BRICS Summit: PM मोदी का कूटनीतिक दम! तीन दिन में 15 बैठकें, शी-पुतिन से संवाद

PM मोदी ने BRICS Summit के दौरान 3 दिनों में 15 द्विपक्षीय बैठकें कीं। शी चिनफिंग, पुतिन, पेजेशकियन समेत कई नेताओं से मुलाकात और क्रिटिकल मिनरल्स पर बड़ा संदेश दिया।

BRICS Summit: PM मोदी का कूटनीतिक दम! तीन दिन में 15 बैठकें, शी-पुतिन से संवाद
BRICS Summit में PM मोदी की ताबड़तोड़ डिप्लोमेसी।

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     Highlights:

  • BRICS Summit के दौरान PM मोदी ने तीन दिनों में कीं 15 द्विपक्षीय बैठकें
  • रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से अहम बातचीत
  • ईरान, UAE, मलेशिया, इथियोपिया और कई अफ्रीकी देशों के नेताओं से मुलाकात
  • UN महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी पीएम मोदी की अहम बैठक

नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तीन दिवसीय कूटनीतिक कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहा। पीएम मोदी ने सम्मेलन से इतर विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के साथ 15 द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन मुलाकातों में रूस, चीन, ईरान, अफ्रीकी देशों के अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया, खाड़ी और मध्य एशिया के नेताओं के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों पर व्यापक चर्चा हुई।

इन बैठकों में व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, तकनीक, सप्लाई चेन, महत्वपूर्ण खनिज और क्षेत्रीय व वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों जैसे अहम मुद्दे प्रमुख रहे। इसके अलावा पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रमुखों और प्रतिनिधियों से भी बातचीत की।

 नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बहुपक्षीय मंच पर भारत की प्राथमिकताओं को रखने के साथ-साथ अलग-अलग देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को भी मजबूत करने पर जोर दिया। तीन दिनों के दौरान पीएम मोदी ने रूस, चीन, ईरान, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, UAE, इथियोपिया, कजाकिस्तान, फिलीपींस, मिस्र और बुरुंडी समेत कई देशों के नेताओं से मुलाकात की। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के साथ-साथ वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

पहले दिन पुतिन और पेजेशकियन से मुलाकात

BRICS Summit के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। बातचीत में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई। दोनों नेताओं ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, बुनियादी ढांचा, तकनीक, महत्वपूर्ण खनिज और नागरिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। इसके साथ ही रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति समेत कई वैश्विक मुद्दों पर भी बातचीत हुई। समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा रहे।

इसी दिन पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच भारत-ईरान संबंधों, BRICS सहयोग और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए बातचीत एवं कूटनीति को भारत के समर्थन को दोहराया। प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात की। इससे BRICS Summit के दौरान भारत की कूटनीतिक गतिविधियों को बहुपक्षीय आयाम मिला।

दूसरे दिन शी चिनफिंग से मुलाकात पर रही नजर

BRICS Summit के दूसरे दिन प्रधानमंत्री मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ बैठक सबसे ज्यादा चर्चा में रही। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की। बैठक में सीमा से जुड़े मुद्दे, सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता, व्यापार, आर्थिक संबंध, सप्लाई चेन और लोगों के बीच संपर्क जैसे विषयों पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने इस दौरान जोर दिया कि मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। भारत की ओर से आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए संबंधों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया गया। शी चिनफिंग के साथ बैठक ऐसे समय में हुई जब महत्वपूर्ण खनिजों और वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर दुनिया में चिंता बढ़ी हुई है।

मलेशिया और UAE के नेताओं से भी अहम बातचीत

पीएम मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, रक्षा, सेमीकंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इकोनॉमी, ऊर्जा और फिनटेक समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। UAE के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बैठक में भारत-UAE रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर बातचीत हुई। रक्षा, तकनीक, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्र प्रमुख रहे। इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के साथ पीएम मोदी ने भारत-अफ्रीका संबंधों को और मजबूत करने तथा द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

तीसरे दिन अफ्रीका से दक्षिण-पूर्व एशिया तक कूटनीतिक पहुंच

BRICS Summit के तीसरे दिन भी पीएम मोदी का कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहा। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव, फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी और बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरिस्टे नदायिशिमिये के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इसके अलावा युगांडा और नाइजीरिया के नेतृत्व के साथ भी बातचीत हुई।

