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HighLights:

  • पप्पू सलमान का पूरा नाम सलमान अहमद, प्रयागराज में पप्पू मलावां के नाम से भी पहचान
  • समाजवादी पार्टी से स्थापना काल से जुड़े हैं, गंगापार जिला संगठन में उपाध्यक्ष बताए जाते हैं
  • घोड़ों को पालने और रेस के शौक ने अनंत सिंह और पप्पू सलमान को बनाया दोस्त
  • दोनों की दोस्ती करीब 30 साल पुरानी, एक-दूसरे के पारिवारिक कार्यक्रमों में होते हैं शामिल

प्रयागराज/पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार के मोकामा विधायक और 'छोटे सरकार' के नाम से चर्चित अनंत सिंह की प्रयागराज यात्रा ने एक बार फिर उनकी दोस्ती की चर्चा तेज कर दी है। आखिर ऐसा कौन है, जिसके एक बुलावे पर अनंत सिंह पटना से करीब 400 किलोमीटर दूर प्रयागराज पहुंच गए? यह नाम है पप्पू सलमान। दोनों की दोस्ती कोई नई नहीं, बल्कि करीब तीन दशक पुरानी बताई जाती है।

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पप्पू सलमान के बेटे एहराज के दावत-ए-वलीमा में शामिल होने के लिए अनंत सिंह शुक्रवार को 100 से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ प्रयागराज पहुंचे थे। रास्ते में जगह-जगह उनका भव्य स्वागत हुआ। भोजपुर के बिहिया में जेसीबी से फूल बरसाए गए तो बक्सर में उन्हें चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया गया। लेकिन इस पूरी यात्रा के केंद्र में उनके पुराने दोस्त पप्पू सलमान थे।

कौन हैं पप्पू सलमान, क्या करते हैं?

पप्पू सलमान का पूरा नाम सलमान अहमद है। प्रयागराज में उन्हें पप्पू मलावां के नाम से भी जाना जाता है। वह पेशे से किसान हैं और समाजवादी पार्टी की राजनीति से जुड़े हुए हैं। बताया जाता है कि पप्पू सलमान समाजवादी पार्टी के स्थापना काल से ही पार्टी के साथ जुड़े हैं। संगठन में उन्हें प्रयागराज के गंगापार जिले का उपाध्यक्ष बताया जाता है। वह यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं में गिने जाते हैं। हालांकि, पप्पू सलमान खुद चुनावी राजनीति में सक्रिय उम्मीदवार के रूप में सामने नहीं आए हैं। उनकी पहचान स्थानीय राजनीति, सामाजिक संपर्क और अनंत सिंह से उनकी पुरानी दोस्ती के कारण भी चर्चा में रहती है।

घोड़ों के शौक ने कराई अनंत सिंह और पप्पू सलमान की दोस्ती

अनंत सिंह को घोड़ों का शौक है। उनके अस्तबल में कई घोड़े हैं और घोड़ों की रेस में उनकी दिलचस्पी जगजाहिर रही है। दिलचस्प बात यह है कि उनके दोस्त पप्पू सलमान को भी घोड़े पालने और उनकी रेस का शौक है। बताया जाता है कि इसी साझा शौक ने दोनों को करीब लाया। आरा के जय कुमार सिंह ने पहली बार अनंत सिंह और पप्पू सलमान की मुलाकात कराई थी। इसके बाद घोड़ों की रेस और घोड़ों से जुड़ी गतिविधियों के दौरान दोनों की मुलाकातें बढ़ती गईं और दोस्ती गहरी होती चली गई। उस समय पप्पू सलमान की शादी भी नहीं हुई थी। धीरे-धीरे दोनों का रिश्ता इतना मजबूत हो गया कि करीब तीन दशक बाद भी उनकी दोस्ती उसी तरह कायम है।

पप्पू सलमान के पास भी हैं कई कीमती घोड़े

अनंत सिंह की तरह पप्पू सलमान भी घोड़ों के शौकीन हैं। उनके पास करीब चार घोड़े बताए जाते हैं। इनमें एक घोड़े की कीमत 20 लाख रुपये से अधिक बताई गई है। वहीं, अनंत सिंह के अस्तबल में करीब आठ से नौ घोड़े होने की जानकारी है। उनका चर्चित घोड़ा 'लाडला' यूपी और बिहार में कई रेस जीत चुका है। घोड़ों की रेस का यही साझा शौक दोनों की दोस्ती की सबसे खास कड़ी माना जाता है।

