‍Bihar: NEET छात्रा मौत: CBI को नहीं मिला दोषी, कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल

पटना NEET छात्रा मौत केस में CBI को किसी आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिला। CBI ने 6 अक्टूबर को पॉक्सो कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।

‍Bihar: NEET छात्रा मौत: CBI को नहीं मिला दोषी, कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल
NEET छात्रा मौत: CBI को नहीं मिला दोषी, कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल।

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    HighLights:

  • पटना में NEET छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में CBI को कोई आरोपी नहीं मिला
  • CBI ने 6 अक्टूबर 2026 को विशेष पॉक्सो कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की
  • जांच एजेंसी को किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले
  • अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को , कोर्ट ने छात्रा के पिता को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया 

पटना (Threesocieties.com Desk):  NEET की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को जांच के दौरान किसी आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले हैं। CBI ने मामले की जांच पूरी करने के बाद 6 अक्टूबर 2026 को विशेष पॉक्सो कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। अब इस रिपोर्ट पर अदालत में आगे सुनवाई होगी। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की गयी है।

CBI की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच के दौरान किसी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले, जिसके आधार पर उसे आरोपी बनाया जा सके। रिपोर्ट दाखिल होने के बाद अब अदालत यह तय करेगी कि इसे स्वीकार किया जाए या मामले में आगे किसी तरह की जांच अथवा कानूनी कार्रवाई की जरूरत है।

CBI को जांच में नहीं मिला कोई आरोपी

CBI ने मंगलवार को विशेष पॉक्सो न्यायाधीश राजीव रंजन रमण की अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। अपर लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद के अनुसार, जांच एजेंसी की रिपोर्ट में किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसा ठोस साक्ष्य नहीं मिला, जिसके आधार पर उसके विरुद्ध आरोप तय किए जा सकें। मामले में CBI ने हॉस्टल, छात्रा के संपर्क में रहे लोगों और घटनाक्रम से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की थी। एजेंसी ने उपलब्ध मेडिकल, फोरेंसिक और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई, लेकिन किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त आपराधिक साक्ष्य नहीं मिल सका।

13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद अब अदालत में इस पर सुनवाई होगी। कोर्ट ने मामले के सूचक और छात्रा के पिता को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। 13 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में अदालत CBI की रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी। कानूनी तौर पर क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने का अर्थ यह नहीं है कि मामला उसी समय पूरी तरह खत्म हो गया। अदालत रिपोर्ट को स्वीकार कर सकती है या उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई का रास्ता भी खोल सकती है।

हॉस्टल के बंद कमरे में बेहोश मिली थी छात्रा

यह पूरा मामला पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के मुन्ना चक स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल का है। जहानाबाद की रहने वाली छात्रा पटना में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी। 6 जनवरी 2026 को छात्रा हॉस्टल के एक बंद कमरे में अचेत अवस्था में मिली थी। इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई दिनों तक इलाज चलने के बाद 11 जनवरी 2026 को छात्रा की मौत हो गयी।छात्रा के पिता ने उसके शरीर पर चोट के निशान होने की बात कही थी। उन्होंने दुष्कर्म के प्रयास की आशंका भी जतायी थी। इसके बाद मामला गंभीर हो गया और पुलिस जांच के साथ-साथ मेडिकल तथा फोरेंसिक जांच का दायरा भी बढ़ाया गया।

पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच से बढ़ा संदेह

छात्रा की मौत के बाद पोस्टमार्टम और मेडिकल जांच से जुड़े तथ्यों को जांच का अहम हिस्सा बनाया गया। जांच के दौरान छात्रा के शरीर पर मिले चोट के निशान और दुष्कर्म की आशंका समेत कई बिंदुओं की पड़ताल की गयी। मामले की जांच के दौरान छात्रा के अंडरगारमेंट से स्पर्म मिलने की बात भी सामने आयी थी। इसके बाद जांच एजेंसियों ने DNA जांच के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश की कि संबंधित जैविक साक्ष्य किसी संदिग्ध या छात्रा के संपर्क में रहे व्यक्ति से मेल खाते हैं या नहीं।

DNA जांच में नहीं मिला मेल

जांच के दौरान छात्रा के परिजनों और उसके करीबियों के DNA सैंपल लिये गये थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, किसी भी सैंपल का मिलान अंडरगारमेंट पर मिले स्पर्म से नहीं हुआ। DNA जांच में अपेक्षित मेल नहीं मिलने के बाद भी जांच एजेंसियों ने मामले के दूसरे पहलुओं की जांच जारी रखी। CBI ने भी मामले से जुड़े साक्ष्यों, घटनाक्रम और संबंधित लोगों से पूछताछ के आधार पर अपनी जांच आगे बढ़ायी।

