Highlights:
- 6 नवंबर शुक्रवार को धनतेरस के साथ दीपोत्सव की शुरुआत
- 8 नवंबर रविवार को मनाई जाएगी दीपावली
- 10 नवंबर को भैया दूज और 11 नवंबर को चित्रगुप्त पूजा
- 13 नवंबर से नहाय-खाय के साथ शुरू होगा छठ महापर्व
पटना (Threesocieties.com Desk): शुक्रवार 6 नवंबर को धनतेरस के साथ ही दीपोत्सव का शंखनाद होगा। इसके बाद दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज और चित्रगुप्त पूजा सहित कई प्रमुख पर्व मनाए जाएंगे। वहीं, 13 नवंबर से लोक आस्था के महापर्व छठ की शुरुआत होगी। 15 नवंबर को अस्ताचलगामी सूर्य को पहला और 16 नवंबर को उदीयमान सूर्य को दूसरा अर्घ्य दिया जाएगा। धनतेरस से लेकर छठ महापर्व तक बिहार सहित पूरे देश में उत्सव और उल्लास का माहौल रहेगा।
त्योहारों के इस मौसम में घरों, प्रतिष्ठानों और सार्वजनिक स्थलों की साफ-सफाई का विशेष महत्व है। दीपावली में जहां घरों और दुकानों की साफ-सफाई कर दीप जलाए जाते हैं, वहीं छठ महापर्व में घाटों, रास्तों और आसपास के क्षेत्रों की स्वच्छता एवं पवित्रता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। दीपावली और छठ को लेकर प्रशासनिक तैयारियां भी शुरू हो गई हैं।
के अनुसार, दीपोत्सव सामान्यतः पांच दिनों का पर्व माना जाता है। हालांकि, इस वर्ष कायस्थ समाज छठे दिन यानी 11 नवंबर को चित्रगुप्त पूजा मनाएगा। धनतेरस अथवा धनत्रयोदशी से शुरू होने वाला यह पर्व भैया दूज और चित्रगुप्त पूजा के साथ संपन्न होगा।
और भी पढ़ें
- Bihar : सीएम सम्राट चौधरी से मिलीं अक्षरा सिंह, फिर अनंत सिंह के घर पहुंचीं
- धनतेरस पर राशि के अनुसार करें खरीदारी, जानें किसके लिए सोना, चांदी या पीतल है शुभ
- UGC के नए नियमों पर समीक्षा के लिए बनेगी कमेटी, केंद्र सरकार ने SC को दी जानकारी
- हॉकी एशियन चैंपियंस ट्रॉफी: जापान को 4-1 से हराकर भारत ने छठी बार जीता खिताब भी!
भगवान राम की अयोध्या वापसी से जुड़ी है दीपावली की परंपरा
दीपोत्सव का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व सनातन धर्म के साथ-साथ जैन और बौद्ध धर्म में भी है। सनातन परंपरा के अनुसार, भगवान श्रीराम रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद जब माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे, तब अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी खुशी में दीपावली मनाने की परंपरा शुरू हुई। जैन धर्मावलंबियों के लिए भी दीपावली का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान महावीर के निर्वाण की स्मृति में दीप जलाए जाते हैं। वहीं, बौद्ध परंपरा में भगवान बुद्ध के लंबे समय बाद कपिलवस्तु लौटने की खुशी में प्रकाश पर्व मनाने की मान्यता जुड़ी हुई है।
धनतेरस से शुरू होगा पांच दिवसीय दीपोत्सव
कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस मनाया जाता है। इस दिन आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि, धन के देवता कुबेर और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन को धन्वंतरि जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। पंडितों ने बताया कि इस वर्ष 6 नवंबर शुक्रवार को दिन में 11:07 बजे त्रयोदशी तिथि का आगमन हो रहा है, जो 7 नवंबर को दिन में 10:44 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि मिलने के कारण धनतेरस 6 नवंबर को मनाई जाएगी।
धनतेरस के बाद नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन हनुमान जी के जन्मोत्सव की पूजा और मृत्यु के देवता यमराज के निमित्त दीपदान की परंपरा है। घर के बाहर यम के नाम से दीप जलाया जाता है। इसे यमदीपदान भी कहा जाता है।
8 नवंबर को दीपावली, 9 को गोवर्धन पूजा
इस वर्ष 8 नवंबर रविवार को दीपावली मनाई जाएगी। दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। व्यापारी वर्ग इस दिन अपने प्रतिष्ठानों में पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और कारोबार में उन्नति की कामना करता है। 9 नवंबर सोमवार को सोमवती अमावस्या के साथ अन्नकूट और गोवर्धन पूजा मनाई जाएगी। गोवर्धन पूजा में भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है। इसके अगले दिन 10 नवंबर मंगलवार को भैया दूज का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस वर्ष 11 नवंबर बुधवार को कायस्थ समाज की ओर से भगवान चित्रगुप्त की पूजा की जाएगी। भगवान चित्रगुप्त को लेखा-जोखा और कर्मों का हिसाब रखने वाला देवता माना जाता है।
13 नवंबर से शुरू होगा छठ महापर्व
दीपोत्सव के बाद लोक आस्था के महापर्व छठ की तैयारियां तेज होंगी। 13 नवंबर शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत होगी। 14 नवंबर शनिवार को खरना मनाया जाएगा। 15 नवंबर रविवार को व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देंगे, जबकि 16 नवंबर सोमवार को उदीयमान सूर्य को दूसरा अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। इसके साथ ही छठ महापर्व का समापन होगा। छठ महापर्व में स्वच्छता, पवित्रता, अनुशासन और प्रकृति के प्रति आस्था का विशेष महत्व है। व्रती कठिन नियमों का पालन करते हुए भगवान सूर्य और छठी मैया की आराधना करते हैं। इस पर्व में नदी, तालाब और अन्य जलाशयों के घाटों की सफाई के साथ सामूहिक भागीदारी देखने को मिलती है।
जानिए किस दिन कौन-सा त्योहार मनाया जाएगा?