जवाहर पंडित के भी करीबी रहे हैं पप्पू सलमान

प्रयागराज की राजनीति में पप्पू सलमान का जुड़ाव समाजवादी पार्टी के पुराने नेताओं से भी रहा है। वह जवाहर पंडित के करीबी बताए जाते हैं। जवाहर पंडित का असली नाम जवाहर यादव था और वह प्रयागराज की झूंसी विधानसभा सीट से विधायक रहे थे। जवाहर पंडित की हत्या का मामला भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में काफी चर्चित रहा। इस मामले में करवरिया बंधुओं को दोषी ठहराया गया था। जवाहर पंडित और करवरिया परिवार के बीच बालू के कारोबार को लेकर विवाद की बात सामने आई थी। जवाहर पंडित की पत्नी विजमा यादव भी राजनीति में सक्रिय हैं और विधायक रह चुकी हैं। हालांकि, पप्पू सलमान का अनंत सिंह से रिश्ता किसी राजनीतिक गठबंधन या चुनावी समीकरण से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत दोस्ती से जुड़ा बताया जाता है।

एक बुलावे पर 400 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचे अनंत सिंह

पप्पू सलमान के बेटे एहराज का निकाह बहराइच में हुआ था। इसके बाद प्रयागराज में दावत-ए-वलीमा का आयोजन किया गया। इसी समारोह में शामिल होने के लिए अनंत सिंह पटना से प्रयागराज पहुंचे। अनंत सिंह ने अपने मित्र के परिवार के इस खास मौके पर शामिल होने के लिए करीब 400 किलोमीटर की सड़क यात्रा की। रास्ते में समर्थकों के स्वागत कार्यक्रमों के कारण उनका काफिला निर्धारित समय से काफी देर से प्रयागराज पहुंचा। वाराणसी में भी उनके काफिले को पुलिस ने रोक दिया था। धनतेरस की भीड़ और प्रशासनिक अनुमति नहीं होने का हवाला देकर शहर में प्रवेश से मना किया गया। इसके बाद उनका काफिला बाईपास के रास्ते प्रयागराज पहुंचा।

दोस्त को बेटी की शादी का निमंत्रण भी दिया

प्रयागराज पहुंचने के दौरान अनंत सिंह ने अपने पुराने मित्र पप्पू सलमान को अपनी बेटी शिवांगी सिंह की शादी का निमंत्रण भी दिया। दोनों परिवारों के बीच लंबे समय से पारिवारिक संबंध बताए जाते हैं। अनंत सिंह और पप्पू सलमान की दोस्ती की खासियत यही है कि यह राजनीति से आगे बढ़कर निजी और पारिवारिक रिश्ते में बदल चुकी है। यही वजह है कि एक निजी समारोह में शामिल होने के लिए अनंत सिंह ने लंबी दूरी तय की। करीब 30 साल पुरानी यह दोस्ती एक बार फिर चर्चा में है। घोड़ों के शौक से शुरू हुई इस यारी ने बिहार और उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ा दी है।

100 गाड़ियों का काफिला लेकर प्रयागराज पहुंचे अनंत सिंह, रास्ते में फूलों की बारिश; वाराणसी में पुलिस ने रोका

मोकामा विधायक और 'छोटे सरकार' के नाम से चर्चित अनंत सिंह की पटना से प्रयागराज तक की यात्रा खूब चर्चा में रही। करीब 400 किलोमीटर के इस सफर में उनका काफिला किसी बड़े राजनीतिक रोड शो जैसा नजर आया। 100 से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ निकले अनंत सिंह का रास्ते में जगह-जगह समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। कहीं जेसीबी मशीन से फूलों की बारिश हुई तो कहीं चांदी का मुकुट पहनाकर उनका अभिनंदन किया गया।

हालांकि, इस भव्य यात्रा के दौरान वाराणसी में पुलिस प्रशासन ने उनके काफिले को शहर में प्रवेश करने से रोक दिया। धनतेरस के कारण बाजारों में भीड़ और यातायात के दबाव का हवाला देते हुए पुलिस ने काफिले को आगे जाने की अनुमति नहीं दी। प्रशासन की ओर से पांच गाड़ियों के साथ शहर में जाने का विकल्प दिया गया, लेकिन अनंत सिंह ने इतने छोटे काफिले के साथ जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उनका काफिला बाईपास के रास्ते प्रयागराज के लिए रवाना हो गया।

