SIR विवाद में नया मोड़: CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में महाभियोग की तैयारी
SIR विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष संसद के दोनों सदनों में नया प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। कांग्रेस ने विपक्षी दलों से संपर्क किया है। जानें पूरा मामला, 14 आपत्तियों की रिपोर्ट और चुनाव आयोग का जवाब।
HighLights:
- SIR विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष नया प्रस्ताव लाने की तैयारी में
- कांग्रेस ने दोनों सदनों के लिए विपक्षी दलों से संपर्क किया
- रिपोर्ट के अनुसार दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं
- CEC को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह संसदीय प्रक्रिया से होती है
नई दिल्ली (Threesocieties.com Desk): Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष ने संसद में नया कदम उठाने की तैयारी की है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी दल संसद के दोनों सदनों में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए कांग्रेस ने अन्य विपक्षी दलों से संपर्क शुरू कर दिया है।
कांग्रेस सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, प्रस्ताव से संबंधित नोटिस अगले दो सप्ताह के भीतर लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया जा सकता है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्ताव को कानूनी विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया जा रहा है और इसे संयुक्त विपक्ष की ओर से पेश करने की तैयारी है।
SIR विवाद के बीच बढ़ा टकराव
यह घटनाक्रम मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद हुआ है। द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले करीब 10 महीनों में चुनाव आयोग के विभिन्न फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में SIR, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, Form-6 तथा मतदाता डेटा के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है।रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर अपने राजनीतिक हमले तेज कर दिए। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने उनके खिलाफ कार्रवाई और SIR की प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने रिपोर्ट में उठाए गए सवालों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय, सुझाव और टिप्पणियां आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग के मुताबिक, किसी अंतिम फैसले से पहले सदस्यों के बीच विचार-विमर्श और आपत्तियां दर्ज होना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है।
आयोग ने यह भी कहा कि SIR से जुड़े अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची में बदलाव जैसे काम निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित चुनाव अधिकारियों द्वारा किए जाते हैं और ECINet जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म में डेटा सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू हैं। इस तरह एक तरफ रिपोर्ट में दो चुनाव आयुक्तों की लिखित आपत्तियों का उल्लेख है, वहीं चुनाव आयोग इन आपत्तियों को अंतिम फैसलों से अलग बताते हुए अपनी निर्णय प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बता रहा है।
Form-6 और वोटर डेटा पर भी सवाल
रिपोर्ट में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 से जुड़े बदलावों का भी उल्लेख है। इसके अलावा मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण और SIR के दौरान मतदाता नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए जाने की बात कही गई है।इन दावों पर चुनाव आयोग ने व्यापक रूप से कहा है कि आधिकारिक आदेश और फैसले लागू कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी किए जाते हैं। हालांकि, रिपोर्ट में उठाए गए कुछ विशिष्ट सवालों, खासकर Form-6 से जुड़े दावे, पर आयोग की ओर से अलग-अलग बिंदुओं पर स्पष्टीकरण को लेकर बहस जारी है।
पहले भी दिया जा चुका है हटाने का नोटिस
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यह पहला संसदीय प्रयास नहीं है। द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, अप्रैल में विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा में उनके खिलाफ हटाने का नोटिस दिया था, जो अभी लंबित बताया गया है। इससे पहले मार्च में भी दोनों सदनों में उनके खिलाफ कार्रवाई से संबंधित प्रयास हुए थे। अब विपक्ष नए घटनाक्रम और SIR से संबंधित रिपोर्टों को आधार बनाकर नया प्रस्ताव लाने की तैयारी में है।
CEC को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है?
मुख्य चुनाव आयुक्त को सामान्य प्रशासनिक आदेश से हटाया नहीं जा सकता। 2023 के संबंधित कानून के अनुसार CEC को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने की प्रक्रिया जैसी है। वहीं अन्य चुनाव आयुक्तों को हटाने के लिए CEC की सिफारिश आवश्यक होती है। इसलिए संसद में नोटिस दिया जाना अपने आप में CEC को पद से हटाए जाने के बराबर नहीं है। प्रस्ताव को निर्धारित संसदीय और संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरना होगा।
विपक्ष ने क्या-क्या मांगें उठाईं?
SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अलग-अलग विपक्षी दलों ने अलग-अलग मांगें रखी हैं। इनमें CEC को पद से हटाने, चुनाव आयोग के कामकाज की जांच कराने और SIR प्रक्रिया पर पुनर्विचार जैसी मांगें शामिल हैं।कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की है। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने भी सुप्रीम कोर्ट से मामले का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। तृणमूल कांग्रेस और DMK की ओर से भी CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग सामने आई है।हालांकि, इन मांगों और आरोपों को विपक्षी दलों के राजनीतिक दावों के रूप में देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर अंतिम निर्णयों को सर्वसम्मत और प्रक्रिया को कानूनी बताया है।
25 सितंबर को विरोध मार्च की तैयारी
कांग्रेस ने अपने राज्य संगठनों को 25 सितंबर को राज्य चुनाव आयोग कार्यालयों तक विरोध मार्च निकालने का निर्देश भी दिया है। पार्टी की ओर से CEC के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर देशव्यापी राजनीतिक अभियान की तैयारी की जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव पेश किए जाने, विपक्षी दलों की एकजुटता और SIR को लेकर चुनाव आयोग के साथ राजनीतिक टकराव पर सबकी नजर रहेगी।
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