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Highlights: 

  • धनतेरस पर हस्त नक्षत्र और वैधृति योग का शुभ संयोग
  • सुबह 11:06 बजे से त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ, देर रात तक खरीदारी के अवसर 
  • मेष से मीन तक 12 राशियों के लिए खरीदारी की अलग-अलग शुभ वस्तुएं 
  • सोना, चांदी, पीतल के बर्तन, झाड़ू और धनिया खरीदने की परंपरा

पटना (Threesocieties.com Desk) : दीपोत्सव का शुभारंभ शुक्रवार को धनतेरस के साथ होगा। इस बार धनतेरस पर हस्त नक्षत्र और वैधृति योग का विशेष संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन सोना, चांदी, पीतल, तांबा, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी करना बेहद मंगलकारी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि, धन-वैभव और खुशहाली लेकर आती हैं।

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धनतेरस पर हर साल बाजारों में रौनक देखने को मिलती है। सोने-चांदी के आभूषणों से लेकर पीतल के बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन और घरेलू उपयोग की वस्तुओं तक की खरीदारी की जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार हर राशि के लिए खरीदारी की शुभ वस्तुएं अलग-अलग हो सकती हैं?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मेष राशि के जातकों के लिए चांदी या तांबे के बर्तन शुभ माने गए हैं, जबकि मिथुन, सिंह, वृश्चिक और धनु राशि के जातकों के लिए सोने के आभूषण खरीदना अच्छा माना जाता है। वहीं वृष, कर्क और मीन राशि के जातकों के लिए चांदी तथा पीतल की वस्तुओं की खरीदारी शुभ बताई गई है। इसलिए यदि आप भी धनतेरस पर खरीदारी की योजना बना रहे हैं तो अपनी राशि के अनुसार शुभ वस्तुओं की जानकारी जरूर जान लें। साथ ही जानिए खरीदारी के शुभ मुहूर्त, मां लक्ष्मी-गणेश की पूजा का महत्व और अकाल मृत्यु से बचाव के लिए किए जाने वाले यम दीपदान की परंपरा।

हस्त नक्षत्र और शुभ योग में मनेगा धनतेरस का पर्व

धनतेरस का पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इसे धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है। दीपावली से दो दिन पहले आने वाले इस त्योहार के साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत होती है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन को आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। 

इस बार धनतेरस पर हस्त नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ अमृत सिद्धि योग और प्रीति योग का भी उल्लेख किया गया है। शुक्रवार को शुक्र प्रदोष होने से इस पर्व का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। त्रयोदशी तिथि सुबह 11:06 बजे से प्रारंभ होकर पूरे दिन रहेगी। इस कारण श्रद्धालुओं को खरीदारी के लिए सुबह से लेकर देर रात तक कई शुभ मुहूर्त मिलेंगे।

धनतेरस पर राशि के अनुसार क्या खरीदें? जानिए मेष से मीन तक की पूरी लिस्ट

धनतेरस पर खरीदारी को लेकर ज्योतिष में राशि के अनुसार भी कुछ वस्तुओं को शुभ माना गया है। मान्यता है कि अपनी राशि के अनुकूल धातु और वस्तुओं की खरीदारी करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता आती है। हालांकि ये ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताएं हैं। इन्हें आस्था के रूप में देखा जाना चाहिए।

1. मेष राशि

मेष राशि के जातकों के लिए चांदी या तांबे के बर्तन खरीदना शुभ माना गया है। ये वस्तुएं घर में सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती हैं।

2. वृषभ राशि

वृषभ राशि के जातक चांदी या तांबे के बर्तन, वस्त्र और कलश खरीद सकते हैं। इन वस्तुओं को सुख-सुविधा और ऐश्वर्य से जोड़कर देखा जाता है।

3. मिथुन राशि

मिथुन राशि के जातकों के लिए सोने के आभूषण और घरेलू उपयोग की सामग्री खरीदना शुभ माना गया है।

4. कर्क राशि

कर्क राशि के जातकों के लिए चांदी के आभूषण और पीतल के बर्तन खरीदना शुभ बताया गया है।

5. सिंह राशि

सिंह राशि के जातक तांबे के बर्तन, पीतल के कलश, वस्त्र और सोने के आभूषण खरीद सकते हैं।

6. कन्या राशि

कन्या राशि के लिए भगवान गणेश की मूर्ति, सोने या चांदी के आभूषण और पीतल का कलश खरीदना शुभ माना गया है।

7. तुला राशि

तुला राशि के जातकों के लिए वस्त्र, सौंदर्य प्रसाधन, चांदी और पीतल के बर्तन खरीदना शुभ बताया गया है।

8. वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातक सोने के आभूषण, बर्तन, तांबे या मिट्टी के पात्र खरीद सकते हैं।

9. धनु राशि

धनु राशि के लिए सोने के आभूषण और तांबे या पीतल के बर्तन खरीदना शुभ माना गया है।

10. मकर राशि

मकर राशि के जातकों के लिए वस्त्र और चांदी के बर्तन या आभूषण खरीदना शुभ बताया गया है।

11. कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातक सौंदर्य प्रसाधन, सोना और तांबे के पात्र खरीद सकते हैं।

12. मीन राशि

मीन राशि के जातकों के लिए सोने के आभूषण, चांदी या पीतल के बर्तन खरीदना शुभ माना गया है।

धनतेरस पर सोना-चांदी खरीदने का क्या है महत्व?

