण और औद्योगिक स्तर पर इसके अनुप्रयोग की जरूरत होगी। कुल मिलाकर, IIT (ISM) धनबाद के शोध दल का यह आविष्कार इलेक्ट्रिक वाहन और ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में बैटरी सुरक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।