दक्षिण अफ्रीका के साथ बातचीत BRICS के लिहाज से विशेष महत्व रखती है, क्योंकि वह समूह के प्रमुख संस्थापक सदस्यों में शामिल है और ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर भारत का महत्वपूर्ण साझेदार है। मिस्र और बुरुंडी के साथ बैठक से अफ्रीका में भारत की कूटनीतिक पहुंच को मजबूती मिली, जबकि कजाकिस्तान के साथ बातचीत ने मध्य एशिया में सहयोग के नए रास्तों पर चर्चा का अवसर दिया। फिलीपींस और मलेशिया के साथ बातचीत ने दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत के बढ़ते रणनीतिक संबंधों को भी रेखांकित किया।

क्रिटिकल मिनरल्स और तकनीक को हथियार बनाना खतरनाक: PM मोदी

BRICS Summit के समापन सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक सप्लाई चेन और तकनीक को लेकर बेहद अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स का हथियार के रूप में इस्तेमाल साझा प्रगति के रास्ते में बाधा बन सकता है। पीएम मोदी ने BRICS देशों से ऐसी व्यवस्था विकसित करने का आह्वान किया, जिससे महत्वपूर्ण संसाधनों और तकनीक की उपलब्धता को लेकर वैश्विक स्तर पर भरोसा कायम रहे।

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई को लेकर दुनिया के कई देशों की निर्भरता और चिंताएं बढ़ी हुई हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, रक्षा, ऊर्जा और आधुनिक तकनीक जैसे क्षेत्रों के लिए क्रिटिकल मिनरल्स बेहद महत्वपूर्ण हैं।BRICS Summit के समापन सत्र में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग समेत कई प्रमुख वैश्विक नेता मौजूद थे। ऐसे में पीएम मोदी का क्रिटिकल मिनरल्स पर दिया गया संदेश खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

वैश्विक तनावों के बीच सप्लाई चेन पर चिंता

पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में तनाव लगातार बढ़ रहे हैं और इसका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। महामारी, पर्यावरणीय आपदाओं और सप्लाई चेन में व्यवधान ने यह साबित किया है कि परस्पर निर्भर दुनिया में कोई भी संकट केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता। उन्होंने BRICS देशों से चुनौतियों की पहले पहचान करने, उनसे निपटने की तैयारी करने और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने BRICS की नई दिल्ली घोषणा में सहयोग से जुड़े कई प्रावधानों का उल्लेख किया। इनमें संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए शुरुआती चेतावनी प्रणाली, आपदा प्रबंधन में सहयोग और सप्लाई चेन में भरोसा बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं।

डिजिटल कृषि और AI पर भी भारत का जोर

प्रधानमंत्री ने BRICS Network on Digital Agriculture का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को किसानों की वास्तविक जरूरतों से जोड़कर कृषि क्षेत्र में नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि BRICS के तहत विकसित होने वाले समाधानों का लाभ केवल सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इनका इस्तेमाल ग्लोबल साउथ की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी किया जाना चाहिए।

ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने पर जोर

पीएम मोदी ने कहा कि विकासशील देश BRICS पर इसलिए भरोसा कर रहे हैं क्योंकि यहां उनकी आवाज सुनी जाती है, उनके अनुभवों को महत्व दिया जाता है और समाधान उन पर थोपने के बजाय साझेदारी के जरिए तैयार किए जाते हैं। उन्होंने रोजगार सृजन, शोध, महिलाओं के सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, कृषि और तकनीक जैसे क्षेत्रों में BRICS सहयोग के फायदे आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया।BRICS के मंच से प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की प्राथमिकता केवल आर्थिक और रणनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि विकासशील देशों के लिए व्यावहारिक और साझा समाधान तैयार करना भी है।

15 बैठकों से आगे बढ़ी भारत की कूटनीतिक पहल

BRICS Summit के दौरान हुई 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकों के अलावा पीएम मोदी ने कई अन्य नेताओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ अनौपचारिक बातचीत भी की। इससे यह संकेत मिला कि भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता के दौरान बहुपक्षीय एजेंडे के साथ-साथ द्विपक्षीय कूटनीति को भी समान महत्व दिया। एक तरफ BRICS के मंच पर वैश्विक मुद्दों पर सामूहिक चर्चा हुई, वहीं अलग-अलग देशों के नेताओं के साथ बैठकों ने भारत को व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर सीधे बातचीत का अवसर दिया।

समापन सत्र में पीएम मोदी ने कहा कि BRICS में विकसित समाधान केवल BRICS तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि ग्लोबल साउथ की जरूरतों के अनुरूप होने चाहिए। भारत का संदेश साफ रहा—विविधता BRICS की पहचान है, सहयोग उसकी ताकत और साझा प्रगति पूरी मानवता के हित में होनी चाहिए।