बिहिया में JCB से फूलों की बारिश, उमड़ा समर्थकों का हुजूम

पटना से प्रयागराज जा रहे अनंत सिंह का भोजपुर जिले के बिहिया क्षेत्र में भव्य स्वागत किया गया। अमराई नवादा और दोघरा गांव के समीप बड़ी संख्या में समर्थक उनके स्वागत के लिए जुटे थे। जैसे ही उनका काफिला दोघरा गांव के पास पहुंचा, समर्थकों ने वाहनों को रुकवाकर उनका अभिनंदन किया। फूल-मालाओं से स्वागत के साथ जेसीबी मशीन के जरिए अनंत सिंह पर फूलों की वर्षा की गई। इस दौरान समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। अनंत सिंह कुछ देर के लिए अपनी गाड़ी से नीचे उतरे और समर्थकों का अभिवादन स्वीकार किया। सड़क के दोनों ओर लोगों की भीड़ जुटी रही। इस दौरान 'छोटे सरकार जिंदाबाद' और 'ब्रह्मेश्वर मुखिया अमर रहें' के नारे भी लगाए गए।

बक्सर में चांदी का मुकुट पहनाकर किया गया सम्मानित

भोजपुर के बाद बक्सर में भी अनंत सिंह का जोरदार स्वागत हुआ। समर्थकों ने उन्हें चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया। पटना से प्रयागराज तक उनके काफिले में 100 से अधिक गाड़ियां शामिल बताई गईं। रास्ते में अलग-अलग जगहों पर स्वागत कार्यक्रम होने के कारण उनकी यात्रा निर्धारित समय से करीब चार घंटे विलंब से प्रयागराज पहुंची। बिहिया में स्वागत कार्यक्रम में मुना राय, मुना उर्फ अमित शर्मा, मोनू राय, अनीस राय, नागा ठाकुर, हरिकिशुन राय, तनय राय और रमेश कुमार सुदामा समेत सैकड़ों समर्थक मौजूद थे।

वाराणसी में पुलिस ने रोका 100 से अधिक गाड़ियों का काफिला

अनंत सिंह के काफिले को वाराणसी में पुलिस प्रशासन के सख्त रुख का सामना करना पड़ा। शुक्रवार शाम करीब पांच बजे उनका काफिला वाराणसी की सीमा में पहुंचा। डाफी क्षेत्र में हरसेवानंद स्कूल के पास मलहिया मार्ग पर कमिश्नरेट पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर काफिले को रोक दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इतने बड़े काफिले के साथ शहर में प्रवेश करने के लिए प्रशासनिक अनुमति नहीं ली गई थी। इसके अलावा धनतेरस के कारण वाराणसी के बाजारों और प्रमुख सड़कों पर भारी भीड़ थी। ऐसे में यातायात व्यवस्था और सुरक्षा को देखते हुए बड़े काफिले को शहर के अंदर जाने की अनुमति देना संभव नहीं था। प्रशासन की ओर से अनंत सिंह को पांच गाड़ियों के साथ आगे जाने का विकल्प दिया गया। इस पर उन्होंने कहा कि इतनी कम गाड़ियों के साथ वे नहीं चलते हैं। अनुमति नहीं मिलने पर शहर के भीतर नहीं जाने की बात कही।

BHU के सिंहद्वार पर माल्यार्पण का था कार्यक्रम

अनंत सिंह का वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के सिंहद्वार स्थित लंका चौराहे पर महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने का कार्यक्रम भी था। उनके पहुंचने की सूचना पर लंका पुलिस भी अलर्ट थी। हालांकि, पुलिस प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं मिलने और यातायात संबंधी प्रतिबंधों के कारण उनका यह कार्यक्रम नहीं हो सका। इसके बाद अनंत सिंह ने वाराणसी शहर के भीतर जाने का कार्यक्रम रद कर दिया। उनका काफिला बाईपास मार्ग और भदोही होते हुए प्रयागराज के लिए रवाना हो गया। लंका चौराहे पर स्वागत के लिए इंतजार कर रहे समर्थक इस फैसले से मायूस नजर आए।

प्रयागराज पहुंचकर समर्थकों का जताया आभार

प्रयागराज पहुंचने के बाद अनंत सिंह ने अपने स्वागत और सम्मान के लिए समर्थकों का आभार जताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर यात्रा के दौरान की तस्वीरें भी साझा कीं। पटना से प्रयागराज तक की उनकी यह यात्रा रास्ते में हुए भव्य स्वागत, 100 से अधिक गाड़ियों के काफिले और वाराणसी में पुलिस प्रशासन के साथ हुई बातचीत के कारण चर्चा का विषय बन गई। एक निजी पारिवारिक समारोह में शामिल होने के लिए निकला यह सफर पूरे रास्ते सुर्खियों में रहा।