Highlights:
- UGC Rules 2026 की समीक्षा के लिए समिति बनाने पर विचार कर रही केंद्र सरकार
- छात्रों की चिंताओं और आशंकाओं को दूर करना सरकार का लक्ष्य
- CJI सूर्य कांत ने सभी छात्रों के हितों की रक्षा पर दिया जोर
- UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही लगा चुका है रोक
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर चल रहे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा संकेत दिया है। केंद्र सरकार ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह 'यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) रेगुलेशंस, 2026' की समीक्षा के लिए एक समिति गठित करने पर विचार कर रही है।
सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी ऐसे समय दी गई है, जब UGC के नए नियमों को लेकर छात्रों और विभिन्न वर्गों की ओर से चिंताएं जताई गई हैं। कोर्ट ने इस साल की शुरुआत में इन नियमों पर रोक लगा दी थी। अब केंद्र सरकार इन नियमों की समीक्षा कर सभी पक्षों की आशंकाओं और चिंताओं को दूर करने की दिशा में विचार कर रही है।
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सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ को बताया कि सरकार इस पूरे मामले की जांच कर रही है। तुषार मेहता ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि छात्रों की चिंताओं का समाधान हो और किसी भी वर्ग को असंतुष्ट या आशंकित महसूस न करना पड़े। इसी उद्देश्य से UGC रेगुलेशंस 2026 की समीक्षा के लिए समिति बनाने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। केंद्र के इस रुख से संकेत मिलता है कि सरकार नियमों के विभिन्न पहलुओं पर दोबारा विचार करने और उनसे जुड़े मुद्दों का समाधान निकालने के पक्ष में है।
CJI ने सभी छात्रों के हितों की रक्षा पर दिया जोर
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने सभी छात्रों के हितों की रक्षा किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में छात्रों से जुड़े सभी पक्षों और उनकी चिंताओं को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट में UGC के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। केंद्र सरकार की ओर से समिति बनाने पर विचार किए जाने की जानकारी दिए जाने के बाद अदालत ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी।
क्या है UGC इक्विटी रेगुलेशंस 2026?
UGC इक्विटी रेगुलेशंस 2026 का पूरा नाम 'यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (Promotion of Equity in Higher Educational Institutions) Regulations, 2026' है। इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना और भेदभाव से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए व्यवस्था को मजबूत करना है। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में समान अवसर, समावेशी वातावरण और शिकायतों के निवारण जैसे मुद्दे इन नियमों के केंद्र में हैं।हालांकि, इन नियमों के कुछ प्रावधानों और उनके संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठे हैं। इसी वजह से मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अदालत ने इस साल की शुरुआत में इन नियमों पर रोक लगा दी थी।
यह है मामला
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यूजीसी ने विचार विमर्श कर जनवरी 2026 में समता नियम अधिसूचित किये थे। इन नियमों ने 2012 के नियमों का स्थान लिया था। जिसमें एससी एसटी के साथ ओबीसी को भी जोड़ा गया था। नए नियमों के खिलाफ सामान्य वर्गों में नाराजगी थी और इसे भेदभाव वाला नियम बताया गया था क्योंकि इसमें सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए प्रताड़ना से बचने का नियम नहीं था। सुप्रीम कोर्ट का भी ऐसा ही मानना था और उसके बाद इसपर रोक लगा दी थी। अदालत ने प्रथमदृष्टया इन्हें अस्पष्ट और दुरुपयोग की आशंका वाला बताया था। साथ ही निर्देश दिया था कि अंतरिम अवधि में 2012 के नियम लागू रहेंगे।