HighLights:
- विजयादशमी पर छत्तीसगढ़ में पारंपरिक शस्त्र पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए गए
- IPS अंकिता शर्मा साड़ी पहनकर AK-47 से हर्ष फायरिंग करने के बाद चर्चा में हैं
- अंकिता शर्मा ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2018 में तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की थी
- उनके पति विवेकानन्द शुक्ला भारतीय सेना में अधिकारी हैं
रायपुर (Threesocieties.com Desk): विजयादशमी के अवसर पर छत्तीसगढ़ में पुलिस विभाग की ओर से पारंपरिक शस्त्र पूजन के कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान छत्तीसगढ़ कैडर की IPS अधिकारी अंकिता शर्मा AK-47 राइफल से हर्ष फायरिंग को लेकर चर्चा में आ गईं। साड़ी पहनकर शस्त्र पूजन में शामिल हुईं अंकिता शर्मा की फायरिंग का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं, रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की पुलिस लाइन में भी विधि-विधान से शस्त्रों और विभागीय वाहनों की पूजा-अर्चना की गई।
रायपुर में आयोजित कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने माता शक्ति की आराधना की। वैदिक मंत्रोच्चार और हवन-पूजन के बीच पुलिस के अस्त्र-शस्त्रों तथा वाहनों की पूजा की गई। कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने जनसेवा, नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
दशहरे पर AK-47 से हर्ष फायरिंग को लेकर चर्चा में IPS अंकिता शर्मा
विजयादशमी पर पारंपरिक शस्त्र पूजन के दौरान IPS अंकिता शर्मा के AK-47 से फायरिंग करने का वीडियो चर्चा में आया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वह साड़ी पहनकर शस्त्र पूजन में शामिल हुई थीं। पूजा के बाद उन्होंने राइफल से हर्ष फायरिंग की। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके आत्मविश्वास और निडर अंदाज की तारीफ की, जबकि कुछ ने हथियारों की सुरक्षा और फायरिंग के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल उठाए। शस्त्र पूजन विजयादशमी की पारंपरिक परंपराओं में शामिल है। इस अवसर पर हथियारों की पूजा को शक्ति, साहस, कर्तव्य और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। हालांकि, हथियारों के इस्तेमाल के दौरान निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करना भी जरूरी है।
कौन हैं IPS अंकिता शर्मा?
अंकिता शर्मा छत्तीसगढ़ कैडर की IPS अधिकारी हैं। उनकी पहचान एक ऐसी अधिकारी के रूप में रही है, जिन्होंने सिविल सेवा में आने के लिए लगातार मेहनत की और शुरुआती असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनका जन्म वर्ष 1990 में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में हुआ था। उन्होंने दुर्ग के सेंट जेवियर सीनियर सेकेंडरी स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय से MBA की पढ़ाई पूरी की। रिपोर्ट के अनुसार, वह MBA में गोल्ड मेडलिस्ट भी रही हैं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया और UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। इस परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
दो बार असफलता, तीसरे प्रयास में हासिल की 203वीं रैंक
UPSC सिविल सेवा परीक्षा में अंकिता शर्मा को शुरुआती दो प्रयासों में सफलता नहीं मिली। पहले प्रयास में वह मुख्य परीक्षा के चरण में 15 अंकों से चूक गई थीं। दूसरे प्रयास में भी उन्हें प्रारंभिक परीक्षा में सफलता नहीं मिली। लगातार दो असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव किया और तीसरे प्रयास में फिर परीक्षा दी। वर्ष 2018 में अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया 203वीं रैंक हासिल की और IPS अधिकारी बनने का सपना पूरा किया। उनकी यह यात्रा उन अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा मानी जाती है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलताओं का सामना करने के बाद दोबारा तैयारी कर रहे हैं।
ऐसा रहा अंकिता शर्मा का पुलिसिंग करियर
