BCCL-SAIL का बड़ा करार: 2 कोयला ब्लॉकों से बढ़ेगा घरेलू कोकिंग कोयला उत्पादन

BCCL और SAIL ने पश्चिम बंगाल के दो कोयला ब्लॉकों के संयुक्त विकास के लिए MoU किया। 4 MTY क्षमता और 79 MT भंडार से घरेलू कोकिंग कोयला उत्पादन बढ़ेगा।

BCCL-SAIL का बड़ा करार: 2 कोयला ब्लॉकों से बढ़ेगा घरेलू कोकिंग कोयला उत्पादन
BCCL-SAIL का MoU: दो कोयला ब्लॉकों के संयुक्त विकास से बढ़ेगा उत्पादन>

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  • BCCL और SAIL ने दो कोयला ब्लॉकों के संयुक्त विकास के लिए MoU किया
  • पश्चिम बंगाल स्थित रामनगोर और कल्याणेश्वरी ब्लॉक का होगा संयुक्त विकास
  • दोनों ब्लॉकों की संयुक्त पीक रेटेड क्षमता 4 मिलियन टन प्रतिवर्ष है
  • पहले चरण में करीब 79 मिलियन टन निष्कर्षणीय कोयला भंडार का अनुमान

धनबाद (Threesocieties.com Desk): देश में घरेलू कोकिंग कोयला उत्पादन को बढ़ावा देने और इस्पात उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता मजबूत करने की दिशा में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दोनों कंपनियों ने पश्चिम बंगाल स्थित दो कोयला ब्लॉकों के संयुक्त विकास और संचालन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस समझौते के तहत SAIL के इंडिकट्टा रामनगोर कोयला ब्लॉक और BCCL के ईस्ट ऑफ दामागोरिया (कल्याणेश्वरी) कोयला ब्लॉक का संयुक्त रूप से विकास और संचालन किया जाएगा। दोनों कंपनियों के बीच हुआ यह समझौता घरेलू कोकिंग कोयला उत्पादन बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

दो ब्लॉकों की संयुक्त क्षमता 4 मिलियन टन प्रतिवर्ष

प्रस्तावित संयुक्त विकास परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में दोनों ब्लॉकों की उत्पादन क्षमता शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों ब्लॉकों की संयुक्त पीक रेटेड क्षमता (PRC) 4 मिलियन टन प्रतिवर्ष है। वहीं, पहले चरण में दोनों क्षेत्रों में करीब 79 मिलियन टन निष्कर्षणीय कोयला भंडार होने का अनुमान है। इससे आने वाले समय में घरेलू बाजार के लिए कोकिंग कोयले की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। कोकिंग कोयला इस्पात उत्पादन में महत्वपूर्ण कच्चा माल है। भारत में इस्पात उत्पादन बढ़ने के साथ कोकिंग कोयले की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में घरेलू स्रोतों से इसकी उपलब्धता बढ़ाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

एकीकृत तरीके से होगा खनन और ओवरबर्डन प्रबंधन

MoU के तहत दोनों कोयला ब्लॉकों में खनन और ओवरबर्डन प्रबंधन को एकीकृत तरीके से संचालित करने की योजना है। इससे दोनों परियोजनाओं में उपलब्ध संसाधनों का समन्वित इस्तेमाल किया जा सकेगा। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, पहले चरण में कल्याणेश्वरी ब्लॉक में खनन किया जाएगा, जबकि रामनगोर ब्लॉक में ओवरबर्डन की डंपिंग की जाएगी। इसके बाद दूसरे चरण में व्यवस्था को आपस में बदला जाएगा। यानी दोनों ब्लॉकों के संसाधनों और खनन गतिविधियों का इस तरह समन्वय किया जाएगा कि उपलब्ध भूमि और खनन संसाधनों का अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल हो सके।

कोकिंग कोयले के घरेलू उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा

BCCL और SAIL के बीच हुआ यह समझौता देश में घरेलू कोकिंग कोयला उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों से जुड़ा है। भारत लंबे समय से इस्पात उद्योग की कोकिंग कोयले की जरूरत के एक हिस्से के लिए आयात पर निर्भर रहा है। घरेलू उत्पादन बढ़ने से इस्पात उद्योग को देश के भीतर से कोकिंग कोयला उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इससे आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी योगदान मिलने की उम्मीद है।

SAIL के लिए कच्चे माल की उपलब्धता मजबूत करने की पहल

SAIL देश की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनियों में शामिल है। इस्पात उत्पादन के लिए गुणवत्तापूर्ण कोकिंग कोयले की निरंतर उपलब्धता महत्वपूर्ण है। ऐसे में SAIL और BCCL के बीच दोनों कोयला ब्लॉकों के संयुक्त विकास की योजना को घरेलू कच्चे माल की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने के प्रयास के तौर पर देखा जा सकता है। BCCL का मुख्य परिचालन क्षेत्र झारखंड का कोयलांचल है और कंपनी देश में कोकिंग कोयले के प्रमुख उत्पादकों में शामिल है। वहीं, SAIL के इस्पात संयंत्रों के लिए कोकिंग कोयला एक महत्वपूर्ण इनपुट है।

आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जुड़ी पहल

देश में कोकिंग कोयले का घरेलू उत्पादन बढ़ाना आत्मनिर्भर भारत की व्यापक नीति से भी जुड़ा हुआ है। घरेलू स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर आयात की जरूरत कम करना इस रणनीति का प्रमुख हिस्सा है। BCCL और SAIL के बीच हुआ MoU इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण संस्थागत सहयोग है। दो ब्लॉकों को एकीकृत तरीके से विकसित करने से उत्पादन क्षमता का इस्तेमाल बेहतर ढंग से करने और खनन गतिविधियों के बीच समन्वय स्थापित करने का अवसर मिलेगा।

घरेलू स्टील सेक्टर को मिल सकता है लाभ

भारत में इस्पात उत्पादन क्षमता में विस्तार के साथ कच्चे माल की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में घरेलू कोकिंग कोयले का उत्पादन बढ़ना स्टील सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। दोनों ब्लॉकों की संयुक्त 4 मिलियन टन प्रतिवर्ष की पीक रेटेड क्षमता और अनुमानित 79 मिलियन टन निष्कर्षणीय भंडार इस परियोजना के संभावित महत्व को दर्शाते हैं। BCCL और SAIL के बीच यह साझेदारी आगे चलकर घरेलू कोकिंग कोयला उत्पादन, संसाधनों के बेहतर उपयोग और इस्पात उद्योग की कच्चे माल की जरूरतों को पूरा करने में भूमिका निभा सकती है।