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बिहार:पटना में रह रही महिला दिल्ली में बनी बच्चे की मां,मोबाइल से ही देख पा रही है नवजात को

  • वीडियो के जरिये अपने बच्चों को देखा तो मां की आंखों से आंसू छलके

नई दिल्ली।वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के जारी देश्व्यापी लॉकडाउन में देश में लाखों लोग अपनी फैमिली से दूर हैं। बिहार की राजधानी पटना की एक मां भी जो अपने नवजात शिशु से दूर है। मां अपने उस शिशु से जिसके लिए पिछले 11 साल से भगवान से प्रार्थना कर रही थी। मां के लिए यह अभी ऐसा समय है जिनमें उसे न हंसते बन रहा है और न रोते। ऐसे में मोबाइल मां और बच्चे को आपस में जोड़े हुए है। बच्चे के जन्म के एक माह पूरे होने पर शुक्रवार को जनकपुरी बी-ब्लॉक स्थित गौडिम आईवीएफ सेंटर में केक काटकर उसका एक माह का जन्मदिन बड़ी धूमधाम से मनाया गया।
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गौडिम आईवीएफ सेंटर की सीईओ डॉ. मनिका खन्ना के अनुसार वर्ष 2019 में उनके संपर्क में पटना के एक दंपती आये थे। दंपत्ति के विवाह को 11 साल पूरे हो चुके थे,लेकिन उन्हें संतान का सुख प्राप्त नहीं हो पा रहा था। दंपत्ति ने संतान सुख की प्राप्ति के लिए देश के विभिन्न स्थानों में स्थित आईवीएफ सेंटर में संपर्क किया। सात असफल प्रयास के कारण मां के गर्भाशय में ऐडिनोमायोसिस नामक गंभीर बीमारी हो चुकी थी। इसके बाद एक और प्रयास करना बेकार था।अब केवल सरोगेसी का ही विकल्प शेष था।सरोगेसी प्रक्रिया के माध्यम से एक अप्रैल को एक बेटी ने जन्म लिया। लॉकडाउन के चलते बच्ची के माता-पिता पटना से दिल्ली आने में असमर्थ थे। बच्ची के जन्म के बाद दंपती को तुरंत विडियो कॉल कर बच्ची को दिखाया गया। इसके बाद मां की आंखों से आंसू छलक पड़े। समझ ही नहीं आ रहा था कि मां रो रही है या हंस रही है।यह क्षण वाकई काफी मार्मिक था।
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डॉ.मनिका का कहना है कि बच्ची एक हफ्ते की अपरिपक्व हुई थी।जिसके कारण शुरुआत में उसे हेल्थ से जुड़ी थोड़ी परेशानी हुई। चाईल्ड स्पेशलिस्टों की टीम ने बच्ची का उचित इलाज किया। बच्ची अब एक माह की हो चुकी है और बिल्कुल स्वस्थ है।डॉ.मनिका का कहना है कि सरोगेसी से जन्मे शिशु के माता-पिता एकाध दिन के बाद अपने बच्चे को घर ले जाते हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब बच्चा एक माह से सेंटर पर ही रहा हो। पिछले एक माह के दौरान डॉक्टर्स व नर्सिंग स्टाफ का नवजात बच्ची के साथ अटूट संबंध बन गया है। डॉक्टर्स व स्टाफ ने इस बच्ची का नाम अलाय रखा है। लॉकडाउन के दौरान गवर्नमेंट ने कुछ रियायत देते हुए दुकानें खोलने का आदेश दिया था। इसके बाद नर्सिंग स्टाफ बच्ची के लिए नए-नए कपड़े खरीदकर लेकर आई। अभी कोरोना संक्रमण के खतरे के कारण बच्ची की साफ-सफाई से लेकर खाने-पीने का पूरा ख्याल रखा जाता है।

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