सुप्रीम कोर्ट से BCCL को झटका, मेसर्स एटी-लिब्रा बीपीएल को देने होंगे 46.20 करोड़

गोलकडीह एनसी परियोजना ठेका विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने BCCL की अपील खारिज की। कंपनी को 46.20 करोड़ रुपये और 10.5% सालाना ब्याज देना होगा।

सुप्रीम कोर्ट से BCCL को झटका, मेसर्स एटी-लिब्रा बीपीएल को देने होंगे 46.20 करोड़
बीसीसीएल को 46.20 करोड़ देने होंगे, 10.5% ब्याज भी।

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      Highlights:

  • गोलकडीह एनसी परियोजना के ठेका विवाद में बीसीसीएल को सुप्रीम कोर्ट से झटका
  • शीर्ष अदालत ने सिविल अपील संख्या 1629/2026 खारिज की
  • मेसर्स एटी-लिब्रा बीपीएल संयुक्त उपक्रम को 46.20 करोड़ रुपये के भुगतान का फैसला बरकरार
  • मूल राशि पर 10.5 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा
  • धनबाद वाणिज्यिक न्यायालय और झारखंड हाईकोर्ट से भी बीसीसीएल को राहत नहीं मिली

धनबाद (Threesocieties.com Desk): गोलकडीह एनसी परियोजना के आउटसोर्सिंग ठेका विवाद में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने कंपनी की अपील खारिज कर 46.20 करोड़ रुपये के भुगतान से जुड़े निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। इस राशि पर 10.5 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा। आठ अक्टूबर 2026 को पारित आदेश के बाद बीसीसीएल के सामने अब पुनर्विचार याचिका दायर करने का विकल्प है।

धनबाद की गोलकडीह एनसी परियोजना से जुड़े इस मामले में बीसीसीएल को धनबाद वाणिज्यिक न्यायालय से लेकर झारखंड हाईकोर्ट तक राहत नहीं मिली थी। अब सुप्रीम कोर्ट में भी कंपनी की अपील खारिज होने से ठेका विवाद में उसके लिए कानूनी चुनौती बढ़ गई है। विवाद मेसर्स एटी-लिब्रा बीपीएल संयुक्त उपक्रम को किए जाने वाले भुगतान से संबंधित है।

बीसीसीएल ने 14 अक्टूबर 2026 को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) को दी गई नियामकीय सूचना में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी दी। कंपनी के अनुसार, शीर्ष अदालत ने सिविल अपील संख्या 1629/2026 में आठ अक्टूबर को आदेश पारित करते हुए उसकी अपील खारिज कर दी।

46.20 करोड़ रुपये के साथ 10.5 प्रतिशत सालाना ब्याज

इस मामले में धनबाद वाणिज्यिक न्यायालय ने आठ मई 2023 को बीसीसीएल को मेसर्स एटी-लिब्रा बीपीएल संयुक्त उपक्रम को 46.20 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही इस राशि पर 10.5 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश भी दिया गया था। बीसीसीएल ने वाणिज्यिक न्यायालय के फैसले को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने आठ अगस्त 2024 को कंपनी की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली।

अब मूल राशि के अतिरिक्त ब्याज का भुगतान भी महत्वपूर्ण होगा। कुल देनदारी कितनी होगी, यह ब्याज की गणना की अवधि और संबंधित न्यायिक आदेश की शर्तों पर निर्भर करेगा। बीसीसीएल की ओर से दी गई नियामकीय जानकारी में भुगतान की अंतिम राशि और भुगतान की समयसीमा का उल्लेख नहीं किया गया है।

2010 में जारी निविदा से जुड़ा है विवाद

पूरा मामला बीसीसीएल के बस्ताकोला एरिया की गोलकडीह एनसी परियोजना में भारी अर्थ मूविंग मशीनों (एचईएमएम) को किराये पर लेने से संबंधित आउटसोर्सिंग ठेके से जुड़ा है। इस ठेके के तहत ओवरबर्डन हटाने, उसकी दोबारा ढुलाई और कोयले के परिवहन जैसे कार्य किए जाने थे।

