Highlights:
- धनबाद के बारामूड़ी खटाल में करीब 20 एकड़ सरकारी जमीन की नापी की गई
- उपायुक्त के आदेश पर अतिक्रमण की पहचान और सीमांकन की कार्रवाई तेज हुई
- नापी में कुछ घरों और वेडिंग वेल्स के हिस्से सरकारी जमीन के दायरे में आने की बात सामने आई
- संबंधित लोगों को नोटिस देने की तैयारी में प्रशासन, करीब 180 परिवारों में विस्थापन की आशंका
धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की पहचान और सीमांकन को लेकर जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में बारामूड़ी खटाल में करीब 20 एकड़ सरकारी जमीन की नापी की गई। उपायुक्त के आदेश पर धनबाद अंचल अधिकारी की मौजूदगी में लगातार दूसरे दिन यह अभियान चलाया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद इलाके में रहने वाले करीब 180 परिवारों के बीच चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि जमीन की पहचान और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें अपने घरों से हटना पड़ सकता है।
नापी के दौरान कई घरों और वेडिंग वेल्स के कुछ हिस्से सरकारी जमीन के दायरे में आने की बात सामने आई है। प्रशासन अब संबंधित लोगों को नोटिस देने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, फिलहाल जमीन की नापी और सरकारी भूमि की पहचान की कार्रवाई की जा रही है। आगे की कार्रवाई उपायुक्त के आदेश और नियमानुसार की जाएगी।
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बारामूड़ी खटाल में 20 एकड़ सरकारी जमीन की नापी
धनबाद जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन की पहचान और सीमांकन के लिए बारामूड़ी खटाल से अभियान की शुरुआत की है। प्रशासन के अनुसार, यहां करीब 20 एकड़ सरकारी जमीन है। इसी जमीन का वास्तविक क्षेत्रफल और सीमाएं चिह्नित करने के उद्देश्य से नापी कराई जा रही है। धनबाद के अंचल अधिकारी राम प्रवेश के अनुसार, फिलहाल प्राथमिकता सरकारी जमीन की पहचान करना है। उपायुक्त के निर्देश के तहत सबसे पहले बारामूड़ी खटाल की जमीन को चिह्नित किया जा रहा है। नापी के दौरान जिन निर्माणों के सरकारी जमीन के दायरे में आने की बात सामने आई है, उनसे संबंधित लोगों को नोटिस देने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन की इस कार्रवाई से इलाके में रहने वाले परिवारों के बीच अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। स्थानीय लोगों को चिंता है कि यदि उनके घरों के हिस्से सरकारी जमीन में चिह्नित किए जाते हैं, तो भविष्य में उनके सामने आवास का संकट खड़ा हो सकता है।
घरों और वेडिंग वेल्स के हिस्से सरकारी जमीन में आने की बात
जमीन की नापी के दौरान कुछ घरों और वेडिंग वेल्स के हिस्से सरकारी भूमि के दायरे में आने की बात सामने आई है। इसके बाद प्रशासन संबंधित लोगों को नोटिस देने की तैयारी कर रहा है। नोटिस जारी होने की स्थिति में संबंधित लोगों को जमीन और निर्माण से जुड़े अपने दस्तावेजों तथा पक्ष को प्रस्तुत करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, नोटिस जारी होने, उसकी शर्तों और आगे की प्रक्रिया को लेकर अंतिम स्थिति प्रशासन की ओर से स्पष्ट की जानी बाकी है। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की पहचान और उसके बाद की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। ऐसे में नापी के दौरान किसी निर्माण का सरकारी भूमि के दायरे में आना और उसके संबंध में अंतिम प्रशासनिक निर्णय होना अलग-अलग चरण हैं।
जमीन की नापी से 180 परिवारों में बढ़ी चिंता
बारामूड़ी खटाल में जमीन की नापी शुरू होने के बाद इलाके में रहने वाले करीब 180 परिवारों के बीच विस्थापन की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी मौके पर पहुंचे और जमीन का सर्वे किया। उनके मुताबिक, अधिकारियों के आने से पहले उन्हें किसी सूचना या नोटिस की जानकारी नहीं थी। पूछने पर इसे जमीन का सर्वे बताया गया। स्थानीय निवासियों को डर है कि जमीन चिह्नित होने के बाद उन्हें अपने घरों से हटना पड़ सकता है। उनका कहना है कि कई परिवार लंबे समय से इस इलाके में रह रहे हैं और उन्होंने वर्षों की मेहनत से अपने घर बनाए हैं।
