"मधुबन की लड़ाई अब मेरी भी है…' मेयर संजीव सिंह की हुंकार, BCCL-MDO के खिलाफ ग्रामीणों के साथ उतरे"
धनबाद के मेयर संजीव सिंह ने मधुबन बचाओ संघर्ष मोर्चा के आंदोलन को खुला समर्थन देते हुए BCCL और MDO मॉडल की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने ग्रामीणों को मुआवजा, नियोजन और पुनर्वास दिलाने का भरोसा दिया। जानिए पूरी खबर।
HighLights :
- मधुबन बचाओ संघर्ष मोर्चा की आमसभा में मेयर संजीव सिंह ने किया ग्रामीणों का समर्थन
- BCCL प्रबंधन और MDO मॉडल की नीतियों पर जमकर हमला बोला
- ग्रामीणों को मुआवजा, नियोजन और पुनर्वास दिलाने का दिया भरोसा
- कहा- "जब तक मधुबन के लोगों को न्याय नहीं मिलेगा, मैं पीछे नहीं हटूंगा"
धनबाद (Threesocieties.com Desk): मधुबन कोलियरी क्षेत्र में जमीन, मुआवजा, नियोजन और पुनर्वास को लेकर चल रहे मधुबन बचाओ संघर्ष मोर्चा के आंदोलन को रविवार को बड़ा राजनीतिक समर्थन मिला। धनबाद के मेयर संजीव सिंह स्वयं आमसभा में पहुंचे और मंच से ऐलान किया कि अब मधुबन के ग्रामीणों की लड़ाई उनकी अपनी लड़ाई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक ग्रामीणों और रैयतों को उनका अधिकार और न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
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पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मधुबन कोलियरी कार्यालय मैदान में आयोजित विशाल आमसभा में हजारों की संख्या में ग्रामीण, किसान, रैयत, महिलाएं और युवा शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान बीसीसीएल प्रबंधन और एमडीओ (Mine Developer and Operator) मॉडल के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई।
विनोद बिहारी महतो को श्रद्धांजलि देकर पहुंचे सभा स्थल
मेयर संजीव सिंह का काफिला सबसे पहले नावागढ़ मोड़ पहुंचा, जहां उन्होंने झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता विनोद बिहारी महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और नारों के बीच समर्थकों का विशाल जुलूस मधुबन कोलियरी मैदान पहुंचा। रास्ते भर युवाओं ने आतिशबाजी कर उनका स्वागत किया और पूरे क्षेत्र में आंदोलन के समर्थन का माहौल देखने को मिला।
'आप अकेले नहीं हैं, अब यह मेरी लड़ाई है'
सभा को संबोधित करते हुए मेयर संजीव सिंह ने कहा कि कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देश के वीर जवानों की शहादत को याद करते हुए वे यह संकल्प लेते हैं कि मधुबन के लोगों को उनका अधिकार दिलाकर रहेंगे.उन्होंने कहा, "आज से आपकी लड़ाई मेरी लड़ाई है। जब तक मधुबन के ग्रामीणों और रैयतों को न्याय नहीं मिलेगा, मैं पीछे नहीं हटूंगा। चाहे जितनी बड़ी लड़ाई लड़नी पड़े, हर मोर्चे पर आपके साथ खड़ा मिलूंगा।" उन्होंने यह भी कहा कि उनका न तो बीसीसीएल प्रबंधन से कोई निजी संबंध है और न ही किसी प्रकार का व्यावसायिक हित। उनकी चिंता केवल क्षेत्र के किसान, मजदूर, महिलाएं और युवाओं के अधिकारों की है।
BCCL प्रबंधन से जल्द करेंगे वार्ता
मेयर ने कहा कि बहुत जल्द वे इस पूरे मामले को लेकर बीसीसीएल प्रबंधन से वार्ता करेंगे और ग्रामीणों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर स्थानीय लोगों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
क्यों हो रहा है मधुबन में विरोध?
मधुबन बचाओ संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में पिछले लंबे समय से ग्रामीण जमीन अधिग्रहण के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं। ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि उनकी जमीन यदि ली जाती है तो उसका उचित मुआवजा, बीसीसीएल में नियोजन और सम्मानजनक पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी जमीन किसी निजी कंपनी को नहीं बल्कि केवल बीसीसीएल को देना चाहते हैं। उनका आरोप है कि एमडीओ मॉडल के जरिए निजी कंपनी को खदान संचालन सौंपकर स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
393.37 हेक्टेयर भूमि को लेकर बढ़ा विवाद
जानकारी के अनुसार, बीसीसीएल ने मधुबन कोलियरी में एमडीओ मोड के तहत मेसर्स इंदुकुरी मधुबन प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को कोयला उत्खनन का कार्य सौंपा है। इसके तहत छह मौजों की करीब 393.37 हेक्टेयर रैयती एवं गैर आबाद भूमि को लीज के लिए राज्य सरकार के पास भेजा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इससे उनकी उपजाऊ जमीन निजी कंपनी के हाथों में चली जाएगी और वे अपनी ही जमीन से बेदखल हो जाएंगे। आंदोलनकारियों का कहना है कि एमडीओ नीति स्थानीय किसानों, मजदूरों और विस्थापित परिवारों के हितों के खिलाफ है।
मुआवजा, नौकरी और पुनर्वास सबसे बड़ी मांग
संघर्ष मोर्चा की प्रमुख मांगों में शामिल हैं— जमीन के बदले बीसीसीएल में नियोजन, लंबित नियोजन मामलों का समाधान, नियमानुसार उचित मुआवजा, विस्थापित परिवारों का पुनर्वास। खिलान धौड़ा, सोनानगर, कुटकुटिया पट्टी, बंगला धौड़ा, परसबनियां कॉलोनी, मोहनपुर और धोवा टांड़ सहित प्रभावित क्षेत्रों के लोगों का सम्मानजनक पुनर्वास।
मेयर के समर्थन से आंदोलन को मिली नई ताकत
सभा में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी बीसीसीएल प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा की मांग की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मेयर संजीव सिंह के खुले समर्थन से मधुबन बचाओ संघर्ष मोर्चा के आंदोलन को नई राजनीतिक ऊर्जा और मजबूती मिली है।
कार्यक्रम में डेगलाल महतो, मुकेश कुमार महतो, स्वरुपानंद महतो, अमित महतो, सुमन बाउरी, करण महतो, सुदामा महतो, कैलाश महतो, भरत महतो, अरुण दे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और आंदोलनकारी मौजूद रहे।
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