Highlights:

  • सोनिया गांधी की किताब ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ 10 नवंबर को होगी रिलीज
  • सोनिया गांधी बोलीं- दशकों तक दूसरों ने मेरी कहानी सुनाई, अब मेरी बारी
  • अपने जीवन के बारे में लिखी गई कई बातों को बताया मनगढ़ंत और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया
  • सोनिया गांधी के मुताबिक, किताब पढ़ने के बाद कुछ लोगों की उनके प्रति राय बदल सकती है

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पार्टी संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी अपनी आने वाली किताब को लेकर चर्चा में हैं। उनका संस्मरण ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ (Belonging: A Journey of Love) 10 नवंबर को रिलीज होने वाला है। किताब के प्रकाशन से पहले सोनिया गांधी ने स्पष्ट किया है कि वह अपने जीवन की कहानी खुद अपने नजरिए से लोगों के सामने रखना चाहती हैं। उनका कहना है कि दशकों तक दूसरों ने उनके बारे में लिखा और उनकी कहानी सुनाई, लेकिन इनमें से कई बातें पूरी तरह सही नहीं थीं या उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।

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सोनिया गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए एक वीडियो के साथ अपनी आने वाली किताब को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किताब के आने पर कुछ हलचल और बहस होना स्वाभाविक है, क्योंकि अब तक दूसरे लोग उनकी कहानी अपने तरीके से बताते रहे हैं। अब वह खुद अपने जीवन की घटनाओं और अनुभवों को सामने रखेंगी।

उनके इस बयान ने किताब को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। खास बात यह है कि संस्मरण में उनके निजी जीवन, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ संबंध, राजनीति में प्रवेश और कांग्रेस के नेतृत्व से जुड़े अनुभवों का उल्लेख होने की उम्मीद है।

‘किताब आएगी तो तमाशा होना तय है’, सोनिया गांधी ने क्यों कही यह बात?

सोनिया गांधी ने अपनी पोस्ट में संकेत दिया कि उनकी किताब आने के बाद अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं। उन्होंने कहा कि दशकों तक दूसरे लोगों ने उनकी कहानी सुनाई है और अब अपनी कहानी खुद बताने की उनकी बारी है। उनके मुताबिक, सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति के बारे में लोगों की अलग-अलग राय बनती है। कोई उनके विचारों से सहमत हो सकता है, तो कोई उनसे असहमत भी हो सकता है। इसलिए किताब सामने आने के बाद बहस होना असामान्य नहीं है। सोनिया गांधी की इस टिप्पणी को उनके जीवन और राजनीतिक सफर को अपने नजरिए से प्रस्तुत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, किताब में किन घटनाओं को किस विस्तार से शामिल किया गया है, इसका पूरा आकलन पुस्तक पढ़ने के बाद ही किया जा सकेगा।

अपने बारे में लिखी गई बातों पर क्या बोलीं सोनिया गांधी?

वीडियो में सोनिया गांधी ने बताया कि उनके जीवन को लेकर लंबे समय से काफी कुछ लिखा जाता रहा है। लेकिन उन्हें लगा कि इन विवरणों में कई बातें वास्तविक घटनाओं से मेल नहीं खातीं। कुछ बातों को उन्होंने मनगढ़ंत बताया, जबकि कुछ को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।उन्होंने कहा कि इसी वजह से उन्हें अपनी कहानी खुद लिखने की जरूरत महसूस हुई। वह चाहती थीं कि घटनाओं और तथ्यों को उसी तरह प्रस्तुत किया जाए, जिस तरह वे वास्तव में घटित हुए थे।

सोनिया गांधी के इस बयान का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि उनका जीवन भारतीय राजनीति के कई अहम दौर से जुड़ा रहा है। राजीव गांधी से विवाह के बाद भारत आना, परिवार के साथ निजी जीवन बिताना, राजनीतिक परिस्थितियों के बीच सार्वजनिक जीवन में आना और बाद में कांग्रेस का नेतृत्व करना उनके जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव रहे हैं। उनकी किताब इन अनुभवों को उनके अपने दृष्टिकोण से समझने का अवसर दे सकती है।

किताब पढ़ने के बाद बदल सकती है लोगों की राय

सोनिया गांधी ने यह भी स्वीकार किया कि उनकी किताब पढ़ने के बाद सभी पाठकों की प्रतिक्रिया एक जैसी नहीं होगी। कुछ लोगों की उनके बारे में बनी राय बदल सकती है, जबकि कुछ अन्य लोगों की राय पहले से अधिक नकारात्मक हो सकती है।उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अपनी कहानी लिखता है या सार्वजनिक जीवन में रहता है, तो अलग-अलग प्रतिक्रियाएं मिलना स्वाभाविक है। 

