HighLights:
- IPS अधिकारी आदित्य कुमार को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) से राहत नहीं मिली
- कैट ने उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई रद्द करने से इनकार किया
- राज्य सरकार को छह महीने के भीतर विभागीय जांच पूरी करने का निर्देश दिया गया
- जांच के दौरान आदित्य कुमार को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर देना होगा
पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार कैडर के IPS अधिकारी आदित्य कुमार को तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम पर फोन कॉल कराने के मामले में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) से राहत नहीं मिली है। कैट की पटना पीठ ने उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्रवाई को रद्द करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अधिकरण ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि विभागीय जांच को अनावश्यक रूप से लंबित रखने के बजाय छह महीने के भीतर पूरा किया जाए।
इस मामले में न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार जोहरी और प्रशासनिक सदस्य कुमार राजेश चंद्र की पीठ ने सुनवाई की। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि विभागीय जांच के दौरान अधिकारी को अपना पक्ष रखने और बचाव करने का उचित अवसर मिलना चाहिए। साथ ही, अधिकारी की ओर से असहयोग किए जाने की स्थिति में भी जांच को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता।
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विभागीय कार्रवाई रद्द करने की मांग खारिज
आदित्य कुमार ने 25 मार्च 2025 को जारी विभागीय आरोपपत्र को चुनौती देते हुए कैट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने आरोपपत्र को रद्द करने की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने अपने कनिष्ठ अधिकारियों के समान डीआईजी पद पर प्रोन्नति के लिए विचार किए जाने का अनुरोध भी किया था। अधिकारी की ओर से आरोपपत्र जारी करने में हुई देरी और कार्रवाई के पीछे दुर्भावना होने का मुद्दा उठाया गया था। हालांकि, कैट ने विभागीय कार्रवाई समाप्त करने की मांग स्वीकार नहीं की। इसके बजाय अधिकरण ने राज्य सरकार को निर्धारित समय सीमा में जांच पूरी करने का निर्देश दिया।
आपराधिक मामला लंबित होने पर भी हो सकती है विभागीय जांच
कैट की पीठ ने कहा कि किसी मामले में आपराधिक कार्यवाही लंबित होने का अर्थ यह नहीं है कि सरकार संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं कर सकती। अनुशासनात्मक कार्यवाही के तहत कदाचार से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच की जा सकती है। इस आदेश का मतलब है कि आदित्य कुमार के खिलाफ विभागीय जांच जारी रहेगी और राज्य सरकार को छह महीने के भीतर इसकी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जांच में निर्धारित नियमों का पालन करते हुए अधिकारी को अपना पक्ष रखने का अवसर देना भी जरूरी होगा।
2022 में EOU ने दर्ज किया था मामला
आदित्य कुमार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) में वर्ष 2022 में मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई थी। यह मामला तत्कालीन डीजीपी एसके सिंघल को पटना हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम पर फोन कॉल कराकर कथित रूप से दबाव डालने के आरोप से जुड़ा है।मामले में आपराधिक कार्यवाही और विभागीय जांच अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। कैट ने अपने आदेश में विभागीय कार्रवाई को केवल आपराधिक कार्यवाही लंबित होने के आधार पर रोकने या समाप्त करने की मांग स्वीकार नहीं की।
लापरवाही के आरोपों वाली विभागीय कार्रवाई पहले हो चुकी है समाप्त
गौरतलब है कि गृह विभाग ने हाल ही में 2011 बैच के IPS अधिकारी आदित्य कुमार के खिलाफ एक अन्य विभागीय कार्यवाही समाप्त कर दी थी। यह कार्रवाई गया के एसएसपी रहते हुए कथित लापरवाही से संबंधित आरोपों को लेकर चल रही थी। इसके बाद उनके डीआईजी पद पर प्रोन्नति का रास्ता साफ होने की बात सामने आई थी। विभाग की आरक्षी शाखा ने इस संबंध में संकल्प भी जारी किया था। वर्तमान में आदित्य कुमार बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस-14 के समादेष्टा के पद पर तैनात हैं। हालांकि, लापरवाही से जुड़े विभागीय मामले का समाप्त होना और तत्कालीन डीजीपी को चीफ जस्टिस के नाम पर फोन कराने से संबंधित मामले में चल रही कार्रवाई अलग-अलग विषय हैं। कैट के ताजा आदेश में दूसरे मामले की विभागीय जांच जारी रखने और उसे छह महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
क्या था चार साल पुराना मामला?
आदित्य कुमार जब गया के एसएसपी थे, उस समय उन पर शराब बरामदगी से जुड़े मामले को गंभीरता से नहीं लेने, अधीनस्थ थाना पदाधिकारियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रखने और समय-समय पर थानों का निरीक्षण करने जैसी जिम्मेदारियों के निर्वहन में लापरवाही बरतने के आरोप लगे थे। इन आरोपों के संबंध में उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई थी। बाद में उन्होंने आरोपपत्र और जांच रिपोर्ट को चुनौती देते हुए कैट की पटना पीठ का रुख किया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस अलग मामले में विभागीय कार्रवाई समाप्त किए जाने के बाद उनके डीआईजी पद पर प्रोन्नति पर विचार का रास्ता खुला था।
छह महीने में पूरी करनी होगी जांच
कैट के ताजा आदेश से स्पष्ट है कि चीफ जस्टिस के नाम पर फोन कॉल कराने से संबंधित मामले में आदित्य कुमार को फिलहाल विभागीय कार्रवाई से राहत नहीं मिली है। राज्य सरकार को अब छह महीने के भीतर जांच पूरी करनी होगी। जांच के दौरान निष्पक्ष प्रक्रिया अपनाने और अधिकारी को बचाव का उचित अवसर देने की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों की होगी।