Highlights:

  • जेडीयू ने अनंत सिंह और नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया।
  • अनंत सिंह पर पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगाए गए
  • नीलम देवी पर भी दलविरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप है।
  • 12 फरवरी 2024 को बिहार विधानसभा के फ्लोर टेस्ट में नीलम देवी ने आरजेडी से अलग रुख अपनाकर एनडीए सरकार का समर्थन किया था

पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने मोकामा के विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है। जेडीयू की इस कार्रवाई से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अनंत सिंह पर पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार करने, दूसरी पार्टी के प्रत्याशी का समर्थन करने और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। वहीं, उनकी पत्नी नीलम देवी पर भी पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप लगाया गया है।

जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने शनिवार शाम को दोनों नेताओं की प्राथमिक सदस्यता समाप्त करने का आदेश जारी किया। इसके साथ ही अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा करते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को पत्र लिखे जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, विधानसभा सदस्यता को लेकर अंतिम फैसला संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होगा।

अनंत सिंह और नीलम देवी पर JDU ने क्यों की कार्रवाई?

जेडीयू की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, अनंत सिंह पर बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान पार्टी के उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ प्रचार करने का आरोप है। उन पर जन सुराज के प्रत्याशी का समर्थन करने और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए गए हैं।पार्टी ने इन गतिविधियों को अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी आचरण मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की है। अनंत सिंह के साथ उनकी पत्नी नीलम देवी को भी छह साल के लिए निष्कासित किया गया है। नीलम देवी पर दलविरोधी गतिविधियों में शामिल रहने का आरोप लगाया गया है। इस कार्रवाई का राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि नीलम देवी का नाम बिहार की उस सियासी उठापटक से जुड़ा रहा है, जब वर्ष 2024 में नीतीश कुमार की सरकार को विधानसभा में बहुमत साबित करना था।

जब तेजस्वी यादव का साथ छोड़ नीतीश सरकार के पक्ष में गई थीं नीलम देवी

बिहार की राजनीति में 12 फरवरी 2024 का दिन काफी अहम रहा था। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होकर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में वापसी की थी। इसके बाद बिहार में एनडीए की नई सरकार बनी और विधानसभा में बहुमत साबित करने की चुनौती सामने आई। फ्लोर टेस्ट से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विधायकों को अपने-अपने पाले में बनाए रखने की कोशिशें तेज हो गई थीं। इसी दौरान राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के तीन विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया। नीलम देवी, चेतन आनंद और प्रह्लाद यादव ने सदन में एनडीए के पक्ष में मतदान किया। इस घटनाक्रम ने बिहार के राजनीतिक समीकरणों को लेकर खूब चर्चा बटोरी। 

नीलम देवी उस समय आरजेडी की विधायक थीं। उनके इस रुख को नीतीश कुमार की सरकार के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना गया। फ्लोर टेस्ट में एनडीए सरकार ने बहुमत हासिल कर लिया और सरकार पर मंडरा रहा संकट टल गया। नीलम देवी के इस फैसले के बाद उनके राजनीतिक रुख को लेकर लगातार चर्चा होती रही। अब जेडीयू की ओर से उनके खिलाफ की गई कार्रवाई ने एक बार फिर पुराने फ्लोर टेस्ट और बिहार की सत्ता की राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

कैसे RJD से JDU तक पहुंचीं नीलम देवी?

नीलम देवी का राजनीतिक सफर उनके पति अनंत सिंह की सियासी पृष्ठभूमि से भी जुड़ा रहा है। अनंत सिंह मोकामा की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। एके-47 मामले में सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई थी। इसके बाद वर्ष 2022 में मोकामा विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ। इस उपचुनाव में नीलम देवी ने आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इस तरह वह मोकामा से विधायक बनीं। उस समय अनंत सिंह की अनुपस्थिति में नीलम देवी की जीत को मोकामा की राजनीति में उनके परिवार के प्रभाव के तौर पर देखा गया। 

बाद में अनंत सिंह को पटना हाईकोर्ट से राहत मिली और उनकी सजा रद्द होने के बाद उनकी राजनीतिक स्थिति में बदलाव आया। वर्ष 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह जेडीयू के टिकट पर मोकामा से मैदान में उतरे और जीत दर्ज की। इस तरह जिस परिवार की राजनीतिक पहचान लंबे समय तक मोकामा और आरजेडी की राजनीति से जुड़ी रही, वह बाद में जेडीयू के साथ नजर आया। अब पति-पत्नी दोनों को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किए जाने के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम पर नजरें रहेंगी।

अनंत सिंह की विधायकी पर भी उठे सवाल

जेडीयू ने अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई के साथ विधानसभा अध्यक्ष को उनकी सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा से जुड़ा पत्र भी भेजा है। ऐसे में अब यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर आगे क्या निर्णय होता है। पार्टी से निष्कासन और विधानसभा की सदस्यता समाप्त होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। केवल पार्टी से निष्कासित होने से किसी विधायक की सदस्यता अपने आप समाप्त नहीं होती। इसके लिए लागू कानून, संबंधित तथ्यों और विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय के आधार पर प्रक्रिया आगे बढ़ती है। इसलिए अनंत सिंह की विधायकी को लेकर अंतिम स्थिति विधानसभा की ओर से होने वाली कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।

बाढ़-मोकामा के इलाके में छोटे सरकार के नाम से मशहूर हैं अनंत सिंह

बाढ़-मोकामा के इलाके में छोटे सरकार के नाम से मशहूर अनंत सिंह अपने बड़े भाई दिलीप सिंह के निधन के बाद अंडरवर्ल्ड से राजनीति में आए। दिलीप सिंह जनता दल और फिर लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल के नेता और मंत्री रहे थे। 2000 में दिलीप सिंह को तब अंडरवर्ल्ड के सबसे बड़े डॉन सूरजभान सिंह ने जेल में रहते ही निर्दलीय लड़कर हरा दिया था। सूरजभान 2004 में बेगूसराय जिले की बलिया लोकसभा सीट से रामविलास पासवान की लोजपा के टिकट पर सांसद बन गए तो 2005 में अनंत सिंह ने जेडीयू के टिकट पर विधायक की पारी शुरू की। अनंत सिंह बाढ़ लोकसभा के चुनाव में मदद करके नीतीश कुमार के करीब आए थे। 2015 में जब नीतीश और लालू गठबंधन में लड़े तो अनंत सिंह निर्दलीय लड़े और जीते। उस चुनाव में नीरज कुमार जेडीयू कैंडिडेट थे, जिन्हें एमएलसी चुनाव में हराने के लिए अनंत सिंह बागी हो गए।बिहार की राजनीति में क्या होगा अगला कदम?

अनंत सिंह और नीलम देवी के निष्कासन से मोकामा की राजनीति में नई हलचल पैदा होने की संभावना है। एक ओर अनंत सिंह क्षेत्र में अपना प्रभाव रखने वाले नेता माने जाते हैं, वहीं दूसरी ओर नीलम देवी का राजनीतिक सफर आरजेडी से शुरू होकर जेडीयू तक पहुंचा है। वर्ष 2024 के फ्लोर टेस्ट में नीलम देवी के रुख ने नीतीश कुमार की सरकार को लेकर राजनीतिक बहस को तेज किया था। अब उसी नेता के खिलाफ जेडीयू की कार्रवाई ने राजनीतिक समीकरणों पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल सबकी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अनंत सिंह और नीलम देवी आगे किस राजनीतिक रास्ते को चुनते हैं और विधानसभा सदस्यता को लेकर क्या फैसला सामने आता है।