शुरुआती जांच में पुलिस अधिकारियों पर हुई थी कार्रवाई

मामले की शुरुआती जांच के दौरान पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठे थे। लापरवाही के आरोपों के बाद तत्कालीन चित्रगुप्त नगर थानाध्यक्ष रौशनी कुमारी और कदमकुआं थाना के अपर थानाध्यक्ष हेमंत झा को निलंबित किया गया था। वहीं, हॉस्टल संचालक मनीष कुमार रंजन को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। हालांकि अब CBI की जांच में किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही गयी है।

सरकार ने CBI को सौंपी थी जांच

छात्रा की मौत के बाद मामले को लेकर पुलिस की जांच पर सवाल उठने लगे थे। परिजनों और अन्य लोगों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठी थी। इसके बाद बिहार सरकार ने मामले की जांच CBI से कराने की सिफारिश की। फरवरी 2026 में CBI ने मामले की जांच शुरू की। जांच एजेंसी ने पटना के हॉस्टल से लेकर जहानाबाद तक मामले से जुड़े लोगों और घटनाक्रम से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जांच की। कई महीनों तक चली जांच के बाद CBI ने 6 अक्टूबर 2026 को विशेष पॉक्सो अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी।

क्या होती है क्लोजर रिपोर्ट?

किसी आपराधिक मामले की जांच के बाद जब जांच एजेंसी को आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते हैं, तो वह अदालत में क्लोजर रिपोर्ट या फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। इस रिपोर्ट में जांच एजेंसी अदालत को बताती है कि जांच के दौरान क्या तथ्य सामने आए और किसी आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य क्यों नहीं मिल सके। हालांकि क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने मात्र से मामला स्वत: खत्म नहीं हो जाता। अंतिम निर्णय अदालत का होता है।

क्लोजर रिपोर्ट पर कोर्ट के पास क्या विकल्प हैं?

अदालत CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर मामले को बंद कर सकती है। इसके अलावा यदि अदालत को लगता है कि मामले में और जांच की आवश्यकता है, तो आगे की जांच का निर्देश दिया जा सकता है। अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और शिकायतकर्ता की आपत्ति पर विचार करते हुए अलग निष्कर्ष पर भी पहुंच सकती है। इसलिए 13 अक्टूबर की सुनवाई इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

छात्रा के पिता कर सकते हैं विरोध

क्लोजर रिपोर्ट पर सुनवाई से पहले शिकायतकर्ता या पीड़ित पक्ष को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता है। छात्रा के पिता CBI की रिपोर्ट से असहमति होने पर अदालत के समक्ष अपनी आपत्ति रख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर वे प्रोटेस्ट पिटीशन भी दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद अदालत CBI की रिपोर्ट, उपलब्ध साक्ष्य और पीड़ित पक्ष की दलीलों पर विचार करके आगे का निर्णय लेगी।

मामले की पूरी टाइमलाइन

6 जनवरी 2026: पटना के चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा बंद कमरे में अचेत अवस्था में मिली।

9 जनवरी 2026: छात्रा के पिता ने दुष्कर्म की आशंका जताते हुए चित्रगुप्त नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी।

11 जनवरी 2026: अस्पताल में इलाज के दौरान छात्रा की मौत हो गयी। घटना के बाद मामले को लेकर आक्रोश बढ़ गया।

जनवरी 2026: मामले की जांच के लिए IG जितेंद्र राणा के नेतृत्व में SIT का गठन किया गया। मेडिकल और पोस्टमार्टम से जुड़े तथ्यों की भी जांच की गयी।

फरवरी 2026: बिहार सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंपने की सिफारिश की। इसके बाद CBI ने जांच शुरू की।

6 अक्टूबर 2026: CBI ने कई महीनों की जांच के बाद विशेष पॉक्सो कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी।

13 अक्टूबर 2026: मामले में क्लोजर रिपोर्ट पर अगली सुनवाई निर्धारित है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल CBI की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने के बाद इस मामले में अंतिम फैसला अदालत के हाथ में है। 13 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में कोर्ट CBI की रिपोर्ट पर आगे की कार्रवाई तय कर सकता है। यदि छात्रा के पिता CBI की क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करते हैं, तो अदालत उनकी आपत्ति और उपलब्ध साक्ष्यों पर भी विचार कर सकती है। ऐसे में 13 अक्टूबर की सुनवाई यह तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण होगी कि मामले को बंद किया जाए या जांच/कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाए। अभी CBI की क्लोजर रिपोर्ट दाखिल हुई है; इसे अदालत द्वारा स्वीकार किया जाना बाकी है।