IPS बनने के बाद अंकिता शर्मा ने छत्तीसगढ़ पुलिस में विभिन्न पदों पर जिम्मेदारी संभाली। उपलब्ध विवरण के अनुसार, उनके करियर की शुरुआत भाटापारा में पोस्टिंग से हुई। इसके बाद उन्होंने रायपुर के आजाद चौक क्षेत्र में नगर पुलिस अधीक्षक यानी CSP के रूप में काम किया। मई 2022 में उन्हें खैरागढ़ का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, वह खैरागढ़ जिले की पहली महिला SP बनी थीं। उनके पुलिसिंग करियर में कानून-व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियों के साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी शामिल रही हैं। उनकी कार्यशैली के कारण उन्हें कई बार 'लेडी सिंघम' के नाम से भी संबोधित किया गया है।
आर्मी ऑफिसर हैं IPS अंकिता शर्मा के पति
अंकिता शर्मा के पति विवेकानन्द शुक्ला भारतीय सेना में अधिकारी हैं। पुलिस सेवा और सेना से जुड़े परिवार की पृष्ठभूमि के कारण उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर जिंदगी भी लोगों की दिलचस्पी का विषय रही है। हालांकि, उनकी पहचान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू UPSC में सफलता हासिल करने के लिए किया गया संघर्ष और पुलिस अधिकारी के रूप में निभाई जा रही जिम्मेदारियां हैं।
रायपुर पुलिस लाइन में भी हुआ शस्त्र पूजन
विजयादशमी के अवसर पर रायपुर पुलिस कमिश्नरेट की पुलिस लाइन स्थित रक्षित आरक्षित केंद्र में पारंपरिक शस्त्र पूजन किया गया। पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने विधि-विधान से माता शक्ति की पूजा की और हवन में भाग लिया। पंडित के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुलिस विभाग के अस्त्र-शस्त्रों, राइफल, रिवॉल्वर, गोला-बारूद और अन्य उपकरणों की पूजा की गई। विभागीय वाहनों पर तिलक लगाकर उनकी भी पूजा-अर्चना की गई।कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने जनसेवा, नागरिकों की सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने का संकल्प लिया। विजयादशमी के इस आयोजन को पुलिस बल के साहस, अनुशासन, पराक्रम और कर्तव्यनिष्ठा की परंपरा से जोड़कर देखा गया।
पुलिस बैंड की धुनों से भक्तिमय हुआ माहौल
शस्त्र पूजन कार्यक्रम के दौरान पुलिस बैंड ने माता की आरती और देशभक्ति से ओतप्रोत धुनें प्रस्तुत कीं। इससे पुलिस लाइन का वातावरण भक्तिमय और राष्ट्रप्रेम की भावना से सराबोर हो गया। पूजा-अर्चना के बाद परंपरा के अनुसार हर्ष फायरिंग भी की गई। इस अवसर पर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला ने पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों और उपस्थित नागरिकों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पर्व के महत्व के साथ पुलिस बल की जिम्मेदारियों और जनसुरक्षा के उद्देश्य को रेखांकित किया।
कार्यक्रम में शामिल हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी
रायपुर में आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अमित तुकाराम कांबले, पुलिस उपायुक्त राबिन्सन गुरिया, स्मृतिक राजनाला, डॉ. अर्चना झा, दीपमाला कश्यप और तारकेश्वर पटेल उपस्थित रहे। इसके अलावा अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त निमिषा पांडेय, सहायक पुलिस कमिश्नर सतीश ठाकुर, निलेश द्विवेदी और सीमा अहिरवार सहित रक्षित निरीक्षक अनीश कुमार सारथी, कमिश्नरेट के अन्य पुलिस अधिकारी-कर्मचारी और सम्मानित नागरिक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
विजयादशमी पर शस्त्र पूजन का क्या है महत्व?
विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। परंपरागत रूप से इस दिन शस्त्रों, औजारों और कार्य में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा की जाती है।पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए शस्त्र पूजन का विशेष महत्व है। यह परंपरा शक्ति के साथ जिम्मेदारी, अनुशासन और कर्तव्य के प्रति समर्पण का संदेश देती है।छत्तीसगढ़ में विजयादशमी के अवसर पर आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रमों में भी यही भावना दिखाई दी। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने नागरिकों की सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।