यह टिप्पणी बताती है कि सोनिया गांधी अपनी किताब को लेकर संभावित आलोचनाओं से अनजान नहीं हैं। वह जानती हैं कि उनके राजनीतिक जीवन और निजी अनुभवों को लेकर पाठकों की अलग-अलग धारणाएं हो सकती हैं। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि किताब के प्रकाशन के बाद राजनीतिक हलकों या आम पाठकों की राय किस दिशा में बदलेगी।

राजीव गांधी को लेकर भी साझा किया अनुभव

सोनिया गांधी ने वीडियो में अपने पति और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी से जुड़े एक राजनीतिक घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब राजीव गांधी को पद संभालने के लिए कहा गया था, तब वह इसके पक्ष में नहीं थीं। इस प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी नहीं पता कि उन्हें पूरी कहानी बतानी चाहिए या नहीं।राजीव गांधी के राजनीतिक जीवन और प्रधानमंत्री बनने से जुड़ा यह संदर्भ सोनिया गांधी के निजी अनुभवों को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि किताब में केवल राजनीतिक घटनाओं का विवरण ही नहीं, बल्कि उन घटनाओं के दौरान परिवार के भीतर महसूस की गई परिस्थितियों और व्यक्तिगत अनुभवों को भी जगह मिल सकती है।हालांकि, इस प्रसंग का विस्तृत विवरण और उससे जुड़ी अन्य जानकारियां किताब के पाठ से ही स्पष्ट होंगी।

क्या है ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ में?

सोनिया गांधी के संस्मरण का शीर्षक ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ है। यह किताब उनके जीवन के विभिन्न चरणों को समेटती है। इसमें द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इटली में बीते उनके बचपन से लेकर राजीव गांधी से मुलाकात, विवाह और भारत में जीवन की शुरुआत तक के अनुभव शामिल हैं। उनके जीवन का एक बड़ा हिस्सा भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से जुड़ा रहा है। राजीव गांधी के साथ पारिवारिक जीवन, उनके निधन के बाद का दौर, कांग्रेस की राजनीति में सोनिया गांधी की भूमिका और पार्टी अध्यक्ष के रूप में उनकी जिम्मेदारियां उनके सार्वजनिक जीवन के अहम हिस्से रहे हैं। 

सोनिया गांधी लंबे समय तक कांग्रेस की प्रमुख नेता रही हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी ने कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना किया और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के दौर में राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस पृष्ठभूमि में उनकी किताब को उनके निजी अनुभवों और राजनीतिक सफर को समझने के एक महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, किताब के प्रत्येक अध्याय और उसमें शामिल घटनाओं की पुष्टि के लिए प्रकाशित पुस्तक का संदर्भ जरूरी होगा।

10 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिलीज होगी किताब

‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ का प्रकाशन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अल्फ्रेड ए. नॉफ की ओर से किया जा रहा है। यह प्रकाशन समूह नोफ डबलडे पब्लिशिंग ग्रुप का हिस्सा है। किताब के प्रकाशन की घोषणा पहले ही की जा चुकी है और इसकी निर्धारित रिलीज तारीख 10 नवंबर है। पुस्तक के प्रकाशन से पहले सोनिया गांधी की ओर से साझा किए जा रहे अंशों और बयानों ने इसके प्रति दिलचस्पी बढ़ाई है। खास तौर पर उनकी यह टिप्पणी कि अब वह अपनी कहानी खुद बताएंगी, किताब की चर्चा का प्रमुख केंद्र बन गई है।

SIR विवाद के बीच बयान ने खींचा ध्यान

सोनिया गांधी की किताब को लेकर आया बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और निर्वाचन आयोग से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस जारी है। ऐसे माहौल में उनके बयान को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, उपलब्ध बयान के आधार पर किताब को SIR विवाद से सीधे जोड़ना उचित नहीं होगा। सोनिया गांधी ने अपने वीडियो में मुख्य रूप से अपने जीवन के बारे में लिखी गई बातों, तथ्यों और अपनी कहानी खुद प्रस्तुत करने की जरूरत पर बात की है।

अब किताब का इंतजार

सोनिया गांधी की आने वाली किताब को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि उसमें उनके जीवन और राजनीति से जुड़े कौन-कौन से अनुभव विस्तार से सामने आएंगे। क्या इसमें उन घटनाओं पर भी नई रोशनी पड़ेगी, जिनके बारे में पहले कई तरह की व्याख्याएं सामने आ चुकी हैं? इसका जवाब किताब पढ़ने के बाद ही मिल सकेगा।

फिलहाल, सोनिया गांधी ने अपने बयान से यह साफ कर दिया है कि वह अपने जीवन की कहानी को अपने शब्दों में प्रस्तुत करना चाहती हैं। 10 नवंबर को किताब रिलीज होने के बाद उनके अनुभवों, विचारों और घटनाओं के विवरण पर राजनीतिक और साहित्यिक हलकों में चर्चा होने की संभावना है।