Highlights:

  • केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने शनिवार शाम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की
  • नीतीश कुमार के सात सर्कुलर रोड स्थित आवास पर करीब आधे घंटे तक चली मुलाकात में विजय चौधरी भी मौजूद रहे
  • मुलाकात ऐसे समय हुई, जब जदयू ने मोकामा विधायक अनंत सिंह को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया
  • अनंत सिंह को समझाने की जिम्मेदारी पहले ललन सिंह को सौंपी गई थी

पटना (Threesocieties.com Desk): बिहार की राजनीति में शनिवार को जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से जुड़े दो घटनाक्रमों ने सबका ध्यान खींचा। एक ओर केंद्रीय मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की, तो दूसरी ओर पार्टी ने मोकामा विधायक अनंत सिंह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। अनंत सिंह पर कार्रवाई के बीच नीतीश कुमार और ललन सिंह की करीब आधे घंटे की मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दिया।

नीतीश कुमार के आवास पर हुई मुलाकात

जदयू के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने शनिवार की शाम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके आवास सात सर्कुलर रोड पर मुलाकात की। इस दौरान बिहार सरकार के जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी भी मौजूद थे। मुलाकात को औपचारिक बताया गया, लेकिन इसके समय को लेकर राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा रही। बताया गया कि ललन सिंह करीब आधे घंटे तक नीतीश कुमार के आवास पर रहे। इसके बाद नीतीश कुमार भी उन्हें छोड़ने उनके आवास तक गए। यह मुलाकात ऐसे समय हुई, जब विधान परिषद चुनाव के दौरान पार्टी के भीतर उभरे मतभेदों और अनंत सिंह के रुख को लेकर जदयू में राजनीतिक गतिविधियां तेज थीं।

अनंत सिंह को मनाने की जिम्मेदारी ललन सिंह को मिली थी

विधान परिषद चुनाव के दौरान अनंत सिंह के कथित पार्टी विरोधी रुख को लेकर जदयू नेतृत्व नाराज था। उन्हें समझाने की जिम्मेदारी ललन सिंह को सौंपी गई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ललन सिंह ने अनंत सिंह से बातचीत भी की थी, लेकिन इसके बावजूद विवाद नहीं सुलझ सका।इसके बाद पार्टी ने अनंत सिंह के खिलाफ कड़ा कदम उठाया। जदयू की इस कार्रवाई को पार्टी अनुशासन और संगठनात्मक फैसलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, नीतीश कुमार और ललन सिंह की मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसे लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई। इसलिए मुलाकात को अनंत सिंह पर कार्रवाई से सीधे जोड़कर देखना फिलहाल अटकल ही होगा।

अनंत सिंह पर जदयू का बड़ा एक्शन

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ललन सिंह की मुलाकात के दौरान ही जदयू ने मोकामा विधायक अनंत सिंह की पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समाप्त करते हुए उन्हें छह साल के लिए निष्कासित करने का फैसला लिया। इस कार्रवाई से बिहार की राजनीति में अनंत सिंह की भूमिका और जदयू के साथ उनके संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। विधान परिषद चुनाव के दौरान सामने आए घटनाक्रम के बाद पार्टी का यह फैसला राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। पार्टी से निष्कासन का फैसला और विधानसभा की सदस्यता से जुड़ा मामला अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। किसी विधायक की विधानसभा सदस्यता पर अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया के तहत ही होता है।

विधानसभा सदस्यता को लेकर भी चर्चा

रिपोर्ट के मुताबिक, अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा विधानसभा अध्यक्ष से करने की बात भी सामने आई है। ऐसे में आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि पार्टी से निष्कासन अपने आप विधानसभा की सदस्यता समाप्त नहीं करता। सदस्यता से संबंधित कोई भी फैसला लागू संवैधानिक प्रावधानों, नियमों और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के आधार पर ही होगा।

विधान परिषद चुनाव के बाद बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी

विधान परिषद चुनाव के दौरान और उसके बाद अनंत सिंह लगातार राजनीतिक चर्चा में रहे। उनके रुख को लेकर जदयू में नाराजगी की खबरों के बीच पार्टी ने निष्कासन का फैसला लिया। दूसरी ओर, ललन सिंह की नीतीश कुमार से मुलाकात ने भी राजनीतिक समीकरणों को लेकर सवाल खड़े किए। हालांकि, मुलाकात का आधिकारिक एजेंडा स्पष्ट नहीं होने के कारण इसके पीछे किसी खास राजनीतिक रणनीति का दावा करना उचित नहीं होगा।

आधे घंटे की मुलाकात और जदयू की कार्रवाई पर टिकी नजरें

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार, ललन सिंह और अनंत सिंह से जुड़े इन घटनाक्रमों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री की मुलाकात चर्चा में रही, तो दूसरी ओर मोकामा विधायक के खिलाफ पार्टी की कार्रवाई ने सियासी माहौल गरमा दिया।अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि जदयू के इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर क्या स्थिति बनती है और अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता से जुड़े मामले में आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है।