Highlights:
- बारामुड़ी खटाल संचालकों को छठ पूजा तक के लिए मिली मोहलत
- अंचलाधिकारी राम प्रवेश कुमार ने अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख तय की
- अंचल कार्यालय में सुनवाई के दौरान करीब 200 से 250 लोग पहुंचे
- प्रशासन ने पहले 155 लोगों को बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम की धारा 3 के तहत नोटिस दिया था
धनबाद (Threesocieties.com Desk): धनबाद के बारामुड़ी खटाल में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का मामला लगातार गरमाता जा रहा है। एक तरफ जिला प्रशासन खटाल की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की तैयारी में जुटा है, तो दूसरी तरफ वर्षों से यहां रह रहे परिवारों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया है। इस बीच खटाल संचालकों को छठ पूजा तक के लिए राहत मिली है। धनबाद अंचलाधिकारी राम प्रवेश कुमार ने अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख निर्धारित की है।
हालांकि, प्रशासन ने साफ कर दिया है कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिन लोगों के पास जमीन से संबंधित वैध कागजात नहीं हैं, उन्हें स्वयं अतिक्रमण हटाना होगा। ऐसा नहीं करने पर प्रशासन नियमानुसार बलपूर्वक कार्रवाई करेगा। मामले में राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गयी है। बारामुड़ी खटाल को बचाने के लिए पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और झारखंड सरकार के मंत्री संजय यादव 4 नवंबर को धनबाद पहुंचेंगे। दोनों नेता खटाल बचाओ संघर्ष मोर्चा के कार्यक्रम में शामिल होंगे। ऐसे में बारामुड़ी का विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई के साथ राजनीतिक मुद्दा भी बनता जा रहा है।
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155 लोगों को नोटिस, सुनवाई के लिए पहुंचे 200-250 लोग
बारामुड़ी खटाल में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण की शिकायतों के बाद धनबाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की है। अंचल प्रशासन की ओर से पहले 155 लोगों को नोटिस जारी किया गया था। इन सभी को सोमवार को अंचल कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया था। नोटिस मिलने के बाद सोमवार को धनबाद अंचल कार्यालय में बारामुड़ी खटाल से जुड़े करीब 200 से 250 लोग पहुंच गये। लोग काफी देर तक अंचलाधिकारी का इंतजार करते रहे। बाद में अंचलाधिकारी राम प्रवेश कुमार कार्यालय पहुंचे और संबंधित लोगों की बातें सुनीं। लोगों ने प्रशासन के सामने अपनी परेशानी रखते हुए छठ पूजा तक कार्रवाई रोकने और उसके बाद सुनवाई करने का अनुरोध किया। लोगों की अपील पर अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख तय की गयी।
सीओ का साफ संदेश- सरकारी जमीन से खुद हटाएं कब्जा
सुनवाई के दौरान अंचलाधिकारी राम प्रवेश कुमार ने लोगों को स्पष्ट कर दिया कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। जिन लोगों के पास जमीन से संबंधित वैध दस्तावेज हैं, वे अगली सुनवाई में अपने कागजात प्रस्तुत करें। वहीं, जिन लोगों के पास जमीन पर मालिकाना हक से संबंधित वैध दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें स्वयं कब्जा हटाने की सलाह दी गयी है। सीओ ने कहा कि सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रशासन अपने स्तर से नियमानुसार कार्रवाई करने में सक्षम है। इसके लिए किसी अन्य आदेश का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि संबंधित लोग स्वेच्छा से अतिक्रमण नहीं हटाते हैं, तो प्रशासन बलपूर्वक कार्रवाई करेगा।
ढुलू महतो डीसी से मिले, परिवारों को राहत देने की मांग
धनबाद के सांसद ढुलू महतो ने उपायुक्त आदित्य रंजन से मुलाकात की। सांसद ने गरीब परिवारों को उजाड़ने से पहले पूरे मामले की पृष्ठभूमि और पुनर्वास से जुड़े पुराने सरकारी रिकॉर्ड की जांच करने की मांग की। डीसी ने मामले पर विचार करने की बात कही है। सांसद ढुलू महतो ने उपायुक्त आदित्य रंजन से मुलाकात के दौरान बारामुड़ी खटाल के परिवारों का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों को पहले एक जगह बसाना और फिर वर्षों बाद उन्हें उजाड़ने की कार्रवाई करना उचित नहीं है।
सांसद का कहना था कि प्रशासन को सबसे पहले यह पता लगाना चाहिए कि वर्ष 2005 में इन परिवारों को किस परिस्थिति में और किसके आदेश पर बारामुड़ी में बसाया गया था। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने गलत तरीके से सरकारी जमीन पर कब्जा किया है, तो उसकी जांच होनी चाहिए। लेकिन वर्षों से रह रहे परिवारों और उनकी आजीविका को प्रभावित करने से पहले पूरे मामले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि देखना जरूरी है। सांसद ने डीसी से मांग की कि पुनर्वास से संबंधित पुराने सरकारी रिकॉर्ड की जांच की जाए और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए। मुलाकात के बाद सांसद ने बताया कि उपायुक्त ने मामले पर विचार करने की बात कही है। हालांकि, प्रशासन की ओर से फिलहाल कार्रवाई रोकने या सभी परिवारों को राहत देने का कोई अंतिम आदेश सामने नहीं आया है।