धनतेरस पर सोना और चांदी खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई धातुएं घर में स्थायी संपत्ति, धन और समृद्धि का प्रतीक होती हैं। सोने को मां लक्ष्मी और वैभव से जोड़कर देखा जाता है, जबकि चांदी को शीतलता, शुद्धता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। पीतल के बर्तन भी धनतेरस पर खरीदने के लिए विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। भगवान धन्वंतरि के हाथों में अमृत कलश होने की मान्यता के कारण इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा प्रचलित हुई। धनतेरस पर लोग केवल महंगी वस्तुएं ही नहीं खरीदते, बल्कि अपनी क्षमता और जरूरत के अनुसार छोटी-छोटी शुभ वस्तुएं भी घर लाते हैं।

धनतेरस पर झाड़ू, धनिया और कौड़ी खरीदने की भी परंपरा

धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की परंपरा भी काफी लोकप्रिय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। इसे खरीदने से घर की दरिद्रता दूर होने और सुख-समृद्धि आने की मान्यता है। इसके अलावा धनिया, कौड़ी, कमलगट्टा और पंचरत्न खरीदने की भी परंपरा है। धनिया को समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। कई परिवारों में धनतेरस के दिन धनिया के बीज खरीदकर दीपावली पर पूजा में इस्तेमाल किए जाते हैं। इस दिन लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा खरीदने का भी विशेष महत्व है। दीपावली की पूजा में नई प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा कई घरों में निभाई जाती है।

धनतेरस पर खरीदारी के शुभ मुहूर्त: सुबह से देर रात तक मिलेगा अवसर

ज्योतिषाचार्य  के अनुसार इस बार धनतेरस पर दिनभर खरीदारी के कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार खरीदारी कर सकते हैं।

मुहूर्त                              समय

त्रयोदशी तिथि    सुबह 11:06 बजे से
अभिजित मुहूर्त    सुबह 11:12 से 11:57 बजे
शुभ योग मुहूर्त    सुबह 11:11 से 11:55 बजे
चर मुहूर्त    दोपहर 03:41 से शाम 05:04 बजे
प्रदोषकाल    शाम 05:04 से रात 07:48 बजे
स्थिर वृष लग्न    शाम 05:45 से रात 07:42 बजे
स्थिर लाभ मुहूर्त    रात 08:19 से 09:56 बजे
कर्क लग्न    रात 09:33 से 12:04 बजे
सिंह लग्न    रात 12:04 से 02:19 बजे

नोट: मुहूर्त का समय उपलब्ध कराई गई ज्योतिषीय जानकारी पर आधारित है। स्थान के अनुसार पंचांग और स्थानीय समय में अंतर हो सकता है।

धनतेरस पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और धन्वंतरि की पूजा का महत्व

धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। मां लक्ष्मी को धन और वैभव की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश विघ्नों को दूर करने वाले देवता हैं। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उनकी पूजा करने से परिवार में उत्तम स्वास्थ्य और निरोगी जीवन का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन घर की साफ-सफाई कर पूजा स्थल को सजाया जाता है। शाम के समय दीप जलाकर भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना की जाती है।

अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए करें यम दीपदान

धनतेरस पर यम दीपदान की परंपरा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन यमराज के निमित्त दीप जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। शुक्र प्रदोष के संयोग में शाम के प्रदोषकाल के दौरान घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तिल के तेल का दीपक जलाया जाता है। इसे यमराज को समर्पित किया जाता है। मान्यता है कि यम दीपदान करने से परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। इसके साथ ही पंच देव के निमित्त पांच दीपक जलाने की भी परंपरा है। संध्या के समय घर के मुख्य द्वार पर दीप जलाकर परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है।

गुरु और शुक्र ग्रह से भी जुड़ा है धनतेरस का पर्व

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार धनतेरस का संबंध गुरु और शुक्र ग्रह से भी माना जाता है। गुरु ग्रह को ज्ञान, आयु, आरोग्य और शुभता का कारक माना जाता है। वहीं शुक्र ग्रह धन, वैभव, ऐश्वर्य, सुख-सुविधा और भौतिक संपन्नता का प्रतिनिधित्व करता है। धनतेरस पर सोना, चांदी और पीतल जैसी धातुओं की खरीदारी को शुक्र ग्रह की अनुकूलता से जोड़कर देखा जाता है। वहीं हल्दी और पीली वस्तुओं का दान गुरु ग्रह से संबंधित शुभ कार्यों में शामिल माना जाता है। इसी कारण इस दिन खरीदारी के साथ दान-पुण्य और दीपदान करने की परंपरा भी निभाई जाती है।

धनतेरस पर खरीदारी करते समय इन बातों का रखें ध्यान

धनतेरस पर खरीदारी को लेकर लोगों में खासा उत्साह रहता है। ऐसे में कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है।

1. सोना-चांदी खरीदते समय हॉलमार्क और शुद्धता की जांच करें।
2. आभूषण खरीदने से पहले मेकिंग चार्ज और बिल की जानकारी लें।
3. पीतल और तांबे के बर्तन खरीदते समय उनकी गुणवत्ता जांचें।
4. इलेक्ट्रॉनिक सामान और वाहन खरीदते समय वारंटी तथा जरूरी दस्तावेज देखें।
5. खरीदारी अपनी जरूरत और बजट के अनुसार करें।
6. धार्मिक मान्यताओं के नाम पर अनावश्यक खर्च से बचें।

धनतेरस का संदेश केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है। यह पर्व धन, स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना का प्रतीक है। अपनी राशि के अनुसार शुभ वस्तुओं की खरीदारी के साथ मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और भगवान धन्वंतरि की आराधना कर इस पर्व को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाएं।