Highlights:

  • अनंत सिंह की जमानत रद्द करने की याचिका पर 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित
  • दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने जमानत को दी है चुनौती, पटना हाईकोर्ट ने मार्च 2026 में अनंत सिंह को दी थी जमानत 
  • बिहार सरकार के हलफनामे में अनंत सिंह के खिलाफ 62 आपराधिक मामलों का उल्लेख होने की जानकारी
  •  30 अक्टूबर 2026 को दुलारचंद यादव की पहली बरसी भी होगी

पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार की राजनीति में मोकामा के विधायक अनंत सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। इस मामले में याचिकाकर्ता दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने अदालत से अनंत सिंह की जमानत रद्द करने की मांग की है। हालांकि, सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अदालत इस मामले में क्या फैसला लेती है।

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अनंत सिंह को मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिली थी। इसके बाद वह जेल से बाहर आए। अब सुप्रीम कोर्ट में उनकी जमानत को चुनौती दिए जाने से यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हाईकोर्ट ने जमानत देते समय गवाहों को प्रभावित करने या अभियोजन के साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने की चेतावनी भी दी थी।

30 अक्टूबर 2025 को हुई थी दुलारचंद यादव की हत्या

दुलारचंद यादव की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मोकामा क्षेत्र में हुई थी। उस समय जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के प्रत्याशी अनंत सिंह और जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी चुनाव मैदान में थे। दुलारचंद यादव जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार कर रहे थे।रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों के काफिले आमने-सामने आ गए थे। इसके बाद हिंसा की घटना हुई, जिसमें दुलारचंद यादव की मौत हो गई। मामले में अनंत सिंह को मुख्य आरोपी के तौर पर नामजद किया गया और 1 नवंबर 2025 को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि, किसी आरोपी की भूमिका और आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होता है।

अनंत सिंह जेल में रहते हुए भी मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव जीतने में सफल रहे थे। बाद में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई हुई। अब दुलारचंद यादव के परिवार की ओर से जमानत को चुनौती दिए जाने के कारण मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।

नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में क्यों दी चुनौती?

दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने अनंत सिंह को मिली जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में जमानत के आदेश पर सवाल उठाते हुए उसे रद्द करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई है कि अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास को जमानत पर विचार करते समय उचित महत्व नहीं दिया गया। याचिका में उनके खिलाफ पहले से दर्ज आपराधिक मामलों का भी हवाला दिया गया है।

नीरज कुमार की मांग है कि दुलारचंद यादव हत्याकांड में न्याय सुनिश्चित करने के लिए अनंत सिंह की जमानत रद्द की जाए। हालांकि, याचिकाकर्ता की दलीलें और आरोप अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट संबंधित पक्षों की दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर मामले पर विचार करेगा।

बिहार सरकार के हलफनामे में क्या कहा गया?

इस मामले में बिहार सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सरकार ने जांच की प्रगति और अनंत सिंह सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का उल्लेख किया है। हलफनामे में बताया गया है कि पुलिस जांच और वरिष्ठ अधिकारियों के पर्यवेक्षण के बाद जनवरी 2026 में अनंत सिंह, मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

यह भी उल्लेख किया गया है कि अनंत सिंह के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, वसूली और आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न आरोपों से संबंधित 62 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन मामलों का उल्लेख उनके आपराधिक इतिहास के संदर्भ में किया गया है। यहां ध्यान रखना जरूरी है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या और उन मामलों में दोषसिद्धि अलग-अलग बातें हैं। सभी मामलों की वर्तमान स्थिति और प्रत्येक मामले के अंतिम परिणाम का आकलन संबंधित न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना चाहिए।

जमानत रद्द हुई तो क्या अनंत सिंह को फिर जाना पड़ेगा जेल?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सुप्रीम कोर्ट अनंत सिंह की जमानत रद्द करेगा। फिलहाल, केवल सुनवाई निर्धारित होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उन्हें दोबारा जेल जाना पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के सामने जमानत आदेश को चुनौती देने वाली याचिका है। अदालत याचिकाकर्ता, राज्य सरकार और अनंत सिंह की ओर से रखे गए पक्षों पर विचार कर सकती है। सुनवाई के दौरान अदालत का रुख और उसके बाद जारी होने वाला आदेश ही आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट करेगा।

यदि अदालत जमानत रद्द करने का आदेश देती है, तो अनंत सिंह की रिहाई की स्थिति प्रभावित हो सकती है। वहीं, यदि अदालत याचिका खारिज करती है या कोई अन्य आदेश देती है, तो उसका प्रभाव आदेश की शर्तों और कानूनी निर्देशों पर निर्भर करेगा। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि अनंत सिंह की जेल वापसी तय है। 30 अक्टूबर की सुनवाई इस मामले में महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव हो सकती है।

30 अक्टूबर को दुलारचंद यादव की पहली बरसी

इस सुनवाई की तारीख इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि दुलारचंद यादव की हत्या 30 अक्टूबर 2025 को हुई थी। 30 अक्टूबर 2026 को उनकी पहली बरसी होगी। इसी दिन उनकी हत्या से जुड़े मामले में अनंत सिंह की जमानत रद्द करने की याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है। दुलारचंद यादव के परिवार के लिए यह मामला न्याय की मांग से जुड़ा है, जबकि अनंत सिंह के लिए यह उनकी जमानत और कानूनी स्थिति से संबंधित अहम सुनवाई है।

अनंत सिंह की राजनीति पर भी निगाहें

मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह लंबे समय से प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में गिरफ्तारी, जेल में रहते हुए विधानसभा चुनाव जीतना और बाद में जमानत पर रिहाई इस मामले को लगातार चर्चा में बनाए हुए हैं।

इस बीच, खबर में दिए गए विवरण के अनुसार, जेडीयू से निष्कासन और नीलम देवी को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिलने की घटनाओं ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ाई है। हालांकि, इन राजनीतिक घटनाक्रमों और जमानत से जुड़े न्यायिक मामले को अलग-अलग समझना जरूरी है। अब 30 अक्टूबर को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सबकी नजरें रहेंगी। अदालत का आदेश ही तय करेगा कि अनंत सिंह की जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर आगे क्या कार्रवाई होगी।