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Highlights:

  • मधुबनी के बलिराजगढ़ में ASI की गोली से एक ग्रामीण की मौत, तीन घायल
  • आक्रोशित ग्रामीणों ने DM आनंद शर्मा और SSP योगेंद्र कुमार का किया विरोध 
  • मृतक के घर पर बातचीत के दौरान एक महिला द्वारा DM का कॉलर पकड़ने की बात सामने आई 
  • स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा गार्डों ने DM और SSP को सुरक्षित बाहर निकाला

मधुबनी (Threesocieties.com Desk): बिहार के मधुबनी जिले के बाबूबरही थाना क्षेत्र के बलिराजगढ़ में पुलिस पिकेट पर तैनात एक ASI की फायरिंग से ग्रामीण अशोक यादव की मौत के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों का गुस्सा इतना बढ़ा कि उन्हें शांत कराने पहुंचे जिलाधिकारी (DM) आनंद शर्मा और SSP योगेंद्र कुमार को भी विरोध का सामना करना पड़ा। आक्रोशित भीड़ के बीच दोनों अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की की गई। मृतक के घर पर बातचीत के दौरान एक महिला द्वारा DM का कॉलर पकड़ने की बात भी सामने आई है।

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स्थिति बिगड़ने पर अधिकारियों के सुरक्षा गार्डों ने तत्परता दिखाते हुए DM और SSP को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के बाद प्रशासन ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। मधुबनी जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से पुलिस बल बुलाया गया। 500 से अधिक बिहार पुलिस और BMP जवानों को तैनात किया गया है। जिले के सभी सात SDPO के अलावा दरभंगा जिले के कमतौल अनुमंडल के SDPO भी मौके पर पहुंचे। इस बीच पुलिस प्रशासन ने फरार ASI चंद्रमोहन सिंह की गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। आरोपी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है और उसे पुलिस सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गिरफ्तारी के लिए पांच विशेष टीमों का गठन किया गया है।

DM और SSP के सामने भड़का ग्रामीणों का गुस्सा, धक्का-मुक्की

बलिराजगढ़ में अशोक यादव की मौत के बाद ग्रामीण सड़क पर उतर आए थे। आक्रोशित लोगों ने शव को सड़क पर रखकर बाबूबरही-खुटौना मुख्य मार्ग जाम कर दिया। ग्रामीण आरोपी ASI के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, पीड़ित परिवार को मुआवजा और न्याय की मांग कर रहे थे।सड़क जाम समाप्त कराने और पीड़ित परिवार से मिलने के लिए DM आनंद शर्मा तथा SSP योगेंद्र कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने पहले प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों से बातचीत की। DM ने आश्वासन दिया कि आरोपी पुलिस पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और दोषी को स्पीडी ट्रायल के माध्यम से सजा दिलाने का प्रयास होगा।

इसके बाद DM और SSP मृतक अशोक यादव के घर पहुंचे। वहां वे मृतक की पत्नी अश्मिता देवी और परिजनों से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान माहौल अचानक बिगड़ गया। आक्रोशित लोगों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। एक महिला द्वारा DM का कॉलर पकड़ने की बात भी सामने आई है।अचानक बिगड़े हालात के बीच सुरक्षा गार्डों ने दोनों अधिकारियों को घेरकर वहां से सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की अतिरिक्त टीम मौके पर पहुंची।

500 से अधिक पुलिस जवान तैनात, आठ SDPO संभाल रहे मोर्चा

बलिराजगढ़ में बढ़ते तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। जिले के विभिन्न इलाकों से पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया है।जाम स्थल और आसपास के संवेदनशील इलाकों में बिहार पुलिस तथा BMP के 500 से अधिक जवानों की तैनाती की गई है। मधुबनी जिले के सभी सात SDPO और दरभंगा जिले के कमतौल अनुमंडल के SDPO भी मौके पर मौजूद हैं। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। अधिकारियों की टीम लगातार स्थिति पर नजर रख रही है। पुलिस प्रशासन की प्राथमिकता सड़क जाम समाप्त कराने और इलाके में सामान्य स्थिति बहाल करने की है।

ASI की गोली से अशोक यादव की मौत, तीन अन्य घायल

दरअसल, सोमवार रात बाबूबरही थाना क्षेत्र के बलिराजगढ़ गांव में पुरातात्विक स्थल की सुरक्षा के लिए बनाए गए पुलिस पिकेट पर तैनात ASI चंद्रमोहन सिंह को लेकर विवाद शुरू हुआ था। आरोप है कि ASI देर रात गांव की एक महिला के घर पहुंचा था। उस समय घर में पुरुष सदस्य मौजूद नहीं थे। ASI की गतिविधियों पर संदेह होने के बाद महिला ने कथित तौर पर बाहर से दरवाजे की सिटकनी बंद कर दी और शोर मचाना शुरू कर दिया।

महिला की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर जुटने लगे। देखते ही देखते वहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। ग्रामीणों से घिरने के बाद ASI चंद्रमोहन सिंह ने कथित तौर पर अपनी सर्विस पिस्टल निकालकर पांच से छह राउंड फायरिंग कर दी। इस गोलीबारी में अशोक यादव, धनिकलाल यादव, फूलो देवी और विजेंद्र यादव घायल हो गए। सभी घायलों को तत्काल बाबूबरही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने अशोक यादव को मृत घोषित कर दिया। अन्य तीन घायलों को बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया। अशोक यादव की मौत की खबर फैलते ही इलाके में आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

