Highlights:
- आयोडीन शरीर में थायरॉइड हार्मोन बनाने के लिए जरूरी पोषक तत्व है
- बिना आयोडीन वाला सेंधा नमक इस्तेमाल करने से भोजन में आयोडीन की कमी हो सकती है
- थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन हड्डियों के स्वास्थ्य और बोन मिनरल डेंसिटी को प्रभावित कर सकता है
- आयोडीन युक्त नमक, दूध, दही और कुछ समुद्री खाद्य पदार्थ आयोडीन के स्रोत हैं
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): आजकल सेहत को लेकर जागरूकता बढ़ने के साथ खानपान में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। कई लोग सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक को अधिक प्राकृतिक और सेहतमंद मानकर इस्तेमाल करते हैं। लेकिन अगर आप रोजाना केवल ऐसे नमक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें आयोडीन नहीं मिलाया गया है, तो आपके भोजन में इस जरूरी पोषक तत्व की कमी हो सकती है।
आयोडीन शरीर के लिए बेहद जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व है। यह थायरॉइड हार्मोन बनाने में मदद करता है, जो शरीर के मेटाबॉलिज्म, वृद्धि और विकास को नियंत्रित करते हैं। भारत सरकार के नमक विभाग के अनुसार, देश में 20 करोड़ से अधिक लोग आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों के जोखिम में हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी प्रभावित लोगों को बीमारी है। स्रोत: भारत सरकार का नमक विभाग
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सेंधा नमक खाने वालों को क्यों ध्यान देना चाहिए?
सेंधा नमक और सामान्य नमक के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि सामान्य सेंधा नमक में आयोडीन की मात्रा पर्याप्त नहीं होती, जब तक उसमें अलग से आयोडीन न मिलाया गया हो। इसके विपरीत, आयोडीन युक्त नमक इस पोषक तत्व की कमी को रोकने का एक प्रभावी माध्यम है। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक बिना आयोडीन वाले नमक का इस्तेमाल करता है और भोजन से भी पर्याप्त आयोडीन नहीं लेता, तो उसके शरीर में इसकी कमी हो सकती है। इससे थायरॉइड ग्रंथि के सामान्य कामकाज पर असर पड़ सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों की रोकथाम के लिए खाद्य नमक में आयोडीन मिलाने की रणनीति का समर्थन करता है। इसलिए नमक चुनते समय केवल उसके रंग, बनावट या प्राकृतिक होने के दावे के बजाय उसमें आयोडीन की उपलब्धता पर ध्यान देना जरूरी है।
क्या आयोडीन की कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं?
हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम और विटामिन D के साथ शरीर में थायरॉइड हार्मोन का संतुलन भी महत्वपूर्ण है। थायरॉइड हार्मोन हड्डियों के निर्माण और उनके लगातार नवीनीकरण की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। आयोडीन की कमी से हाइपोथायरायडिज्म जैसी समस्या हो सकती है। दूसरी ओर, थायरॉइड हार्मोन की अधिकता भी हड्डियों के क्षरण की गति बढ़ा सकती है और कुछ लोगों में हड्डियों का घनत्व कम होने का जोखिम बढ़ सकता है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सेंधा नमक खाने से सीधे हड्डियां खोखली हो जाती हैं, ऐसा कहना सही नहीं होगा। हड्डियों की कमजोरी के कई कारण हो सकते हैं। इनमें कैल्शियम और विटामिन D की कमी, उम्र बढ़ना, हार्मोनल बदलाव, कुछ दवाएं, शारीरिक गतिविधि की कमी और अन्य बीमारियां शामिल हैं। इसलिए हड्डियों की कमजोरी को केवल आयोडीन की कमी या किसी एक प्रकार के नमक से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।
आयोडीन की कमी होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण
शरीर में आयोडीन की कमी से थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कुछ लोगों में इसके कारण थायरॉइड ग्रंथि का आकार बढ़ जाता है, जिसे घेंघा या गाइटर कहा जाता है। हाइपोथायरायडिज्म होने पर ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
लगातार थकान और सुस्ती महसूस होना।
पर्याप्त भोजन के बावजूद वजन बढ़ना।
ठंड अधिक लगना।
त्वचा का रूखा होना और बाल झड़ना।
कब्ज की समस्या।
ध्यान लगाने में कठिनाई या मानसिक सुस्ती।
गर्दन के सामने वाले हिस्से में सूजन दिखाई देना।
ये लक्षण केवल आयोडीन की कमी के कारण ही नहीं होते। दूसरी बीमारियों में भी ऐसे संकेत मिल सकते हैं। इसलिए लक्षण लगातार बने रहने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए आयोडीन क्यों जरूरी?
गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की पर्याप्त मात्रा विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि थायरॉइड हार्मोन भ्रूण के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।गर्भावस्था में गंभीर आयोडीन की कमी से मां और बच्चे, दोनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। बच्चों में इसकी कमी शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकती है। इसी वजह से गर्भवती महिलाओं को संतुलित आहार लेने और डॉक्टर की सलाह के अनुसार थायरॉइड की जांच कराने पर ध्यान देना चाहिए। आयोडीन सप्लीमेंट या थायरॉइड की दवा अपने आप शुरू नहीं करनी चाहिए।
आयोडीन की कमी कैसे दूर करें?
शरीर को आयोडीन भोजन के माध्यम से मिलता है। इसकी पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए खानपान में इन बातों का ध्यान रखें:
1. आयोडीन युक्त नमक चुनें: घर में इस्तेमाल होने वाले नमक के पैकेट पर आयोडीन युक्त होने का लेबल देखें। यदि आप सेंधा नमक पसंद करते हैं, तो यह जांच लें कि उसमें आयोडीन मिलाया गया है या नहीं।
2. दूध और डेयरी उत्पाद लें: दूध, दही और कुछ अन्य डेयरी उत्पाद आयोडीन के स्रोत हो सकते हैं। इनमें आयोडीन की मात्रा उत्पादन और पशुओं के आहार जैसे कारकों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
3. समुद्री खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें: मछली, झींगा और समुद्री शैवाल जैसे खाद्य पदार्थ आयोडीन प्रदान कर सकते हैं। हालांकि, सभी खाद्य पदार्थों में इसकी मात्रा समान नहीं होती।
4. संतुलित आहार पर ध्यान दें: हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए कैल्शियम, विटामिन D, पर्याप्त प्रोटीन और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी हैं।
नमक कितना खाना चाहिए?
आयोडीन की जरूरत पूरी करने के लिए ज्यादा नमक खाना सही तरीका नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों के लिए प्रतिदिन कुल नमक का सेवन 5 ग्राम से कम रखने की सलाह देता है। इसमें भोजन बनाते समय डाला गया नमक और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों से मिलने वाला नमक भी शामिल है। आयोडीन युक्त नमक का सीमित मात्रा में इस्तेमाल करें। यदि आपको थायरॉइड की बीमारी है या डॉक्टर ने नमक के सेवन को लेकर कोई विशेष सलाह दी है, तो उसी का पालन करें।
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए क्या करें?
हड्डियों की सेहत बनाए रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतें मददगार हो सकती हैं:
कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर संतुलित आहार लें।
नियमित रूप से पैदल चलें और अपनी क्षमता के अनुसार वजन सहने वाले व्यायाम करें।
धूम्रपान से बचें और शराब का सेवन सीमित रखें।
बिना डॉक्टर की सलाह के कैल्शियम, विटामिन D या आयोडीन की अधिक मात्रा वाले सप्लीमेंट न लें।
बार-बार फ्रैक्चर होने, हड्डियों में दर्द या थायरॉइड संबंधी लक्षणों पर चिकित्सकीय सलाह लें।
निष्कर्ष: सेंधा नमक अपने आप हड्डियों को खोखला नहीं करता, लेकिन बिना आयोडीन वाले नमक पर पूरी तरह निर्भर रहने से भोजन में आयोडीन की कमी का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए नमक की मात्रा सीमित रखते हुए आयोडीन युक्त नमक और संतुलित आहार को प्राथमिकता दें। हड्डियों की कमजोरी या थायरॉइड के लक्षण होने पर सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच कराएं।