लोगों की चिंता केवल आवास तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, यदि उन्हें दूसरी जगह जाना पड़ा, तो बच्चों की पढ़ाई, रोजगार, रोजमर्रा की सुविधाओं और सामाजिक जीवन पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी संबंधित लोगों को नोटिस देने की तैयारी की बात कही गई है। जमीन की नापी के बाद कितने परिवारों या निर्माणों पर कार्रवाई का असर पड़ेगा, इसकी अंतिम तस्वीर संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
वर्ष 2005 में बारामूड़ी खटाल में बसाए जाने का दावा
स्थानीय निवासी आदित्य यादव के अनुसार, वर्ष 2005 में बेकारबांध तालाब के पीछे से लाकर दर्जनों परिवारों को बारामूड़ी खटाल क्षेत्र में बसाया गया था। उनका कहना है कि तब से कई परिवार इस इलाके में रह रहे हैं और उनकी जिंदगी यहां से जुड़ गई है। आदित्य यादव के मुताबिक, लंबे समय तक यहां रहने के बाद एक बार फिर विस्थापन की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
स्थानीय परिवारों का कहना है कि उन्होंने अपने घर बनाने और परिवार को बसाने में वर्षों की मेहनत लगाई है। इलाके में रहने वाले लोगों के सामने बच्चों की शिक्षा, परिवार की आजीविका और रहने की वैकल्पिक व्यवस्था जैसे सवाल भी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को जमीन से संबंधित कार्रवाई करते समय उनकी परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए। हालांकि, वर्ष 2005 में परिवारों को बसाए जाने से संबंधित दावे और प्रत्येक परिवार की जमीन पर स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इस संबंध में प्रशासनिक रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।
पम्पू तालाब और लोको टैंक की जमीन का भी होगा सीमांकन
बारामूड़ी खटाल में नापी के बाद जिला प्रशासन पम्पू तालाब और लोको टैंक की जमीन का भी सीमांकन करने की तैयारी में है। प्रशासन के अनुसार, इन स्थानों पर जमीन की पहचान और वास्तविक सीमाओं को स्पष्ट करने के लिए नापी कराई जाएगी। इस कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी भूमि का सीमांकन करना और अतिक्रमण की स्थिति का पता लगाना है। आगे की कार्रवाई जमीन के रिकॉर्ड, नापी के निष्कर्ष और प्रशासनिक निर्देशों के आधार पर की जाएगी। पम्पू तालाब और लोको टैंक की जमीन की नापी कब शुरू होगी और वहां किन क्षेत्रों को चिह्नित किया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
उपायुक्त से मिलकर पुनर्वास का मुद्दा उठाएंगे स्थानीय लोग
बारामूड़ी खटाल के निवासियों का कहना है कि वे अपनी समस्याएं लेकर उपायुक्त से मिलेंगे। स्थानीय लोग चाहते हैं कि प्रशासन के सामने उनका पक्ष सुना जाए और पुनर्वास की जरूरतों पर भी विचार किया जाए। निवासियों के मुताबिक, यदि उन्हें मौजूदा जगह से हटना पड़ा, तो उनके सामने रहने की व्यवस्था करने के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई और रोजगार को जारी रखने की चुनौती होगी। इसलिए वे चाहते हैं कि किसी भी संभावित कार्रवाई से पहले उनकी स्थिति और उपलब्ध विकल्पों पर चर्चा की जाए। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे उपायुक्त के सामने अपनी समस्याएं रखकर आगे की रणनीति तय करेंगे। फिलहाल उनकी प्रमुख मांग अपनी बात रखने का अवसर और पुनर्वास के मुद्दे पर प्रशासन से बातचीत करना है।
प्रशासनिक कार्रवाई के आगे क्या?
बारामूड़ी खटाल में जमीन की नापी के बाद अब संबंधित भूमि का सीमांकन, जमीन के रिकॉर्ड का मिलान और जरूरत पड़ने पर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह नापी के निष्कर्षों और उपायुक्त के निर्देशों पर निर्भर करेगा। वहीं, स्थानीय परिवारों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है। एक ओर सरकारी जमीन की पहचान और अतिक्रमण से जुड़े मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की तैयारी है, तो दूसरी ओर वर्षों से इलाके में रह रहे परिवारों को अपने आवास और भविष्य की चिंता सता रही है। फिलहाल बारामूड़ी खटाल में नापी की कार्रवाई के बाद किसी परिवार को हटाए जाने की अंतिम घोषणा की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में नोटिस, प्रशासनिक निर्णय और स्थानीय लोगों की मांगों पर आगे होने वाली कार्रवाई से ही स्थिति स्पष्ट होगी।