6 नवंबर, शुक्रवार: धनतेरस और धन्वंतरि जयंती।
7 नवंबर, शनिवार: हनुमत जन्मोत्सव और नरक चतुर्दशी।
8 नवंबर, रविवार: दीपावली।
9 नवंबर, सोमवार: सोमवती अमावस्या, अन्नकूट और गोवर्धन पूजा।
10 नवंबर, मंगलवार: भैया दूज।
11 नवंबर, बुधवार: चित्रगुप्त पूजा।
13 नवंबर, शुक्रवार: छठ महापर्व की शुरुआत, नहाय-खाय।
14 नवंबर, शनिवार: खरना।
15 नवंबर, रविवार: छठ का पहला अर्घ्य।
16 नवंबर, सोमवार: छठ का दूसरा अर्घ्य और महापर्व का समापन।
18 नवंबर, बुधवार: अक्षय नवमी।
20 नवंबर, शुक्रवार: प्रबोधिनी एकादशी और चातुर्मास की समाप्ति।
24 नवंबर, मंगलवार: कार्तिक पूर्णिमा और देव दीपावली।
धनतेरस पर कब करें पूजा? जानिए शुभ मुहूर्त
पंडितों के अनुसार, धनतेरस पर पूजा के लिए प्रदोष काल में स्थिर वृष लग्न का मुहूर्त सबसे उत्तम रहेगा।
धनतेरस के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
कुंभ लग्न: दोपहर 1:23 बजे से 2:54 बजे तक।
वृष लग्न: शाम 5:49 बजे से 7:44 बजे तक।
सिंह लग्न: रात्रि 12:27 बजे से 2:41 बजे तक।
इनमें प्रदोष काल का स्थिर वृष लग्न धनतेरस की पूजा के लिए विशेष शुभ माना गया है।
दीपावली पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
दीपावली के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के लिए भी अलग-अलग लग्न बताए गए हैं। पंडित विवेकानंद पांडेय के अनुसार, व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में पूजा के लिए स्थिर कुंभ लग्न और गृहस्थों के लिए प्रदोष काल का स्थिर वृष लग्न विशेष शुभ रहेगा।
दीपावली के प्रमुख शुभ मुहूर्त:
कुंभ लग्न: दोपहर 1:20 बजे से 2:51 बजे तक। व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में पूजा के लिए शुभ।
वृष लग्न: शाम 5:56 बजे से 7:52 बजे तक। प्रदोष काल में लक्ष्मी-गणेश पूजा के लिए सर्वोत्तम।
सिंह लग्न: रात्रि 12:24 बजे से 2:38 बजे तक। महानिशा काल में तांत्रिक पूजा और मंत्र सिद्धि के लिए विशेष।
पंडितों ने बताया कि श्रद्धालु अपनी परंपरा और पूजा विधान के अनुसार शुभ लग्न में पूजा-अर्चना कर सकते हैं। दीपोत्सव का यह पर्व केवल दीप जलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वच्छता, समृद्धि, सद्भाव, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकता का भी संदेश देता है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई ज्योतिषीय जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। ग्रहों के गोचर का व्यक्तिगत जीवन, धन, प्रेम और रिश्तों पर प्रभाव वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है। इसे अंतिम सत्य या निश्चित भविष्यवाणी न मानें। किसी भी महत्वपूर्ण आर्थिक, वैवाहिक या व्यक्तिगत फैसले के लिए अपने विवेक का इस्तेमाल करें। Threesocieties.com अंधविश्वास के खिलाफ है।