कांग्रेस-JMM पर राजनीति करने का आरोप
बारामुड़ी खटाल विवाद को लेकर कांग्रेस और झामुमो नेताओं की सक्रियता पर भी सांसद ढुलू महतो ने सवाल उठाये। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और झामुमो इस मामले को राजनीतिक रंग दे रहे हैं। सांसद का कहना था कि दोनों दल राज्य सरकार में शामिल हैं। यदि वे वास्तव में प्रभावित गरीब परिवारों के हित में हैं, तो उन्हें सरकार के स्तर पर पहल करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर से निर्देश जारी कर इस मामले में उचित कदम उठाया जा सकता है। ऐसे में केवल राजनीतिक बयानबाजी करने के बजाय प्रभावित परिवारों को राहत दिलाने के लिए पहल करनी चाहिए।
2005 में बेकारबांध से हटाकर बारामुड़ी में बसाया गया था खटाल
बारामुड़ी खटाल विवाद की जड़ करीब 21 साल पुरानी है। वर्ष 2005 में धनबाद की तत्कालीन उपायुक्त डॉ. बीला राजेश के कार्यकाल में बेकारबांध तालाब के किनारे संचालित खटाल को हटाने की कार्रवाई की गयी थी। उस समय पशुपालक परिवारों को वहां से हटाकर बारामुड़ी में बसाया गया था।इसके बाद से परिवार बारामुड़ी में रह रहे हैं। यहां पशुपालन और दूध के कारोबार के जरिए उनकी आजीविका चलती रही है। समय के साथ परिवारों की संख्या बढ़ी और लोगों ने अपने रहने के लिए मकान बना लिये। बच्चों की पढ़ाई, बिजली-पानी के कनेक्शन और अन्य बुनियादी सुविधाओं के साथ यह इलाका एक बस्ती के रूप में विकसित हो गया।
खटाल संचालकों का कहना है कि वे लंबे समय से यहां रह रहे हैं। कई परिवार नगर निगम को होल्डिंग टैक्स भी देते हैं। उनका सवाल है कि जब तत्कालीन प्रशासन ने उन्हें यहां बसाया था, तो अब इतने वर्षों बाद उन्हें अतिक्रमणकारी कैसे माना जा सकता है? हालांकि, होल्डिंग टैक्स जमा करना या लंबे समय से किसी जमीन पर रहना अपने आप में जमीन के मालिकाना हक का प्रमाण नहीं होता। इस मामले में पुनर्वास के आदेश, जमीन आवंटन से जुड़े दस्तावेज और सरकारी अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
18 एकड़ जमीन की मापी, करीब 200 मकानों का सर्वे
बारामुड़ी खटाल में अतिक्रमण की शिकायतों के बाद प्रशासन ने जमीन की मापी करायी थी। इस दौरान करीब 18 एकड़ जमीन चिह्नित की गयी। इसके अलावा इलाके में लगभग 200 मकानों का सर्वे भी किया गया था। मापी और सर्वे के आधार पर प्रशासन ने 155 लोगों को बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम की धारा 3 के तहत नोटिस जारी किया। नोटिस के माध्यम से संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने और जमीन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।अब 19 नवंबर को होने वाली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि कितने लोगों के पास जमीन से संबंधित वैध कागजात हैं और कितने लोगों के खिलाफ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
4 नवंबर को धनबाद आएंगे सांसद पप्पू यादव, मंत्री संजय यादव भी होंगे शामिल
बारामुड़ी खटाल का मामला अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। खटाल संचालकों के समर्थन में पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव 4 नवंबर को धनबाद पहुंचेंगे। उनके साथ झारखंड सरकार के मंत्री संजय यादव भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। बारामुड़ी खटाल बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम सुबह 11 बजे मेमको मोड़ पर निर्धारित किया गया है। दोनों नेताओं के कार्यक्रम में शामिल होने की घोषणा के बाद इस विवाद को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गयी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सांसद और मंत्री प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ क्या रुख अपनाते हैं और खटाल संचालकों की मांगों को किस तरह उठाते हैं।
19 नवंबर की सुनवाई पर टिकी नजरें
फिलहाल बारामुड़ी खटाल के लोगों को छठ पूजा तक की मोहलत मिली है। लेकिन यह राहत स्थायी नहीं है। 19 नवंबर को अंचल कार्यालय में अगली सुनवाई होगी। इस दौरान संबंधित लोगों को जमीन के कागजात के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वैध दस्तावेज नहीं होने पर सरकारी जमीन से कब्जा हटाना होगा। ऐसे में एक तरफ खटाल संचालक अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन अतिक्रमण मुक्त अभियान को लेकर सख्त रुख अपनाये हुए है।
अब देखना होगा कि 19 नवंबर की सुनवाई के बाद बारामुड़ी खटाल के मामले में प्रशासन क्या फैसला लेता है और क्या राजनीतिक हस्तक्षेप से इस विवाद का कोई समाधान निकल पाता है।