फरार ASI पर 25 हजार रुपये का इनाम, पांच विशेष टीमें गठित

घटना के बाद आरोपी ASI चंद्रमोहन सिंह फरार हो गया। मधुबनी पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। आरोपी के बारे में विश्वसनीय सूचना देने वाले व्यक्ति को यह राशि दी जाएगी। SSP योगेंद्र कुमार के निर्देश पर आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पांच विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। पुलिस प्रशासन ने आरोपी ASI को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उसे पुलिस सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। उसके खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में स्पीडी ट्रायल कराने का प्रयास किया जाएगा, ताकि दोषी को जल्द सजा दिलाई जा सके।

SSP ने अस्पताल और घटनास्थल पहुंचकर संभाली स्थिति

घटना की सूचना मिलने के बाद SSP योगेंद्र कुमार सक्रिय हुए। वे देर रात सदर अस्पताल पहुंचे और मृतक के परिजनों तथा घायलों से मुलाकात की। उन्होंने पीड़ित परिवार को समुचित इलाज और हर संभव प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। इसके बाद SSP घटनास्थल बलिराजगढ़ पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और पुलिस अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। SSP ने घटना को पुलिस विभाग के लिए बेहद दुखद बताया और भरोसा दिलाया कि आरोपी को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

पहले भी गोलीकांड को लेकर विवादों में रहा है ASI

आरोपी ASI चंद्रमोहन सिंह का नाम इससे पहले भी गोली चलाने की घटना को लेकर विवादों में आ चुका है। वह पूर्व में मधवापुर थाना क्षेत्र में डायल-112 की टीम में प्रतिनियुक्त था। 12 जुलाई 2025 को शराब तस्करी के संदेह में बाइक सवार दो युवकों का पीछा करने के दौरान पिरोखर NH पर पुल के समीप डायल-112 वाहन की बाइक से टक्कर हो गई थी। इस घटना में एक नाबालिग बाइक सवार की मौत हो गई थी। हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया था। आक्रोशित लोगों ने पुलिस टीम पर पथराव किया था। उस समय डायल-112 वाहन में ASI चंद्रमोहन सिंह और चालक चंद्रदीप शास्त्री मौजूद थे।

इस घटना के दौरान पुलिस की ओर से चार से पांच राउंड गोली चलाए जाने की बात भी सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन SSP योगेंद्र कुमार ने ASI चंद्रमोहन सिंह और चालक चंद्रदीप शास्त्री को निलंबित कर दिया था। इस मामले में मधवापुर थाने में तीन प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। मृतक नाबालिग के पिता ने ASI चंद्रमोहन सिंह और डायल-112 के चालक चंद्रदीप शास्त्री के खिलाफ हत्या का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अन्य प्राथमिकी शराब बरामदगी तथा पुलिस पर पथराव और मारपीट से संबंधित थीं।

पुरातात्विक स्थल की सुरक्षा के लिए बनाई गई थी पुलिस पिकेट

बलिराजगढ़ ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व का स्थल है। यहां खुदाई का काम चल रहा था। मई 2026 में खुदाई स्थल पर कुछ उपद्रवी तत्वों द्वारा काम प्रभावित करने और खुदाई में मिले पुरातात्विक अवशेषों की चोरी किए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद पुलिस प्रशासन और ग्रामीणों के बीच बैठक हुई थी। पुरातात्विक स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वहां पुलिस पिकेट बनाने का निर्णय लिया गया। 

इसी के तहत बलिराजगढ़ में पुलिस पिकेट स्थापित कर एक ASI, तीन सुरक्षा कर्मियों और दो चौकीदारों की तैनाती की गई थी। ड्यूटी के बाद पुलिसकर्मी आवासीय बालिका विद्यालय में रहते थे। जिस पुलिस पिकेट को पुरातात्विक स्थल की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी, उसी पिकेट पर तैनात ASI पर अब गोलीबारी और ग्रामीण की हत्या का गंभीर आरोप लगा है। इस घटना ने पुलिसकर्मियों की जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

DM ने एक माह में सहायता दिलाने और दोषी को सजा दिलाने का दिया भरोसा

DM आनंद शर्मा ने ग्रामीणों से बातचीत के दौरान भरोसा दिलाया कि मामले में दोषी पुलिस पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दोषी को स्पीडी ट्रायल के माध्यम से सजा दिलाने का आश्वासन दिया। DM ने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार को जिला स्तर से मिलने वाली सहायता एक माह के भीतर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। अन्य मांगों को राज्य सरकार तक पहुंचाने की बात भी कही गई। हालांकि, ग्रामीणों का आक्रोश कम नहीं हुआ और अधिकारियों को भी विरोध का सामना करना पड़ा।

अब फरार ASI की गिरफ्तारी पर टिकी नजर

बलिराजगढ़ गोलीकांड के बाद मधुबनी पुलिस और जिला प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इलाके में शांति बहाल करना और फरार ASI को गिरफ्तार करना है। एक ग्रामीण की मौत, तीन लोगों के घायल होने, DM और SSP के सामने हुए हंगामे तथा आरोपी पुलिस पदाधिकारी के फरार रहने से मामला बेहद गंभीर हो गया है। पुलिस की पांच विशेष टीमें आरोपी की तलाश में जुटी हैं। वहीं 500 से अधिक जवानों की तैनाती के बीच प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।