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Highlights:

  • महाराष्ट्र ATS ने ठाणे जिले से माओवादी जोनल कमांडर संजय यादव उर्फ गोदराम को पकड़ा
  • झारखंड सरकार ने 10 लाख और बिहार सरकार ने तीन लाख रुपये का इनाम घोषित किया था
  • पलामू, औरंगाबाद और गया में हत्या, गोलीबारी, विस्फोट और लेवी वसूली समेत 53 मामले दर्ज
  • 2019 से 2025 तक कई बड़ी नक्सली घटनाओं में रहा है आरोपी

रांची (Threesocieties.com Desk): झारखंड और बिहार में लंबे समय से पुलिस के लिए चुनौती बने 13 लाख रुपये के इनामी माओवादी संजय यादव उर्फ गोदराम को महाराष्ट्र में गिरफ्तार कर लिया गया है। महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) ने ठाणे जिले में कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के इस वांछित सदस्य को पकड़ा है। संजय यादव माओवादी संगठन का जोनल कमेटी सदस्य (ZCM) बताया जा रहा है।

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झारखंड पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर महाराष्ट्र ATS ने यह कार्रवाई की। संजय यादव पर झारखंड सरकार ने 10 लाख रुपये और बिहार सरकार ने तीन लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। इस तरह दोनों राज्यों की ओर से उस पर कुल 13 लाख रुपये का इनाम था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, संजय यादव झारखंड और बिहार में दर्ज कुल 53 आपराधिक मामलों में वांछित था। उसकी गिरफ्तारी को झारखंड और बिहार में सक्रिय माओवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

पलामू के छतरपुर का रहने वाला है संजय यादव

गिरफ्तार माओवादी संजय यादव उर्फ गोदराम मूल रूप से झारखंड के पलामू जिले का रहने वाला है। उसका गांव छतरपुर थाना क्षेत्र के देवगन (तिलहड़वा) में है। वह लंबे समय से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था और झारखंड-बिहार के सीमावर्ती इलाकों में संगठन की गतिविधियों में सक्रिय बताया जाता है। पुलिस के अनुसार, वह प्रतिबंधित CPI (माओवादी) संगठन में जोनल कमेटी सदस्य के रूप में काम कर रहा था। उसके खिलाफ कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, पुलिस बल पर हमला, लेवी वसूली, विस्फोट, आगजनी तथा अवैध हथियार और विस्फोटक रखने जैसे आरोप शामिल हैं।

53 मामलों में था वांछित, पलामू में सबसे ज्यादा केस

संजय यादव के खिलाफ दर्ज मामलों का ब्योरा इस प्रकार है:

पलामू (झारखंड): 23 मामले

औरंगाबाद (बिहार): 20 मामले

गया (बिहार): 10 मामले

इस तरह झारखंड और बिहार के तीन जिलों में उसके खिलाफ कुल 53 मामले दर्ज हैं। इन मामलों में कई बड़ी नक्सली घटनाओं में उसकी कथित भूमिका की जांच की गई है।

2019 में भाजपा कार्यालय को विस्फोट से उड़ाने का आरोप

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, संजय यादव का नाम 25-26 अप्रैल 2019 की रात पलामू जिले के हरिहरगंज बाजार में हुई बड़ी नक्सली घटना में सामने आया था। इस दौरान हरिहरगंज बाजार स्थित हीरा कॉम्प्लेक्स में बने भाजपा के चुनाव कार्यालय को विस्फोट कर उड़ा दिया गया था। इसी रात तुरी गांव के पास बटाने नदी पर निर्माणाधीन पुल के काम में लगी मशीनों और अस्थायी शेड में भी आग लगा दी गई थी। इस घटना को लेकर हरिहरगंज थाना में कांड संख्या 37/2019 दर्ज किया गया था। इस मामले में संजय यादव को भी आरोपी बनाया गया था।

पीपरा बाजार गोलीकांड में दो लोगों की हुई थी मौत

23 नवंबर 2019 को बिहार के पीपरा बाजार में हुई गोलीबारी की घटना में भी संजय यादव का नाम सामने आया था। इस गोलीबारी में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रखंड अध्यक्ष मोहन कुमार गुप्ता समेत दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि दो अन्य लोग घायल हुए थे। पुलिस ने इस मामले में भी संजय यादव को आरोपी बनाया था। इसके अलावा 2023 में क्रेशर और ईंट-भट्ठा संचालकों से लेवी वसूली तथा सड़क निर्माण कार्य में लगे वाहनों में आगजनी की घटनाओं में भी उसका नाम सामने आया था।

पुलिस को निशाना बनाने के लिए पुलिया के नीचे लगाए थे बम

जुलाई 2023 में पीपरा-छतरपुर मुख्य सड़क पर हारना गांव के पास पुलिस को निशाना बनाने के उद्देश्य से पुलिया के नीचे केन बम और सिलिंडर बम लगाए गए थे। इस मामले में भी संजय यादव आरोपी है। वहीं, फरवरी 2025 में पलामू जिले के हुसैनाबाद स्थित दुधिया जंगल में पुलिस के सर्च अभियान के दौरान जमीन में छिपाकर रखा गया करीब 8 से 9 किलोग्राम का आईईडी बरामद किया गया था। इस घटना में भी उसका नाम सामने आया था।

बरवाही जंगल मुठभेड़ में भी आया था नाम

मई 2025 में पलामू जिले के पांडू थाना क्षेत्र के बरवाही जंगल में पुलिस और माओवादी दस्ते के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस मामले में भी संजय यादव को आरोपी बनाया गया था।लगातार नक्सली घटनाओं में नाम सामने आने और कई राज्यों में वांछित होने के कारण पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। आखिरकार झारखंड पुलिस से मिले इनपुट के आधार पर महाराष्ट्र ATS ने ठाणे में उसे गिरफ्तार कर लिया।

हथियारों के डंप और माओवादी नेटवर्क को लेकर पूछताछ

गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस संजय यादव से माओवादी संगठन के नेटवर्क, हथियारों के ठिकानों और उसके सहयोगियों के संबंध में जानकारी जुटाने में लगी है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ में हथियारों और गोला-बारूद के छिपाए गए डंप के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। इसके साथ ही झारखंड और बिहार में माओवादी संगठन की गतिविधियों, उसके संपर्कों, लेवी वसूली के नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की भूमिका का भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

संजय यादव की गिरफ्तारी को झारखंड और बिहार में माओवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। अब जांच एजेंसियों की नजर पूछताछ में मिलने वाली जानकारियों और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने पर है।