इन कार्यों के लिए 27 दिसंबर 2010 को निविदा जारी की गई थी। निविदा प्रक्रिया के आधार पर मेसर्स एटी-लिब्रा बीपीएल संयुक्त उपक्रम को ठेका दिया गया। बाद में ठेके से जुड़े विवाद ने कानूनी रूप ले लिया और मामला अदालतों तक पहुंच गया। यह विवाद लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में रहा है। निचली अदालत के फैसले के बाद बीसीसीएल ने उच्च अदालतों में अपील की, लेकिन कंपनी को किसी भी स्तर पर अपेक्षित राहत नहीं मिली।

धनबाद वाणिज्यिक न्यायालय से सुप्रीम कोर्ट तक का घटनाक्रम

मामले में अब तक की न्यायिक प्रक्रिया में तीन महत्वपूर्ण पड़ाव रहे हैं।

8 मई 2023: धनबाद वाणिज्यिक न्यायालय ने बीसीसीएल को 46.20 करोड़ रुपये और उस पर 10.5 प्रतिशत सालाना ब्याज के भुगतान का निर्देश दिया।

8 अगस्त 2024: झारखंड हाईकोर्ट ने बीसीसीएल की अपील खारिज कर वाणिज्यिक न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा।

8 अक्टूबर 2026: सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील संख्या 1629/2026 में बीसीसीएल की अपील खारिज कर दी।

इन आदेशों के बाद भुगतान से जुड़े विवाद में बीसीसीएल को राहत पाने के लिए अब पुनर्विचार याचिका के विकल्प पर विचार करना पड़ रहा है।

सेबी को नियामकीय सूचना देकर दी जानकारी

बीसीसीएल ने 14 अक्टूबर 2026 को सेबी को भेजी गई नियामकीय सूचना में इस कानूनी घटनाक्रम का विवरण दिया। कंपनी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का आदेश आठ अक्टूबर को पारित हुआ था और यह अपील झारखंड हाईकोर्ट के आठ अगस्त 2024 के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। नियामकीय सूचना के माध्यम से कंपनी ने निवेशकों और संबंधित पक्षों को मामले की स्थिति से अवगत कराया है। सुप्रीम कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद अब आगे की कानूनी कार्रवाई पर कंपनी का रुख महत्वपूर्ण होगा।

पुनर्विचार याचिका दायर करने का विकल्प

बीसीसीएल के अनुसार, मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने की सलाह दी है। कंपनी इस विकल्प पर आगे बढ़ने की तैयारी में है। हालांकि, पुनर्विचार याचिका दायर करने की अंतिम स्थिति, उसके दाखिल होने की तारीख और उस पर अदालत का संभावित रुख अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए फिलहाल भुगतान से जुड़े फैसले को चुनौती देने के लिए कंपनी के अगले कदम पर नजर रहेगी।

ब्याज के कारण बढ़ सकती है वित्तीय देनदारी

46.20 करोड़ रुपये की मूल राशि पर 10.5 प्रतिशत सालाना ब्याज का आदेश होने के कारण कुल भुगतान की राशि ब्याज की लागू अवधि के अनुसार बढ़ सकती है। वास्तविक देनदारी की गणना के लिए अदालत के आदेश में निर्धारित शर्तों और ब्याज की गणना की अवधि को ध्यान में रखना होगा। बीसीसीएल के लिए यह मामला केवल ठेका विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी वित्तीय देनदारी भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, उपलब्ध नियामकीय जानकारी के आधार पर कुल ब्याज सहित अंतिम भुगतान राशि का सटीक आंकड़ा बताना संभव नहीं है।

मामला एक नजर में

कंपनी: भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल)

परियोजना: गोलकडीह एनसी परियोजना, बस्ताकोला एरिया

विवाद: आउटसोर्सिंग ठेका और भुगतान

संबंधित पक्ष: मेसर्स एटी-लिब्रा बीपीएल संयुक्त उपक्रम

मूल भुगतान राशि: 46.20 करोड़ रुपये

ब्याज: 10.5 प्रतिशत सालाना

धनबाद वाणिज्यिक न्यायालय का आदेश: 8 मई 2023

झारखंड हाईकोर्ट का आदेश: 8 अगस्त 2024

सुप्रीम कोर्ट का आदेश: 8 अक्टूबर 2026

सेबी को सूचना: 14 अक्टूबर 2026

बीसीसीएल का अगला विकल्प: पुनर्विचार याचिका दायर करने पर विचार